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जेब में प्याज रखें लू नहीं लगेगी! इंडियन ट्रेडिशनल थ्योरी का सच बदलकर रख देगा आपकी सोच

Onion Heatstroke Myth: भीषण गर्मी में क्या एक प्याज सच में लू या हीटस्ट्रोक से बचा सकता है? या फिर खुद से या दूसरों से सबसे खतरनाक और जानलेवा झूठ बोल रहे हैं आप? मेडिकल साइंस, आयुर्वेद और होम्योपैथी के साथ ही शरीर के कूलिंग सिस्टम को समझने और जागरूक रहने जरूर पढ़ें ये खास खबर

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May 13, 2026
Onion Heatstroke Myth: (Creative Generated By AI)

Onion heatstroke myth: भीषण गर्मी… गर्म हवाओं के थपेड़े… घर से निकलना जरूरी है… चलो प्याज जेब या पर्स में रख लेते हैं। नानी-दादी और मां भी ऐसा ही करती थीं हमें आज भी सिखाती हैं… घर से निकलो तो एक प्याज साथ लेकर निकलो… कभी लू नहीं लगेगी। जिन्हें लू लग गई… उन्हें कूलर या एसी की ठंड में रहना है। उसकी हथेलियों, पगतलियों में और माथे पर प्याज का रस लगाना, केरी का पना, छाछ पिलाना आदि भारतीय परिवारों में आम धारणा है। यही कारण है कि आधुनिक दौर में सोशल मीडिया पर भी ऐसी सलाह वायरल होती रहती हैं।

आम तो आम, कुछ खास लोग भी इस बार सोशल मीडिया पर प्याज रखकर घर से निकलने की सलाह देते नजर आए हैं। लेकिन भारतीय समाज में यह आम और खास लोगों की धारणा (Onion heatstroke myth) क्या वाकई हमें या आपको लू से बचा सकती है? patrika.com ने मेडिकल साइंस, आयुर्वेद और होम्योपैथी तीनों ही एक्सपर्ट्स से इस सवाल का जवाब जानने की कोशिश की। इस छोटे से प्रयास में ऐसा सच निकलकर सामने आया, जिसने हमारी सोच तो बदल दी है… आपकी धारणा भी जरूर बदलकर रख देगा… पढे़ं संजना कुमार की खास रिपोर्ट

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क्या कहता है मेडिकल साइंस

साइंस के मुताबिक प्याज या उस जैसी कोई भी चीज शरीर के तापमान को कंट्रोल नहीं कर सकती। ये केवल बाहरी तौर पर शरीर को ठंडक महसूस करवाकर लोगों को भीषण गर्मी और लू के थपेडो़ं से कुछ देर के लिए राहत दे सकती हैं। लेकिन शरीर का अंदरूनी तापमान शरीर का कूलिंग सिस्टम ही कंट्रोल कर सकता है।

इसे ऐसे समझें

एमबीबीएस और एमडी डॉ. विनोद कोठारी कहते हैं, शरीर में आने वाला पसीना, ब्लड सर्कुलेशन बॉडी टेम्प्रेचर को कंट्रोल करता है। हीटस्ट्रोक के दौरन बॉडी टेम्प्रेचर 40 डिग्री से ऊपर भी हो सकता है। डिहाइड्रेशन के कारण गर्मियों में शरीर का तापमान बढ़ने लगता है। ऐसे में प्याज या ऐसी किसी भी जादूई चीज का बायोलॉजिकल इफेक्ट शरीर पर नहीं पड़ता है। डॉ. कोठारी कहते हैं कि अब तक ऐसा कोई वैज्ञानिक अध्ययन भी नहीं मिलता जो यह साबित कर दे कि जेब में प्याज रखने या खाने और माथे पर लगाने से कोई भी हीटस्ट्रोक के खतरे से बच सकता है।

क्या कहता है आयुर्वेद?

