MP News: विवाह जैसे पवित्र बंधन से युवाओं का भरोसा डगमगाया, तलाक, अपराध के मामले सामने आने के बाद राजधानी भोपाल के नूतन कॉलेज की अनूठी पहल पर संवर रहे रिश्ते, दिलों से दिल जोड़ रही 'आदर्श बहू' परमार्श केंद्र (Ideal Bahu Paramarsh Kendra) की क्लास...
MP News: बदलते दौर में घरेलू विवाद और पारिवारिक तनाव के बीच अब आपराधिक गतिविधियों के सामने आने के बाद युवाओं का विवाह जैसे पवित्र बंधन से भरोसा डगमगाने लगा है। तलाक के बढ़ते मामले, आत्महत्याएं, हत्या की वारदातें सामाजिक परिवेश का घिनौना चेहरा उजागर कर रही हैं। इसी पृष्ठभूमि में राजधानी भोपाल के सरोजिनी नायडू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय (Nutan College Bhopal) ने एक अनूठी पहल शुरू की है।
यहां 'विवाह एवं परिवार परामर्श केंद्र' खोला गया है, जहां छात्राओं को पारिवारिक मूल्यों की समझ, कानूनी अधिकारों (Legal Rights) की जानकारी और परिवारों के बीच सामंजस्य बिठाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
भोपाल के नूतन कॉलेज प्रशासन का मानना है कि नई पीढ़ी को पारिवारिक जिम्मेदारियों और रिश्तों के महत्व (Relationship importance) से जोड़ना बेहद जरूरी है। यही कारण है कि केंद्र के माध्यम से छात्राओं को न सिर्फ जागरूक किया जा रहा है, बल्कि उनकी निजी और पारिवारिक परेशानियों को भी हल किया जा रहा है।
प्राचार्य के मुताबिक, इस अनूठी पहल का उद्देश्य यह है कि बेटियां मानसिक रूप से मजबूत बनें और समाज तथा परिवार की चुनौतियों का सामना सहजता से कर सकें।
इस परामर्श केंद्र में एक काउंसलर, एक मनोविज्ञानी, एक समाजशास्त्री और महिला आयोग की पूर्व सदस्य उपस्थित रहती हैं। वे छात्राओं की समस्याएं सुनकर उनका समाधान बताती हैं।
हर माह के दूसरे और तीसरे शनिवार को काउंसलिंग सत्र आयोजित किए जाते हैं। खास बात यह है कि अब तक आए 150 से ज्यादा मामलों को बातचीत और काउंसलिंग के माध्यम से सुलझाया गया है।
परामर्श केंद्र प्रभारी निशा जैन के मुताबिक, कॉलेज में करीब सात हजार छात्राएं पढ़ाई कर रही हैं। इनमें से कई छात्राएं विवाह को लेकर नकारात्मक सोच रखती हैं या फिर पति-पत्नी के विवाद में तलाक को ही सही विकल्प मान रही हैं। ऐसे में उन्हें संयुक्त परिवार, रिश्तों की अहमियत और सामंजस्य बिठाने की कला सिखाना समय की मांग है।
अप्रैल में शुरू हुए इस आदर्श बहू परामर्श (Ideal Bahu Paramarsh Kendra)केंद्र ने अब तक कई घरों में बिगड़ते रिश्तों को संभाला है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम न केवल छात्राओं के व्यक्तिगत जीवन को संवारने वाला है बल्कि, समाज को भी एक नई दिशा दे रहा है।