Actor Satyajeet Dubey: आज पूरी दुनिया दक्षिण भारत के सिनेमा को देख रही है, लेकिन छत्तीसगढ़ का क्षेत्र अभी कम उपयोग में आया है। मौका मिला तो मैं यहां की मिट्टी से जुड़ी, लेकिन...
Actor Satyajeet Dubey: थिएटर से लेकर फिल्मों और ओटीटी तक अपनी सशक्त पहचान बना चुके बिलासपुर निवासी अभिनेता सत्यजीत दुबे का मानना है कि सिनेमा केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह समाज और संस्कृति को जोड़ने का एक प्रभावशाली माध्यम भी है। यह बात उन्होंने रायपुर में आयोजित तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव 2026 के दौरान पत्रिका से खास बातचीत में कही।
रायपुर प्रवास के दौरान हुई इस बातचीत में सत्यजीत दुबे ने छत्तीसगढ़ और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के बीच एक मजबूत सेतु बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने अपने संघर्ष, मेहनत, सिनेमा के प्रति जुनून और सफलता को लेकर अपने अनुभव बेहद सहज और खुले दिल से साझा किए। इस संवाद में उनके सिनेमा सफर, संघर्ष और सपनों की सच्ची तस्वीर सामने आई।
Q. सर, सबसे पहले आप अपना परिचय दीजिए।
A. मेरा नाम सत्यजीत दुबे है। मैं एक अभिनेता हूं और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में काम करता हूं। मैं मूल रूप से बिलासपुर का रहने वाला हूं, हालांकि पिछले 17-18 वर्षों से मुंबई में रह रहा हूं।
Q. रायपुर साहित्य उत्सव में शामिल होकर कैसा महसूस कर रहे हैं?
A. मुझे यहां आकर बेहद अच्छा लग रहा है। अच्छे जीवन के लिए अच्छे साहित्य का होना बहुत जरूरी है। साहित्य न केवल सोच को बेहतर बनाता है, बल्कि जीवनशैली को भी दिशा देता है। मैं राज्य सरकार का आभार व्यक्त करता हूं, जिन्होंने इतने सुंदर और भव्य साहित्यिक उत्सव का आयोजन किया। इस तरह के आयोजन बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। ये साहित्य को नई दिशा देते हैं।
Q. अपनी फिल्मों और वेब सीरीज के बारे में बताइए। कौन-सा रोल सबसे चुनौतीपूर्ण रहा?
A. मैंने अपने अभिनय करियर की शुरुआत फिल्म ‘ऑलवेज कभी-कभी’ (2011) से की। इसके बाद ‘बांके की क्रेजी बारात’ (2015), ‘केरी ऑन कुट्टन’ (2016) और ‘प्रस्थानम’ (2019) जैसी फिल्मों में काम किया। मेरे लिए हर फिल्म अपने आप में एक चुनौती होती है, लेकिन ‘ऐ जिंदगी’ मेरे लिए अब तक की सबसे चुनौतीपूर्ण फिल्म रही है। ओटीटी पर वेब सीरीज ‘मुंबई डायरीज़ 26/11’ को शानदार सफलता मिली। टेलीविजन में मैंने 2011 से पहले काम किया था, लेकिन उसके बाद फिल्मों पर ही ज्यादा फोकस रहा।
Q. सर, आज के युवाओं को लगता है कि फिल्म इंडस्ट्री में बहुत से संघर्ष होते हैं। बहुत-सी कहानियां सुनने को मिलती हैं, इस पर आप क्या कहेंगे?
A. देखिए, जीवन में हम बेहतर करना चाहते हैं, आगे बढ़ना चाहते हैं, कुछ नया करना चाहते हैं, तो संघर्ष करना पड़ेगा। और उस संघर्ष को आप किस नज़रिए से देखते हैं, यही ज्यादा मायने रखता है, न कि उस संघर्ष को आप एक खूंटे में बांधकर खुद को गोल-गोल घुमाते रहें। जीवन में आप संघर्ष को सकारात्मक या नकारात्मक रूप से कैसे देखते हैं, यह बहुत मायने रखता है। जीवन को बेहतर बनाने के लिए आपको नई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। मैंने अपने संघर्ष को हमेशा बहुत सकारात्मक रूप से देखा है। नई चुनौतियों का सामना किए बिना जीवन में आगे बढ़ना संभव नहीं है।
Q. जो युवा अभिनेता बनना चाहते हैं, उन्हें आप क्या सलाह देना चाहेंगे?
A. सबसे पहले अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें। लगातार साहित्य पढ़ें, सीखते रहें और खुद पर काम करें। जो भी आप बनना चाहते हैं, उसके लिए खुद को हर दिन बेहतर बनाना जरूरी है।
Q. थिएटर, फिल्म और ओटीटी में आपको सबसे सहज मंच कौन-सा लगता है?
A. मुझे सिनेमा से बहुत प्रेम है और मैं सिनेमा में ही काम करना चाहता हूं। अब समय आ गया है कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री और छत्तीसगढ़ के बीच एक मजबूत सेतु बने। हमारे पास बेहतरीन कहानियां हैं, जिन्हें आगे ले जाना चाहिए।
Q. छत्तीसगढ़ सिनेमा को लेकर आपकी सोच क्या है?
A. आज पूरी दुनिया दक्षिण भारत के सिनेमा को देख रही है, लेकिन छत्तीसगढ़ का क्षेत्र अभी कम उपयोग में आया है। मौका मिला तो मैं यहां की मिट्टी से जुड़ी, लेकिन पूरे भारत के लिए फिल्म बनाना जरूर चाहूंगा।
Q. शाहरुख खान के साथ काम करने से क्या सीखा?
A. उनका कड़ा परिश्रम और कर्मठ रवैया बेहद प्रेरणादायक है। सफलता आसान नहीं होती, उसके पीछे बहुत मेहनत होती है, जो अक्सर दिखाई नहीं देती।
Q. मुंबई में संघर्ष को आप कैसे देखते हैं?
A. यह क्षेत्र पूरी तरह अनिश्चितताओं से भरा है। अगर इसे चुना है, तो कठिनाइयों का डटकर सामना करना होगा। मेहनत, धैर्य और निरंतरता बहुत जरूरी है।
Q. जो लोग जल्दी हार मान लेते हैं, उनके लिए आपका क्या संदेश है?
A. रोज खुद से कहना पड़ता है कि आज पहला और आखिरी दिन है। सफलता मंजिल नहीं, यात्रा भी उतनी ही जरूरी है। मेहनत और जुनून कभी नहीं रुकना चाहिए।