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IED Free Village: बस्तर में नई पहल, नक्सल इलाकों में अब बनेंगे आईईडी फ्री विलेज, सुरक्षा की नई शुरुआत

IED Free Village: आईईडी के खतरों से निपटने के लिए सुनियोजित तरीके से प्रयास किए जा रहे हैं। आईईडी फ्री विलेज पर काम शुरू किया गया है। साथ ही सुरक्षा बलों के सभी कैंपों में इसके लिए अलग से आईईडी सेल भी बनाई गई है।

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May 07, 2026
नक्सल इलाकों में अब बनेंगे आईईडी फ्री विलेज (Photo AI)

IED Free Village: नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आईईडी हमलों की बढ़ती घटनाओं के बीच सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं। हाल ही में हुई घटना के बाद जवानों की सुरक्षा को देखते हुए सर्चिंग ऑपरेशन के लिए नई एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) जारी की गई है। अब जंगलों और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता, आधुनिक उपकरणों और विशेष टीमों के साथ अभियान चलाया जाएगा, ताकि आईईडी खतरे को समय रहते निष्क्रिय किया जा सके।

गृहमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि आईईडी के खतरों से निपटने के लिए सुनियोजित तरीके से प्रयास किए जा रहे हैं। आईईडी फ्री विलेज पर काम शुरू किया गया है। साथ ही सुरक्षा बलों के सभी कैंपों में इसके लिए अलग से आईईडी सेल भी बनाई गई है। हाल की घटना के बाद स्टैंडर्ड ऑपरेटर प्रोटोकॉल (एसओपी) जारी की गई है, ताकि कोई सर्चिंग के दौरान कोई अप्रिय घटना घटित न होने पाए। एसआपी में स्पष्ट किया गया कि निष्कि्रय करते वक्त क्या-क्या सावधानी बरती जानी चाहिए। समर्पित नक्सलियों से भी इनपुट लिया जा रहा है। इसके आधार पर जल्द पूरा इलाका आईईडी के खतरे मुक्त हो सके।

बस्तर में 31 मार्च तक नक्सलियों से आमने-सामने की लड़ाई चली और नक्सलवाद के खात्मे की घोषणा तय डेडलाइन पर ही हो गई। उस डेडलाइन के बाद अब बस्तर में एक नई जंग का आगाज हुआ है। यह जंग पिछली जंग से ज्यादा घातक दिखाई देती है। बस्तर में आईईडी तलाशने का अभियान किस स्तर पर पहुंच चुका है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गृहमंत्री विजय शर्मा खुद सरेंडर नक्सलियों से इसके इनपुट ले रहे हैं। सोमवार को ही इससे जुड़ा एक वीडियो सामने आया जिसमें वे बस्तर के सरेंडर नक्सली राजू से डंप से संबंधित इनपुट के बारे में बात कर रहे थे।

ऐसा इसलिए क्योंकि पिछली लड़ाई में दुश्मन सामने था लेकिन इस बार खतरा अदृष्य और ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाला है। 31 मार्च तक चली बड़ी कार्रवाई के बाद अब सुरक्षा बल जंगलों में छिपे ‘मौत के सामान’ यानी आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) को ढूंढने और निष्क्रिय करने की जंग लड़ रहे हैं। बस्तर में सुरक्षा बलों के जवान रोजाना घने जंगलों में सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं। उनका लक्ष्य जमीन के नीचे छिपाकर रखे गए आईईडी और हथियारों के डंप को खोजकर नष्ट करना। हालांकि यह काम बेहद जोखिम भरा है। हाल ही में ऐसे ही एक ऑपरेशन के दौरान डीआरजी और बस्तर फाइटर के चार जवान शहीद हो गए जिससे इस अभियान की गंभीरता और खतरा दोनों उजागर हुए हैं।
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डी माइनिंग का खतरा, स्पेशल एसओपी करें तैयार

बस्तर में नक्सलियों ने सालों पहले आईईडी प्लांट करना शुरू कर दिया था। वे इसकी तकनीक लिट्टे से सीखकर आए और यह नक्सलियों का सबसे घातक हथियार शुरुआत से अंत तक रहा। अब नक्सली सीधी लड़ाई में नहीं हैं लेकिन आईईडी अब भी बस्तर के जंगल और सडक़ों पर बिछी हुई है। जवान ऑपरेशन के दौरान डी-माइनिंग का काम खुद कर रहे हैं। यह अभी स्पष्ट नहीं है कि वे इस काम के लिए कितने ट्रेंड हैं। कहा जा रहा है कि इस काम में बेहद जोखिम है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि वे मौजूदा अभियान की अलग से समीक्षा कर एक स्पेशल एसओपी तैयार करे ताकि जवानों को कम खतरे का सामना करना पड़े।

सरेंडर नक्सलियों के इनपुट अभियान का आधार

बस्तर में चल रहे सर्च ऑपरेशन का आधार सरेंडर कर चुके नक्सलियों से मिले इनपुट हैं। उनकी सूचनाओं के जरिए सुरक्षा बल उन इलाकों तक पहुंच रहे हैं, जहां बड़ी मात्रा में विस्फोटक और हथियार छिपाए गए हैं। फोर्स का लक्ष्य बस्तर को पूरी तरह आईईडी मुक्त क्षेत्र बनाना है, लेकिन इसके लिए जवानों को सीधे जान जोखिम में डालनी पड़ रही है। चिंता की बात यह भी है कि छत्तीसगढ़ पुलिस और फोर्स के पास अब तक आईईडी खोजने के लिए पर्याप्त आधुनिक उपकरण उपलब्ध नहीं हैं। जवान अभी भी पारंपरिक और पुराने तरीकों से ही जंगलों में आईईडी तलाश रहे हैं, जिससे खतरा और बढ़ जाता है।

बस्तर के हर एनएच पर आईईडी, खुलासे चौंकाने वाले होंगे

फोर्स के सूत्र बता रहे हैं कि बस्तर में अभी खोजी अभियान शुरुआती चरण में है। बारिश के बाद सरेंडर नक्सलियों के इनपुट के आधार पर ही नेशनल हाइवे में दबा मौत का सामान सामने आएगा। बस्तर में दंतेवाड़ा, बीजापुर के साथ ही नारायणपुर के हाइवे में अब भी कई जगहों पर आईईडी दबी हुई है जिनकी खोज चौंकाने वाली होगी।

खात्मे वाले साल भी सर्वाधिक आईईडी मिली

2025: 875
2024: 308

2023: 242
2021: 163

2020: 128

Updated on:
07 May 2026 02:17 pm
Published on:
07 May 2026 02:15 pm
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