CG News: जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत विहान समूह की महिलाओं ने जिमीकंद उत्पादन को अपनाकर न केवल अपनी आय बढ़ाई है, बल्कि कदम बढ़ाया है।
CG News: छत्तीसगढ़ के दुर्गुकोवल जिले में ग्रामीण आजको बनाने की दिशा में 'वन मॉक वन एक्टिविटी पाल प्रभावी साबित हो रही है। जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत विहान समूह की महिलाओं ने जिमीकंद उत्पादन को अपनाकर न केवल अपनी आय बढ़ाई है, बल्कि कदम बढ़ाया है।
जिला कलेक्टर नीलेश कुमार महादेव शीरस्तगर एवं के निर्देशन तथा जनपद पंचायत निचायत सीईओ होश मडावी दुर्गाकोदल के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुरेंद्र बजारे और बीपीएस नदिनी दीवान के मार्गदर्शन में यह पहल संचालित की जा रही है। इसके प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और विपणन सहायता उपलब्ध कराई गई।
आत्मनिर्भरता की ओर 'वन ब्लॉक वन एक्टिविटी' के तहत स्थानीय संसाधनों के अनुसार गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। दुर्गुकोदाल में जिमीकंद उत्पादन संगठित रूप से आगे बढ़ाया गया है। आने वाले समय में उत्पादन क्षेत्र बढ़ाने और बाजार विस्तार को योजना है, जिससे अधिक महिलाओं को लाभ मिल सके और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की और मजबूती मिले।
हाटकोयल, दुर्गुकोदल और पेहावारी क्लस्टर से जुड़ी स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने सामूहिक रूप से जिमीकंद की खेती की। स्थानीय बाजारों के साथ-साथ शादी-विवाह, जन्म संस्कार और अन्य आयोजनों में बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए।
उत्पादन किया गया, जिससे बिक्री भी बेहतर रही। महिलाओं ने लगभग 3,170 की लागत से 1,054 किंटल जिमीकंद का उत्पादन किया। बिक्री से करीब 43.950 की आमदनी हुई। यह मॉडल कम निवेश में बेहतर लाभका उदाहरण बनकर सामने आया है।
विकासखंड के विभिन्न गांवों में जिमीकंद उत्पादन की पहल ने ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और आय का नया मार्ग खोल दिया है। लोस्तर, बागाचार, पजोड़ा, कोयापेड़ावारी, दमकसा, मुरसारहुल, रहुल, नवागांव और हानपातरी सहित कई गांवों में स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने संगठित रूप से जिमीकंद की खेती की।
इस पहल के कारण महिलाओं को अपने ही गांव में रोजगार मिलने लगा है, जिससे उन्हें काम की तलाश में बाहर पलायन करने की आवश्यकता नहीं पड़ रही है। खेती से मिलने वाली आय ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है और ग्रामीण स्तर पर आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिला है।
बीपीएम नदिनी दीवान के अनुसार पूरे विकासखंड में लगभग 1,100 से अधिक स्व-सहायता समूह सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। ये समूह केवल कृषि गतिविधियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विभिन्न आजीविका गतिविधियों के माध्यम से अपनी आय में लगातार वृद्धि कर रहे हैं। कई समूह होटल संचालन, किराना दुकान, ग्राहक सेवा केंद्र और अन्य लघु व्यवसायों का संचालन भी कर रहे हैं।
इन गतिविधियों के जरिए महिलाओं को नियमित आय का स्रोत मिल रहा है और वे आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं। सामूहिक प्रयास और सरकारी योजनाओं के सहयोग से स्व-सहायता समूहों की महिलाएं आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।