
प्राइवेट पेंशनर्स के साथ अब टैक्स को लेकर किसी तरह का अन्याय नहीं होगा। लोकसभा की एक चयन समिति ने पेंशनभोगियों के लिए बड़ा राहत भरा सुझाव दिया है। समिति ने प्रत्यक्ष कर विधेयक 2025 (Direct Tax Bill 2025) की समीक्षा करते हुए पाया कि कम्यूटेड पेंशन (Commuted Pension) के टैक्स ट्रीटमेंट में असमानता है। अब तक सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाली कम्यूटेड पेंशन पूरी तरह टैक्स मुक्त होती थी, जबकि निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को आंशिक छूट मिलती थी। वहीं, गैर-कर्मचारी (Non-employee) पेंशनभोगियों को ऐसी कोई छूट नहीं मिलती थी और उन्हें पूरा टैक्स देना पड़ता था। समिति ने इस असमानता को दूर करने की सिफारिश की है।
डायरेक्ट टैक्स बिल 2025 की धारा 19 की समीक्षा करते हुए समिति ने कहा कि अलग-अलग वर्गों के पेंशनभोगियों को मिलने वाली कम्यूटेड पेंशन पर टैक्स छूट समान नहीं है। इसलिए समिति सुझाव देती है कि गैर-कर्मचारी वर्ग के लिए भी, जो किसी पेंशन फंड से पेंशन लेते हैं, उन्हें ‘अन्य स्रोत से आय’ शीर्षक के अंतर्गत उसी तरह की छूट स्पष्ट रूप से दी जाए जैसी कर्मचारियों को मिलती है।
कम्यूटेड पेंशन का अर्थ है कि कर्मचारी अपनी पेंशन का एक हिस्सा एकमुश्त रकम (Lump Sum) के रूप में निकालते हैं। अब तक अगर कोई व्यक्ति गैर-कर्मचारी श्रेणी में आता था और LIC पेंशन फंड जैसी योजना से पेंशन प्राप्त करता था तो पूरी रकम अन्य स्रोत से आय के रूप में टैक्सेबल मानी जाती थी।
जोतवानी एसोसिएट्स के कंपनी सेक्रेटरी दिनकर शर्मा बताते हैं कि इससे दो व्यक्तियों के बीच असमानता पैदा हो जाती थी। मसलन अगर दो लोग समान पेंशन फंड से कम्यूटेड पेंशन ले रहे हैं, लेकिन एक कर्मचारी है और दूसरा गैर-कर्मचारी तो उन पर टैक्स अलग-अलग लगता था। अब समिति ने इस असमानता को खत्म करते हुए गैर-कर्मचारियों को भी टैक्स छूट का लाभ देने का सुझाव दिया है।
संयुक्त कर्मचारी परिषद के महामंत्री आरके निगम बताते हैं कि समिति के इस संशोधन से उन लाखों पेंशनभोगियों को राहत मिलेगी, जो किसी बीमा कंपनी या निजी पेंशन फंड से पेंशन लेते हैं। इससे टैक्स प्रणाली अधिक संतुलित बनेगी।