Patrika Special News

Per Capita Water Availability: पाकिस्तान जल संकट वाले टॉप 10 देशों में शामिल, भारत में भी बढ़ रहा खतरा

Per Capita Water Availability: प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता के मामले में पाकिस्तान 'जल कमी' वाले देशों की सूची में 10वें पायदान पर पहुंच गया। भारत के बैन के बाद पानी के मामले में उसकी बौखलाहट बढ़ गई है। हालांकि भारत और पाकिस्तान दोनों ही देश 1951 में पर्याप्त जल वाले देशों की सूची में शामिल थे। जानिए, भारत इस मामले में अभी कहां खड़ा है। इस बारे में पढ़िए विस्तृत रिपोर्ट।

5 min read
May 01, 2026
देश में प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता कम होती जा रही है। (Photo: IANS)

Per Capita Water Availability: अप्रैल महीना के समाप्त होते-होते भारत और पाकिस्तान में गर्मी ने सारे रिकॉर्ड तोड़ डाले। हीटवेब ने लोगों को परेशानी में डाल रखा है। ऐसे में भूजल का स्तर भी गिरता जा रहा है। दुनिया के ज्यादातर मुल्कों में जल संकट एक बड़ी चुनौती के रूप में उभरकर सामने आया है। इसका साफ संकेत प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता (Per capita water availability) के लगातार कम हो रहे स्तर से मिलता है। पाकिस्तान का नाम अभी प्रति व्यक्ति कम जल उपलब्धता वाले टॉप 10 देशों में शुमार हो चुका है। इस मामले में भारत की हालत भी खराब होती जा रही है। आइए जानते हैं किस देश की क्या है स्थिति?

ये भी पढ़ें

Great Nicobar Project Row: विकास या पर्यावरणीय तबाही! 81,000 करोड़ की योजना पर क्यों उठ रहे सवाल?

प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता कैसे मापी जाती है?

किसी देश में उपलब्ध कुल नवीकरणीय मीठे जल संसाधनों को उसकी जनसंख्या से विभाजित करने पर प्रति व्यक्ति कितनी मात्रा उपलब्ध है, का पता चल जाता है। सामान्यत: किसी देश में 1700 घन मीटर प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष उपलब्ध है तो इसे जल तनाव (water stress) की श्रेणी में रखा जाता है, जबकि 1000 घन मीटर से कम वाले देश को जल की कमी (water scarcity) और 500 घन मीटर से कम को गंभीर जल संकट श्रेणी वाला माना जाता है।

प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता = कुल नवीकरणीय मीठे जल संसाधन ÷ कुल जनसंख्या

इस फॉमूर्ले के आधार पर खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) और विश्व बैंक (World Bank) जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों के अनुसार, इस मामले में विश्व के 10 शीर्ष देशों में सबसे खराब ​हालात कुवैत की है। वहीं पाकिस्तान इस सूची में 10वें स्थान पर है। पाकिस्तान में जल असुरक्षा दशकों से बढ़ती जा रही है, क्योंकि प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता घटकर अब लगभग कमी (near Water scarcity) की सीमा तक पहुंच गई है।

प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता के आधार पर देशों को अलग-अलग वर्गों (Falkenmark Indicator) में बांटते हैं।

पर्याप्त जल (Sufficient Water)→ 1700 घन मीटर प्रति वर्ष से अधिक
जल तनाव (Water Stress)→ 1000–1700 घन मीटर प्रति वर्ष
जल कमी (Water Scarcity)→ 500–1000 घन मीटर प्रति वर्ष
गंभीर जल संकट (Absolute Scarcity)→ 500 घन मीटर प्रति वर्ष से कम

दक्षिण एशिया में प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता की क्या है स्थिति?

दुनिया में दक्षिण एशिया सबसे अधिक जनसंख्या घनत्व वाले क्षेत्रों में से एक है। यहां जल संसाधनों की उपलब्धता असमान है। हालांकि कई देशों में यह तेजी से घट रही है। शीर्ष के 10 देशों में दक्षिण एशिया के कई देश शामिल हो चुके हैं।

भारत शीर्ष 10 वाली सूची से बाहर, पर चिंताजनक हालात

भारत में प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता लगभग 1400–1500 घन मीटर प्रति वर्ष से कम रह गई है। यह स्तर “जल तनाव” की श्रेणी में आता है। वर्ष 1951 के दशक में यह आंकड़ा 5000 घन मीटर से अधिक था, लेकिन 75-76 वर्षों में इसमें 70 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। भारत 2011 के आसपास ही इस श्रेणी में आ चुका था। जनसंख्या वृद्धि और जल संसाधनों के अत्यधिक उपयोग के कारण इसमें भारी गिरावट आई है। भारत में सबसे ज्यादा जल का उपयोग कृषि क्षेत्र में होता है। देश में कुल उपलब्ध जल का लगभग 80% कृषि में होता है। हालांकि, तेजी बढ़ रहे शहर की संख्या और औद्योगिकीकरण भी जल की मांग को बढ़ा रहे हैं। यही आलम रहा तो हम वर्ष 2050 तक आते-आते 'जल कमी' वाले देशों की सूची में शामिल हो जाएंगे। देश में अधिक जल वाले क्षेत्र अरुणाचल प्रदेश, मेघालय हैं जबकि कम जल वाले क्षेत्र राजस्थान, गुजरात और तमिलनाडु हैं।

