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Menstrual Leave: भारत में 41% महिलाएं पक्ष में, जापान में 1947 से लागू पर एक फीसदी भी नहीं लेती इसका लाभ

Menstrual Leave: सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की टिप्पणी के बाद भारत में पीरियड लीव को लेकर एक बार फिर से बहस चल पड़ी है। इस बारे में स्त्रीवादी विमर्शकार दो हिस्सों में बंटा हुआ है। आइए यह जानते हैं कि जहां यह लीव कई दशक पहले लागू किया जा चुका है, वहां कितनी फीसदी महिलाएं इसे इस्तेमाल में ला रही हैं।

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Mar 14, 2026
Period Leave in India
भारत में पीरियड लीव को लेकर कोई राष्ट्रीय कानून नहीं है।

Paid Menstrual Leave: देश में पीरियड लीव (Menstrual Leave in India) की मांग के एक मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने 13 मार्च 2026 को कहा, 'महिलाओं के लिए अनिवार्य मासिक धर्म अवकाश (Menstrual Leave) महिलाओं के लिए रोजगार पर नकारात्मक असर डाल सकता है। अगर ऐसा कानून बनाया गया तो नियोक्ता महिलाओं को नौकरी देने से बच सकते हैं।' हालांकि देश के कुछ राज्यों (बिहार, ओडिशा, कर्नाटक और कुछ हद तक केरल) में पीरियड लीव की व्यवस्था लागू की गई है। आइए जानते हैं कि पीरियड लीव दिए जाने वाले राज्यों और मुल्कों में श्रम में महिलाओं की भागीदारी कितनी प्रतिशत है।

बिहार में सबसे पहले लागू हुआ पीरियड लीव

देश में सबसे पहले बिहार में लालू प्रसाद यादव की सरकार ने 1992 में ही महिला सरकारी कर्मचारियों के लिए हर महीने दो दिन का पीरियड लीव लागू कर दिया था।हालांकि यह सुविधा राज्य के सरकारी कर्मचारियों तक ही सीमित है। राज्य में महिलाओं को निजी क्षेत्रों में पीरियड लीव की सुविधा नहीं है। वहां 1990 के दशक की शुरुआत में बिहार में महिलाओं की काम में भागीदारी लगभग 5–7% थी। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार में महिलाएं सिर्फ 4 फीसदी थीं, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 6–6.5% के आसपास थी।

तीन दशकों में नौकरियों में महिलाएं तीन गुणा बढ़ीं

बिहार में पिछले तीन दशकों में महिलाओं की नौकरी में दखल गुणात्मक रूप से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2022–23 में बिहार की महिला श्रम भागीदारी दर लगभग 22.4% दर्ज की गई। वहीं यह 2023–24 में बढ़कर लगभग 30.5% तक पहुंच गई। यानी अब लगभग हर 100 कामकाजी उम्र की महिलाओं में 30 के आसपास महिलाएं किसी न किसी आर्थिक गतिविधि में शामिल हैं। इसके पीछे एक बड़ा कारण वर्ष 2016 में सरकारी नौकरियों में महिलाओं के बढ़ने की वजह स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की व्यवस्था मजबूत होने और महिलाओं के लिए 35% आरक्षण की व्यवस्था लागू किया जाना है।

ओडिशा में सरकारी और निजी क्षेत्रों में पीरियड लीव लागू

बिहार के बाद ओडिशा सरकार ने 2024 में 15 अगस्त के दिन महिलाओं के लिए हर महीने एक दिन की पीरियड लीव की व्यवस्था लागू की, जो सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में लागू की गई। इस नीति के तहत महिलाएं अपने मासिक धर्म चक्र के पहले या दूसरे दिन एक दिन की सवैतनिक (Paid) छुट्टी ले सकती हैं। यह एक वैकल्पिक छुट्टी है। महिला अधिकारों को लेकर संघर्ष करने वाले संगठनों का कहना है कि पीरियड लीव अनिवार्य करने से महिलाओं की कार्यदक्षता और उत्पादकता में सुधार हो कसता है। कई महिलाएं मासिक धर्म के दौरान तेज दर्द या स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करती हैं, जिससे काम पर ध्यान देना कठिन हो जाता है। ऐसे में छुट्टी मिलने से वह पूरी क्षमता के साथ बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं।

ओडिशा में महिला श्रम भागीदारी दर 44.7%

ओडिशा में रोजगार के आंकड़ों के अनुसार यहां महिलाओं की स्थिति बिहार से बेहतर है। 2022-23 में राज्य की महिला श्रम भागीदारी दर लगभग 44.7% रही। महिलाओं का श्रम भागीदारी में बढ़ोतरी के पीछे कृषि और ग्रामीण कार्यों में महिलाओं की बड़ी भागीदारी, स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की मजबूत व्यवस्था और राज्य सरकार की महिला-उन्मुख योजनाओं का होना बताया जाता है।

