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Marital Crime : ‘पति परमेश्वर’ से ‘किलर वाइफ’ तक? मालवांचल में रिश्तों के टूटने की गहन पड़ताल

Marital Crime Cases : इंदौर के चर्चित राजा-सोनम रघुवंशी कांड से लेकर झाबुआ, धार और देवास तक सामने आए मामलों में रिश्ते के भीतर साजिश का पैटर्न पता चलता है। कहीं प्रेमी बना हत्या की वजह, कहीं सोशल मीडिया विवाद, तो कहीं बीमा क्लेम के लिए रची गई कहानी। पढ़िए सचिन त्रिवेदी की खास रिपोर्ट।
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Aug 13, 2026
Killer wife
मालवांचल में चार मामलों की तहकीकात (Photo: Rajasthan Patrika)

Marital Crime : भारतीय समाज में विवाह को सिर्फ दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि भरोसे और जिम्मेदारी का रिश्ता माना जाता है। खासकर मालवांचल जैसे सामाजिक रूप से पारंपरिक क्षेत्र में लंबे समय से ‘पति परमेश्वर’ की धारणा इस रिश्ते की मजबूत सामाजिक नींव रही है्र लेकिन पिछले कुछ महीनों में सामने आए हत्या के कुछ मामलों ने इसी धारणा के सामने एक असहज सवाल खड़ा कर दिया है, क्या पति-पत्नी के रिश्ते के भीतर पनप रहा अविश्वास अब हिंसा की खतरनाक सीमा तक पहुंच रहा है?

इंदौर के चर्चित राजा-सोनम रघुवंशी कांड ने देशभर में पति-पत्नी के रिश्ते, विवाहेत्तर संबंध और आपराधिक साजिश पर बहस छेड़ी। इसके बाद मालवांचल के अलग-अलग जिलों में सामने आए कुछ मामलों ने भी इस बहस को और गंभीर बना दिया। धार में प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या की साजिश, देवास में प्रेम प्रसंग और बीमा क्लेम के लिए हत्या को सड़क हादसा दिखाने की कोशिश, झाबुआ में सोशल मीडिया रील को लेकर विवाद के बाद पति की हत्या और महू में प्रेमी के साथ मिलकर पति को रास्ते से हटाने का मामला। इन घटनाओं में परिस्थितियां अलग हैं, लेकिन एक साझा बिंदु सामने आता है कि जिस रिश्ते में जीवनभर साथ निभाने का वादा होता है, वहीं किसी एक पक्ष ने दूसरे को रास्ते से हटाने की साजिश रची।

हालांकि, ऐसे मामलों को किसी स्थापित चिकित्सकीय या मनोवैज्ञानिक ‘सिंड्रोम’ के रूप में देखना सही नहीं होगा। ‘किलर वाइफ सिंड्रोम’ यहां इन घटनाओं में दिखाई दे रहे एक अपराधी पैटर्न को समझाने वाला इस्तेमाल किया गया शब्द है। विशेषज्ञों के मुताबिक, हत्या का लिंग-आधारित सामान्यीकरण करने के बजाय प्रत्येक मामले में उसके पीछे मौजूद कारण विवाहेत्तर संबंध, घरेलू हिंसा, आर्थिक लालच, नियंत्रण की प्रवृत्ति, ईर्ष्या, सामाजिक दबाव या रिश्ते से बाहर निकलने में असमर्थता को अलग-अलग समझना जरूरी है।

एक जैसे नहीं सारे मामले, लेकिन कहानी में ‘तीसरा’ बार-बार क्यों?

इन घटनाओं की पड़ताल में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला पहलू है, विवाह के बाहर किसी तीसरे व्यक्ति की मौजूदगी। कुछ मामलों में प्रेमी के साथ नया जीवन शुरू करने की चाह पति की हत्या की कथित वजह बनी, तो कहीं पुराने प्रेम संबंध ने वर्तमान वैवाहिक रिश्ते को खत्म करने की साजिश का रूप ले लिया। दूसरी ओर, झाबुआ का मामला यह संकेत देता है कि हर घटना के पीछे विवाहेत्तर संबंध होना जरूरी नहीं। वहां सोशल मीडिया, पति-पत्नी के बीच नियंत्रण और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर विवाद कथित हत्या तक पहुंच गया। यानी कारण अलग हो सकते हैं, लेकिन जब रिश्ते में संवाद की जगह टकराव और समाधान की जगह हिंसा ले लेती है, तो परिणाम बेहद घातक हो सकता है।