भारत और पाकिस्तान वर्ष 1951 में प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता के मामले में 'पर्याप्त जल' वाले श्रेणी देशों में थे। बल्कि पाकिस्तान की 1950 के दशक में भारत के मुकाबले हालात बेहतर थे। हालांकि, पाकिस्तान में बीते 75 वर्षों में प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता के स्तर में काफी कमी दर्ज की गई है। पाकिस्तान के अखबार डॉन के अनुसार, अब यहां प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता लगभग 900–1000 घन मीटर प्रति वर्ष रह गई है। जो 'जल कमी' के करीब है। 1951 में यह लगभग 5000 घन मीटर थी। सिंधु नदी प्रणाली पर अत्यधिक निर्भरता, जल प्रबंधन की कमजोरियाँ और जलवायु परिवर्तन इसके प्रमुख कारण हैं।

भारत के प्रतिबंध के बाद पाकिस्तान में जल सुरक्षा की बढ़ी चिंता

पाकिस्तान का अखबार डॉन लिखता है, "नया यह है कि अब नीति-निर्माताओं ने इसके पैमाने को देर से ही सही, लेकिन गंभीरता से पहचानना शुरू किया है, खासकर भारत द्वारा सिंधु जल संधि के कथित अवैध निलंबन के बाद, जिसके परिणामस्वरूप जल सुरक्षा को अंततः राष्ट्रीय योजना के एक केंद्रीय स्तंभ के रूप में देखा जाने लगा है। इसी संदर्भ में योजना मंत्री अहसान इकबाल द्वारा जल संकट के प्रतिक्रियात्मक प्रबंधन से आगे बढ़कर एक समग्र रणनीति अपनाने के लिए राष्ट्रीय सहमति की अपील, विशेषकर भारत द्वारा जल के ‘हथियारीकरण’ के संदर्भ में, समयोचित है।"

नेपाल और बांग्लादेश जल से लबालब

पड़ोसी देश नेपाल और बांग्लादेश जल संसाधनों के मामलों में अपेक्षाकृत समृद्ध देश है। यहां प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता लगभग 7000–8000 घन मीटर प्रति वर्ष है। यहां हिमालयी नदियों और प्रचुर वर्षा के कारण जल की उपलब्धता की कोई कमी नहीं है। यहां जल के समुचित उपयोग और वितरण की समस्या के चलते समस्याएं सामने आती हैं। वर्ष 2000—2005 के आसपास नेपाल में प्रति व्यक्ति 8,000–9,100 घन मीटर प्रति वर्ष की उपलब्धता थी। बांग्लादेश में प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता लगभग 7000–8000 घन मीटर प्रति वर्ष है, जो उच्च प्रतीत होती है। लेकिन यहाँ समस्या जल की अधिकता (बाढ़) और प्रदूषण है। सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

श्रीलंका की हालत भारत से बेहतर

श्रीलंका में प्रति व्यक्ति जल की उपलब्धता प्रति वर्ष 'पर्याप्त जल' की श्रेणी में आती है। वहां प्रति व्यक्ति 2000–2500 घन मीटर प्रति वर्ष उपलब्धता है। यह अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में है, लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण सूखे और बाढ़ की आवृत्ति बढ़ने से जल प्रबंधन चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।

जल संकट के प्रमुख कारण

  1. जनसंख्या वृद्धि – अधिक जनसंख्या का मतलब है प्रति व्यक्ति जल का कम हिस्सा।
  2. जलवायु परिवर्तन – वर्षा के पैटर्न में बदलाव, सूखा और बाढ़ की घटनाएँ बढ़ रही हैं।
  3. भूजल का अत्यधिक दोहन – कई देशों में भूजल तेजी से खत्म हो रहा है।
  4. कुप्रबंधन – जल वितरण, भंडारण और उपयोग में अक्षमताएं।
  5. प्रदूषण – नदियों और झीलों का प्रदूषण उपलब्ध जल को अनुपयोगी बना देता है।

वितरण और उचित प्रबंधन से सुलझेंगी जल समस्या

जल संकट से निपटने के लिए केवल नए जल स्रोत खोजने से काम नहीं चलेगा। आप इसको नेपाल और बांग्लादेश के संदर्भ में समझ सकते हैं। यहां प्रति व्यक्ति जल की उपलब्धता पर्याप्त जल वाले देशों में शीर्ष पर है, लेकिन उचित प्रबंधन और वितरण की दिक्कत के चलते यहां पीने के पानी की कमी और पानी से जुड़े रोगों के रूप में सामने आती रहती है।

कैसे जल का हो उचित प्रबंधन?

जल संरक्षण तकनीकें (Water Conservation Technique) – ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई को बढ़ावा देना
फसल पैटर्न में बदलाव (Cropping Patterns) – कम पानी वाली फसलों को प्रोत्साहन
भूजल प्रबंधन (Ground Water Management) – नियंत्रित दोहन और पुनर्भरण
जल पुनर्चक्रण (Water recycling) – शहरी क्षेत्रों में अपशिष्ट जल का पुन: उपयोग
नीतिगत सुधार – जल को आर्थिक और पर्यावरणीय दृष्टि से मूल्यवान संसाधन मानना

ये भी पढ़ें

Endangered Birds: गोडावण से लेकर गिद्ध तक का बढ़ रहा कुनबा, पक्षियों का विलुप्त होना क्यों है खतरे की घंटी? जानिए
Also Read
View All