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MP Rural Roads: मध्यप्रदेश के 49 हजार गांवों तक नहीं पहुंची सड़क, इमरजेंसी हो तो मुश्किल से बच पाती है जान

MP Rural Roads: मध्य प्रदेश में डबल इंजन सरकार होने के बावजूद अभी भी बहुत से गांवों में सड़कें ही नहीं पहुंची हैं। इसका सबसे ज्यादा खामियाजा बीमारों, स्कूल जाने वाले छात्र-छात्राओं समेत आपातकालीन जरूरत पड़ जाने वाले लोगों को उठाना पड़ता है। आइए पढ़ते हैं भगवान उपाध्याय की विशेष रिपोर्ट।
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Jul 10, 2026
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मध्य प्रदेश के बहुत सारे गांवों में अभी तक सड़कें ही नहीं पहुंची हैं।

MP Rural Roads: ग्रामीण क्षेत्रों तक सड़क मार्ग बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की तमाम योजनाओं के बावजूद मध्यप्रदेश के लगभग 49 हजार छोटे गांवों तक पहुंचने के लिए सड़क़ नहीं है। कच्चे रास्ते भी इतने खराब हैं कि बारिश के दिनों में वहां से गुजरना भी मुश्किल हो जाता है। कई गांवों के रास्ते बंद होने से आसपास के गांवों से संपर्क टूट जाता है। हालात यह है कि इन गांवों के लोगों को बीमार होने पर खटिया पर डालकर आसपास के अस्पतालों तक पहुंचना पड़ रहा है। हाल में रीवा और सिंगरौली में दो ऐसे दिल को झकझोरने वाले मामले सामने आए, जिनसे नागरिक सुविधाओं के दावों की हकीकत उजागर हो गई।

महिला को खटिया पर डालकर पैदल पहुंचाया अस्पताल, नहीं बची जान

पहला मामला मध्यप्रदेश के रीवा जिले के नदना करौदहा गांव का है। गत रविवार यहां आकाशीय बिजली गिरने से एक महिला गंभीर रूप से झुलस गई। उन्हें कच्चे रास्ते में कीचड़ होने के कारण ग्रामीण खाट पर डालकर दो किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य मार्ग तक ले गए। लगभग दो घंटे में वे अस्पताल पहुंच पाएं, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अस्पताल में डॉक्टरों ने महिला को मृत घोषित कर दिया।

केस 01: बिजली गिरने से महिला बेहोश, दो घंटे बाद अस्पताल पहुंचे

नदना करौदहा निवासी 65 वर्षीय रामकली रावत रविवार को अपने घर जा रही थी, अचानक बारिश शुरू हो गई तो वे रास्ते में रूक गई। इसी दौरान बादलों की गड़गड़ाहट के बीच आकाशीय बिजली गिरी, जिसकी चपेट में आने से रामकली बेहोश होकर गिर पड़ी। परिजनों ने उन्हें रीवा अस्पताल ले जाने का प्रयास किया, लेकिन रास्ते में भारी कीचड़ होने के कारण परेशानी आई। गांव में कोई वाहन नहीं था। पड़ोस के गांव से वाहन की व्यवस्था की गई लेकिन कीचड़ होने के कारण वह वाहन भी गांव तक नहीं आ सकता था। तय किया कि महिला को खटिया पर डालकर ले जाया जाए। लगभग दो किलोमीटर दूर तक गांव के लोग महिला को खटिया पर डालकर कीचड़ भरे रास्ते से मेन रोड तक पहुंचे। वहां से एक जीप में रामकली को रीवा के संजय गांधी अस्पताल ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

पांच लाख रुपए मंजूर, फिर भी सड़क नहीं बनी

नदना करौंदहा के ग्रामीणों का कहना है कि गांव की कच्ची सडक़ हर वर्ष बरसात में कीचड़ में बदल जाती है, जिससे आवागमन पूरी तरह बंद हो जाता है। ऐसी स्थिति में गंभीर मरीजों को गांव से मुख्य सडक़ तक लगभग दो किलोमीटर तक खाट पर ले जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने बताया कि सडक़ निर्माण के लिए विधायक निधि से पांच लाख रुपए स्वीकृत हुए थे, लेकिन अब तक सडक़ का निर्माण नहीं हो पाया।

केस 02: करंट से झुलसी महिला, टांगाटोली करके ले गए अस्पताल

दूसरा मामला भी विंध्य क्षेत्र के सिंगरौली जिले का है। सरई वन परिक्षेत्र के तहत गन्नई बीट में महरैल के जंगल में एक महिला शकुंतला बाई को करंट लग गया। वे बुरी तरह झुलस गई। उन्हें गंभीर हालत में इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाने में भारी दिक्कत आई। बारिश के कारण गांव तक पहुंचने का रास्ता बंद हो गया। रास्ते में इतना कीचड़ था कि कोई भी वाहन वहां तक नहीं आ सकता था।

महिला को खाट पर लिटाया, कंधे पर उठाकर ले गए अस्पताल

घायल महिला को गांव से लगभग दो किलोमीटर दूर मुख्य मार्ग तक ले जाने के लिए ग्रामीणों ने एक तरकीब लगाई। महिला को एक खाट पर लिटाया। कुछ लोगों ने बल्लियों के सहारे खाट को कंधे पर उठाया और कीचड़ से सने रास्ते पर चल पड़े। जैसे-तैसे करके वे मुख्य मार्ग तक पहुंचे। यहां से महिला को एक वाहन से सरई अस्पताल ले जाया गया। महिला का अभी इलाज चल रहा है।

वन विभाग ने इस वजह से रास्ता कर दिया बंद

महरैल और आसपास के ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग के अधिकारियों ने उनका रास्ता बंद कर दिया है, इसलिए सैकड़ों परिवारों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गांव तक पहुंचने के लिए कोई वैकल्पिक मार्ग भी नहीं है। ऐसे में बीमारी, दुर्घटना या अन्य आपात स्थिति में गांव के लोगों की जान पर संकट पैदा हो जाता है। ग्रामीणों ने वन विभाग के अफसरों से कई बार रास्ता खोलने की गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। उधर, सरई के रेंजर योगेंद्र तिवारी ने इस बारे में सवाल करने पर जवाब दिया कि पहले जंगल के बीच रास्ता था, लेकिन अब वहां पौधरोपण कराया जा रहा है, इसलिए उसे बंद करना पड़ा, ताकि पौधों को कोई नुकसान न पहुंचे। उन्होंने बताया कि लोगों का रास्ता नहीं रोका गया है, बल्कि वे जंगल के किनारे दूसरे रास्ते से आ-जा सकते हैं।

Updated on:
10 Jul 2026 10:24 am
Published on:
10 Jul 2026 10:24 am