केस स्टडी-01: महू में पति को रास्ते से हटाने की साजिश

प्रेमी के साथ मिलकर हत्या, 48 घंटे में पुलिस ने खोला राज

15-16 जुलाई 2026, निसर्ग वैली, आशापुरा, बड़गोंदा थाना क्षेत्र। पति राजू बामनिया (46) को वापस घर ले जाने पहुंचे थे। इसी दौरान विवाद हुआ और पुलिस के मुताबिक पत्नी ने अपने प्रेमी संतोष चौहान के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची। विवाद के दौरान संतोष ने लोहे की टामी से राजू के सिर पर हमला किया, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने तेजी से जांच करते हुए 48 घंटे में मामले का खुलासा किया और पत्नी तथा उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया। हत्या में इस्तेमाल लोहे की टामी भी बरामद की गई।

इस केस का सबसे बड़ा सवाल: जब वैवाहिक रिश्ता खत्म हो चुका था या किसी तीसरे व्यक्ति की मौजूदगी रिश्ते में तनाव पैदा कर रही थी, तो अलगाव का रास्ता छोड़ हत्या तक पहुंचने की जरूरत क्यों महसूस हुई?

केस स्टडी-02: ‘सनम बेवफा’, प्रेमी के लिए पति को मरवाया

धार के गोंदीखेड़ा में हत्या को डकैती का रूप देने की कोशिश, एक महीने तक चली कथित साजिश।

7 अप्रैल 2026, राजोद थाना क्षेत्र, ग्राम गोंदीखेड़ा। मिर्च व्यापारी देवकृष्ण पुरोहित की उसके घर में धारदार हथियार से हत्या कर दी गई। शुरुआती कहानी ऐसी बनाई गई कि मामला लूट या डकैती का लगे। लेकिन पुलिस जांच आगे बढ़ी तो संदेह की दिशा घर के भीतर ही पहुंच गई। पुलिस के मुताबिक देवकृष्ण की पत्नी प्रियंका का राजगढ़ निवासी कमलेश पुरोहित से पुराना प्रेम संबंध था। आरोप है कि देवकृष्ण इस रिश्ते में बाधा बन रहे थे। इसके बाद पति को रास्ते से हटाने की योजना बनाई गई। पुलिस के अनुसार कमलेश ने कथित तौर पर सुरेंद्र भाटी को एक लाख रुपए की सुपारी दी और घटना को अंजाम दिलाया। हत्या के बाद पुलिस को गुमराह करने के लिए घर में बदमाशों के घुसने और लूट के दौरान हत्या की कहानी बताई गई। जांच में कहानी संदिग्ध मिली। पुलिस ने प्रियंका और कमलेश को गिरफ्तार किया, जबकि कथित सुपारी किलर सुरेंद्र फरार बताया गया।

इस केस की सबसे खतरनाक परत: हत्या से ज्यादा चौंकाने वाली बात अपराध के बाद कहानी गढ़ना था। यानी रिश्ते से पैदा हुआ संकट पहले साजिश में बदला और फिर साजिश को छिपाने के लिए दूसरी कहानी तैयार की गई।

केस स्टडी-03: रील से शुरू हुआ विवाद, पति की मौत पर खत्म

झाबुआ में सोशल मीडिया को लेकर विवाद, इंटरनेट पर हत्या का तरीका खोजा

28 जनवरी 2026, नारेला गांव, थांदला थाना क्षेत्र। झाबुआ का मामला बाकी घटनाओं से अलग है। यहां पुलिस के अनुसार विवाहेत्तर संबंध सामने नहीं आया, बल्कि विवाद सोशल मीडिया रील बनाने को लेकर हुआ। पुलिस के मुताबिक कैलाश माल (25) और उसकी नाबालिग पत्नी शादी समारोह में गए थे। पत्नी डीजे पर नाचते हुए इंस्टाग्राम रील बना रही थी। पति ने रील बनाने और नाचने से मना किया। इसके बाद दोनों में विवाद हुआ। पुलिस जांच के अनुसार बाद में पत्नी ने मोबाइल पर हत्या और फंदा बनाने का तरीका खोजा। घर में कैलाश के सोने के बाद शादी की पगड़ी से फंदा बनाकर उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने 24 घंटे में मामले का खुलासा कर आरोपी को हिरासत में लिया था।

इस घटना का सामाजिक संकेत: डिजिटल दौर में पति-पत्नी के बीच ‘कंट्रोल’ और ‘पर्सनल स्पेस’ को लेकर पैदा होने वाले विवाद अब सिर्फ बहस तक सीमित नहीं रह रहे। हालांकि इस एक घटना के आधार पर सोशल मीडिया को हत्या का कारण मानना उचित नहीं होगा; असल सवाल विवाद के हिंसक रूप लेने का है।