कर्नाटक में महिलाओं को मिलता है 12 पीरियड लीव

कर्नाटक ने 2025 में महिलाओं के लिए हर महीने एक दिन का पीरियड लीव देने की नीति लागू की, जो सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों पर लागू होती है। कुल मिलाकर जिन राज्यों में पीरियड लीव लागू है, वहां महिलाओं की नौकरी की स्थिति पर इसका प्रभाव अभी सीमित और मिश्रित है। सरकारी क्षेत्रों में यह सुविधा महिलाओं के लिए कार्यस्थल को अधिक संवेदनशील बनाती है, लेकिन निजी क्षेत्र में इसको लेकर नियोक्ताओं की आशंकाएं भी बनी हुई हैं।

'पीरियड के लिए अलग से छुट्टी मिले, यह सरासर गलत है'

जेंडर के सवाल पर काम करने वाले आजाद फाउंडेशन की दिल्ली प्रमुख मधुबाला ने पत्रिका से कहा, 'सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की 'महिलाओं के लिए अनिवार्य पीरियड लीव देने की घोषणा करने से नियोक्ता उन्हें नौकरी देने से पीछे हटेंगे' से मैं सहमत हूं।कामकाजी महिलाओं के पास कई तरह की छुट्टियां होती हैं, जिनको पीरियड के दौरान ज्यादा समस्या होती है, वे उनका इस्तेमाल ऐसे दिनों में कर सकती हैं। पीरियड के लिए स्पेशल लीव होना, ठीक नहीं है। स्त्रियों को पुरुषों के मुकाबले ज्यादा लीव होने से कहीं न कहीं उनको ज्यादा गुणवत्ता या ज्यादा समय लगने वाले काम नहीं दिए जाएंगे। उनपर कार्यस्थल पर भरोसा नहीं किया जाएगा। औरतें ज्यादा समय तक छुट्टियों पर रहेंगी तो पितृसत्तात्मक समाज की इस धारणा 'औरतें घर में ही अच्छी लगती हैं' को बल मिलेगा।'

उन्होंने कहा कि एक बात यह जरूर किया जा सकता है कि पीरियड के दौरान फील्ड वाले काम की जगह उन्हें डेस्क वर्क करने देना चाहिए। उन्हें पहले दो दिन भारी और भागदौड़ वाले काम से बचाने का माहौल कार्यस्थलों पर तैयार किया जाना चाहिए।।'

कर्नाटक में 38 फीसदी से ज्यादा महिला श्रम भागीदारी

कर्नाटक में आईटी, सर्विसेज और औद्योगिक क्षेत्रों के कारण महिलाओं के लिए अपेक्षाकृत अधिक अवसर हैं। वर्ष 2022-23 में राज्य की महिला श्रम भागीदारी दर लगभग 38.1% दर्ज की गई। हाल के वर्षों में सरकार ने महिलाओं के लिए कार्यस्थल को अधिक अनुकूल बनाने के लिए पीरियड लीव और अन्य सुविधाओं पर चर्चा शुरू की है। इसके बावजूद राज्य में तकनीकी क्षेत्रों में नेतृत्व पदों पर महिलाओं की संख्या कम होना और पुलिस जैसे क्षेत्रों में महिला प्रतिनिधित्व अभी भी सीमित है।

वहीं दुनिया के कुछ देशों ने महिलाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए पीरियड लीव (Menstrual Leave) की व्यवस्था लागू की है। जापान, दक्षिण कोरिया, इंडोनेशिया, ताइवान, जांबिया और स्पेन में पीरियड लीव लागू की जा चुकी है।

वहीं, यूथ की आवाज और जल आपूर्ति और स्वच्छता सहयोगात्मक परिषद (WSSCC) द्वारा 2020 में किए गए एक ऑनलाइन सर्वे में पाया गया कि भारत में 41% महिलाएं मासिक धर्म अवकाश (Menstrual Leave) नीति लागू करने का समर्थन करती हैं। 

