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Balod News:घर की चारदीवारी से शहर की सफाई तक, निशा बेगम की कहानी, मेहनत से बदली जिंदगी और बनीं आत्मनिर्भर

Balod Story of a Swachhata Didi: बालोद की स्वच्छता दीदी निशा बेगम ने मेहनत और लगन से अपनी जिंदगी बदली। एमआरएफ प्लांट में काम कर परिवार को बेहतर शिक्षा और भविष्य दे रहीं निशा की कहानी पढ़ें।
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Sep 23, 2026
Balod News
स्वच्छता दीदी निशा बेगम (Photo Patrika)

Balod Swachhata Didi: कभी घर की चारदीवारी और बच्चों की देखभाल तक सीमित रहने वाली निशा बेगम आज बालोद शहर की गलियों और घरों से निकलने वाले कचरे के प्रबंधन में अहम भूमिका निभा रही हैं। वर्ष 2017 में मिशन क्लीन सिटी से स्वच्छता कर्मी के रूप में शुरू हुआ उनका सफर अब आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और बदलाव की कहानी बन चुका है। नगरपालिका के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के तहत संचालित एमआरएफ (मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी) प्लांट में काम करते हुए निशा ने न सिर्फ अपने काम की नई पहचान बनाई, बल्कि अपनी मेहनत की कमाई से परिवार और बच्चों के भविष्य को भी बेहतर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

कभी मोहल्ले तक सीमित थी दुनिया अब शहर की हर गली से परिचित

निशा बेगम बताती हैं कि कुछ साल पहले तक उनकी दुनिया घर और मोहल्ले तक ही सीमित थी। घर की साफ-सफाई, झाड़ू-पोछा और बच्चों की देखभाल उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। बाहर निकलकर काम करना उनके लिए आसान नहीं था। वर्ष 2017 में जब उन्होंने मिशन क्लीन सिटी के तहत स्वच्छता कर्मी के रूप में काम शुरू किया, तो यह उनके लिए बिल्कुल नया अनुभव था। उन्हें उस समय साइकिल तक चलाना नहीं आता था। लेकिन काम सीखने और आगे बढ़ने की इच्छा ने उनकी मुश्किलों को धीरे-धीरे कम किया। उन्होंने रिक्शा चलाना सीखा और घर-घर जाकर कचरा संग्रहण की जिम्मेदारी संभालना शुरू किया। आज स्थिति यह है कि बालोद शहर की गलियों और घरों से वे अच्छी तरह परिचित हैं।

कचरे को बोझ नहीं संसाधन के रूप में देखती हैं

निशा का काम सिर्फ घरों से कचरा उठाने तक सीमित नहीं है। वे एकत्रित कचरे को एमआरएफ प्लांट तक पहुंचाती हैं, जहां उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत अलग-अलग किया जाता है। गीले और सूखे कचरे का पृथक्करण, उपयोगी सामग्री की छंटाई और पुनर्चक्रण योग्य वस्तुओं को अलग करने की प्रक्रिया में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। Reduce, Reuse और Recycle के सिद्धांत पर आधारित यह व्यवस्था कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देती है।

मेहनत की कमाई से बच्चों के सपनों को मिल रही उड़ान

निशा के लिए यह नौकरी सिर्फ रोजगार का साधन नहीं, बल्कि परिवार की जिंदगी बदलने का जरिया बनी है। वे कहती हैं कि एक समय ऐसी कई चीजें थीं जिन्हें चाहने के बावजूद खरीदने के साधन नहीं थे। अब उनकी मेहनत से होने वाली आय से बच्चों को बेहतर जीवन और शिक्षा देने में मदद मिल रही है।उनकी कहानी की सबसे बड़ी उपलब्धि यही है कि आर्थिक आत्मनिर्भरता ने उनके भीतर आत्मविश्वास भी बढ़ाया है।

स्वच्छता कर्मी से बनीं बदलाव की मिसाल

निशा जैसी स्वच्छता दीदियां शहर की सफाई व्यवस्था की ऐसी कड़ी हैं, जो अक्सर नजरों से ओझल रहती है। सुबह घरों से कचरा एकत्र करने से लेकर उसे प्लांट तक पहुंचाने और उसके वैज्ञानिक प्रबंधन में उनकी मेहनत शामिल होती है। उनका सफर यह भी दिखाता है कि स्वच्छता अभियान का असर केवल सड़कों और गलियों की सफाई तक सीमित नहीं है। इससे जुड़ी महिलाओं के जीवन में भी रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर पैदा हुए हैं।

एक महिला, दो बदलाव—शहर भी साफ और परिवार भी मजबूत

निशा बेगम की कहानी में दो बदलाव एक साथ दिखाई देते हैं। पहला, बालोद शहर को स्वच्छ रखने में उनका योगदान, और दूसरा, अपने परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की उनकी कोशिश। जो महिला कभी साइकिल चलाना नहीं जानती थी, वही आज आत्मविश्वास के साथ शहर की गलियों में काम कर रही है। उनकी मेहनत यह संदेश देती है कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों, सीखने और आगे बढ़ने की इच्छाशक्ति हो तो नई राह बनाई जा सकती है।

Updated on:
23 Sept 2026 01:48 pm
Published on:
23 Sept 2026 01:46 pm