केस स्टडी-04: देवास में हादसा नहीं, हत्या की पटकथा

प्रेम प्रसंग और बीमा क्लेम का एंगल, सड़क हादसे का रूप देने की कोशिश

8-9 जनवरी 2026, उज्जैन-देवास बायपास। नौशराबाद पशु हाट के पास सड़क पर एक व्यक्ति का शव मिलने के बाद मामला पहली नजर में सड़क दुर्घटना का लगा। मृतक की पहचान देवास निवासी 42 वर्षीय राकेश मालवीय के रूप में हुई, लेकिन पोस्टमॉर्टम और जांच में कहानी बदल गई। पुलिस के मुताबिक राकेश की पत्नी का उसके कार्यालय में काम करने वाले देवेंद्र यादव से प्रेम प्रसंग था। आरोप है कि पति को रास्ते से हटाने और बीमा क्लेम का लाभ लेने के लिए पत्नी ने प्रेमी और उसके दो साथियों के साथ मिलकर साजिश रची। पुलिस के अनुसार पहले राकेश को नींद की गोलियां दी गईं। इसके बाद आरोपियों ने घर में घुसकर धारदार ब्लेड से उसकी हत्या कर दी। खून के निशान और साक्ष्य मिटाने के लिए कपड़े धोए गए। फिर शव को बाइक के साथ उज्जैन-देवास बायपास पर फेंक दिया गया और बाइक में तोड़फोड़ कर इसे सड़क हादसा दिखाने की कोशिश की गई।

इस घटना का क्राइम एंगल: यह केस बताता है कि हत्या के पीछे सिर्फ भावनात्मक कारण ही नहीं, आर्थिक गणित भी अपराध को जन्म दे सकता है।

इन चार मामलों में क्या कॉमन है?

प्रेम, पैसा, नियंत्रण और झूठ…चार अलग रास्ते, मंजिल एक

इन मामलों को एक साथ रखने पर चार प्रमुख पैटर्न दिखाई देते हैं…

  1. विवाहेत्तर संबंध: इंदौर जिले के महू और धार के मामलों में पुलिस जांच के अनुसार तीसरे व्यक्ति की मौजूदगी वैवाहिक रिश्ते के संकट का महत्वपूर्ण हिस्सा रही।
  2. रिश्ते में नियंत्रण: आदिवासी जिले झाबुआ की घटना बताती है कि सोशल मीडिया और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर पति-पत्नी के बीच संघर्ष भी गंभीर रूप ले सकता है।
  3. आर्थिक लाभ: देवास के मामले में पुलिस ने बीमा क्लेम को साजिश का हिस्सा बताया। यानी हत्या के पीछे भावनात्मक कारणों के साथ आर्थिक मकसद भी जुड़ सकता है।
  4. अपराध के बाद कहानी: इन मामलों में कथित अपराधियों ने घटना को हादसा, डकैती या किसी दूसरे विवाद का परिणाम दिखाने की कोशिश की। इससे एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आता है, हत्या अचानक हुई हिंसा और योजनाबद्ध अपराध, दोनों रूपों में सामने आ सकती है।

एक्सपर्ट व्यू: ‘साथ रहना’ और ‘साथ निभाना’ एक बात नहीं

झाबुआ के प्रो. कोमल बारिया बताते हैं कि मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो किसी भी रिश्ते में लगातार अविश्वास, ईर्ष्या, अधिकार जताने की प्रवृत्ति, अपमान, आर्थिक निर्भरता और संवादहीनता तनाव को बढ़ा सकते हैं। लेकिन इनमें से कोई भी कारक अपने आप हत्या का कारण नहीं बनता। हत्या तब अपराधी निर्णय का परिणाम बनती है, जब व्यक्ति समस्या के वैध और अहिंसक समाधान के बजाय हिंसा को विकल्प मान लेता है।

धार के पुलिस अधिकारी समीर पाटीदार क्राइम इन्वेस्टिगेशन के नजरिए से बताते हैं कि ऐसे मामलों में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती शुरुआती कहानी के पीछे छिपे वास्तविक रिश्तों को समझना होती है। दुर्घटना, लूट या आत्महत्या का रूप देने की कोशिश हो तो पोस्टमॉर्टम, मोबाइल डेटा, कॉल डिटेल, लोकेशन, डिजिटल सर्च हिस्ट्री, वित्तीय लेन-देन और आरोपियों के आपसी संपर्क जैसे साक्ष्य अहम हो जाते हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता विजय चौपड़ा का एक महत्वपूर्ण तर्क है कि केवल महिलाओं को ‘किलर वाइफ’ और पुरुषों को ‘पीड़ित पति’ के रूप में देखने से समस्या का पूरा सच सामने नहीं आएगा। घरेलू और वैवाहिक हिंसा के मामलों में अपराधी और पीड़ित दोनों लिंगों में हो सकते हैं। इसलिए इन घटनाओं को किसी पूरे महिला वर्ग या पत्नी की छवि से जोड़ना खतरनाक सामान्यीकरण होगा।

Updated on:
13 Aug 2026 04:22 pm
Published on:
13 Aug 2026 04:16 pm