जापान में 1947 से लागू, एक फीसदी महिला भी नहीं लेती लीव

जापान ने 1947 में ही श्रम कानून के तहत महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान छुट्टी लेने का अधिकार दिया था। यदि किसी महिला को पीरियड के दौरान काम करना कठिन लगता है तो नियोक्ता उसे काम करने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। हालांकि यह छुट्टी कई जगहों पर भुगतान वाली नहीं होती। इसके बावजूद एक दिलचस्प तथ्य यह है कि बहुत कम महिलाएं इस छुट्टी का उपयोग करती हैं। वर्ष 2020 के एक सर्वे के अनुसार केवल लगभग 0.9% महिलाएं ही पीरियड लीव लेती हैं, क्योंकि कार्यस्थल पर झिझक और सामाजिक संकोच अब भी मौजूद है। फिर भी रोजगार के मामले में जापान में महिलाओं की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत है और बड़ी संख्या में महिलाएं सेवा और औद्योगिक क्षेत्रों में काम करती हैं। जापान में महिलाओं की श्रम भागीदारी लगभग 55% के आसपास है।

दक्षिण कोरिया में पीरियड लीव मना करने पर जुर्माने का प्रावधान

दक्षिण कोरिया में 1953 में ही महिलाओं को हर महीने एक दिन की पीरियड लीव का अधिकार दिया गया है और यदि कोई कंपनी इसे देने से मना करती है तो उस पर जुर्माना लगाया जा सकता है। हालांकि कई महिलाएं इस छुट्टी का उपयोग नहीं करतीं, क्योंकि उन्हें डर रहता है कि इससे कार्यस्थल पर उनकी छवि प्रभावित हो सकती है। एक सर्वे में लगभग 19% महिलाओं ने ही इस छुट्टी का उपयोग करने की बात कही। इन सबके बावजूद दक्षिण कोरिया में शिक्षा और शहरीकरण के कारण महिलाओं की रोजगार भागीदारी लगातार बढ़ रही है। दक्षिण कोरिया में महिला रोजगार भागीदारी लगभग 53–56% है।

इंडोनेशिया में दो दिन की छुट्टी, पर नहीं होती पालना

इंडोनेशिया में 2003 के कानून के तहत महिलाओं को हर महीने दो दिन की पीरियड लीव का अधिकार दिया गया है। हालांकि कई कंपनियां इस कानून का पूरी तरह पालन नहीं करतीं। कुछ कंपनियां सिर्फ एक दिन की छुट्टी देती हैं या नियमों की अनदेखी करती हैं। इसलिए विशेषज्ञ मानते हैं कि कानून होने के बावजूद इसकी प्रभावी क्रियान्विति एक चुनौती बनी हुई है। इंडोनेशिया में महिला श्रम भागीदारी लगभग 53% है।

ताइवान में साल में तीन छुट्टी, लेने पर काट ली जाती है सैलरी

ताइवान में महिलाओं को साल में तीन दिन की पीरियड लीव मिलती है, जो सामान्य बीमारी की छुट्टियों से अलग होती है। हालांकि इन छुट्टियों के दौरान आधी सैलरी दी जाती है। यह नीति कार्यस्थल पर लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाई गई है और इसे महिला-हितैषी कदम माना जाता है। ताइवान में महिलाओं की रोजगार भागीदारी लगभग 50% से थोड़ा अधिक है। यहां महिलाओं को 30 दिन की सामान्य बीमारी की छुट्टी की सुविधा है।

जाम्बिया में पीरियड लीव नहीं मदर्स डे के नाम पर मिलती है एक छुट्टी

अफ्रीकी देश जाम्बिया में 2015 से महिलाओं को हर महीने एक दिन की छुट्टी दी जाती है, जिसे अनौपचारिक रूप से “मदर्स डे” कहा जाता है। महिला कर्मचारियों को इस छुट्टी के लिए कोई मेडिकल प्रमाण या पूर्व सूचना देने की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि कुछ कंपनियां इस नियम का पालन पूरी तरह नहीं करतीं, लेकिन महिला संगठनों और यूनियनों के दबाव के कारण इसका उपयोग धीरे-धीरे बढ़ रहा है। अफ्रीकी देश जाम्बिया में महिलाओं की श्रम भागीदारी लगभग 53–54% है।

हाल के वर्षों में स्पेन भी इस दिशा में आगे आया है और 2023 में दर्दनाक मासिक धर्म से पीड़ित महिलाओं के लिए विशेष मेडिकल पीरियड लीव की व्यवस्था लागू की है। 2024 में स्पेन की महिला श्रम भागीदारी दर लगभग 52.6% रही।

इन देशों के आंकड़ों से पता चलता है कि जहां पीरियड लीव जैसी नीतियां मौजूद हैं, वहां महिलाओं की रोजगार भागीदारी सामान्यतः 50–55% के आसपास है। इसका मतलब यह है कि हर 100 कामकाजी उम्र की महिलाओं में लगभग 50 से 55 महिलाएं किसी न किसी आर्थिक गतिविधि में शामिल हैं।

Updated on:
14 Mar 2026 05:36 pm
Published on:
14 Mar 2026 04:06 pm