आयुर्वेद में प्याज को शीतल यानी ठंडी तासीर वाला माना जाता है। गर्मियों में प्याज, बेल, सत्तू, छाछ आम या केरी पना जैसे खाद्य या पेय पदार्थ शरीर में पानी के संतुलन को बनाए रखने में मदद करते हैं। प्याज में पानी के साथ ही, कुछ एंटीऑक्सिडेंट, कुछ मिनरल्स और सल्फर यौगिक होते हैं। लेकिन आयुर्वेद यह दावा नहीं करता कि जेब या पर्स में प्याज रखने से हीटस्ट्रोक का खतरा खत्म हो जाता है।

आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. विनय शर्मा कहते हैं, आयुर्वेद में प्याज को भोजन के सहायक के रूप में मानता है। इसे खाने के कई फायदे बताता है, लेकिन लू नहीं लगेगी इसकी गारंटी नहीं देता और न ही भीषण गर्मी से बचाने वाली चीज होने का दावा करता है।

होम्योपैथी में भी नहीं प्याज को जेब में रखने की थ्योरी

होम्योपैथी में भी शरीर को भीषण गर्मी और लू से बचाने के उपाय बताए गए हैं। लेकिन प्याज की पॉकेट या पर्स थ्योरी इसमें भी नहीं बताई गई।

BHMS, MD (होम्यो) डॉ. देवीराम नरवरे बताते हैं,होम्योपैथी में गर्मी से बचाव के उपाय हैं, लेकिन प्याज लू से बचाता है ऐसी कोई थ्योरी नहीं है। हां, होम्योपैथी में गर्मी और सन एक्सपोजर से जुड़े लक्षणों के हिसाब से दवाएं दी जाती हैं। लू लगने पर कुछ दवाएं भी दी जाती हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल भी डॉक्टर की सलाह से ही किया जाना चाहिए। लेकिन हकीकत यही है कि प्याज लू से बचाता है यह वैज्ञानिक सुरक्षा नहीं मानती।

जानलेवा हो सकती है ये आम धारणा

हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक सबसे बड़ा खतरा तब होता है, जब लोग यह मान लेते हैं कि प्याज जेब में रखने, खाने या लगाने से उन्हें लू नहीं लगेगी और इस धारणा के साथ वे तीखी झुलसा देने वाली धूप में भी बिना किसी परेशानी और डर के निकल जाते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह कॉन्फिडेंस जानलेवा साबित हो सकता है। क्योंकि हीटस्ट्रोक की स्थिति तब आती है जब बॉडी का कूलिंग सिस्टम फेल हो जाता है।

ऐसे समझएं ह्यूमन बॉडी कूलिंग सिस्टम

Human Body cooling system (Graphic Generated By AI)

हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक मानव शरीर का अपना कूलिंग सिस्टम होता है। यह प्राकृतिक प्रक्रिया ह्यूमन बॉडी के लिए वरदान है, जो शरीर के तापमान को 37 डिग्री सेल्सियस तक बनाए रखती है। इसे ऐसे समझें-

  • हाइपोथैलेमस- हमारे दिमाग में हाइपोथैलेमस नामक एक हिस्सा होता है। यह एक थर्मोस्टेट की तरह काम करता है। जब शरीर का तापमान बढ़ने लगता है, तो यह त्वचा, खून की नलियों और पसीने की ग्रंथियों को एक्टिव कर देता है। जैसे ही शरीर में गर्मी बढ़ने लगती है, पसीने की ग्रंथियां पानी और नमक यानी पसीना छोड़ना शुरू कर देती हैं। यह पसीना वाष्पीकृत होता है और त्वचा की गर्मी को सोखता है, इस प्रक्रिया से शरीर का तापमान फिर से कम होकर बेलेंस हो जाता है।
  • खून की नलियां या ब्लड सर्कुलेशन- जब शरीर का तापमान बढ़ता है, तब त्वचा के पास की खून की नलियां फैल जाती हैं। इस प्रक्रिया को वेसोडिलेशन कहा जाता है। इस प्रक्रिया में खून त्वचा की सतह के करीब ज्यादा आता है, इससे शरीर की गर्मी को बाहर निकलने में मदद मिलती है और शरीर अपने नॉर्मल टैंप्रेचर पर आने के बाद ये फिर से पहले जैसी हो जाती हैं।
  • त्वचा का बड़ा रोल- स्किन भी शरीर में तापमान बढ़ने पर उसे कंट्रोल करने के लिए एक्टिव हो जाती है। वैज्ञानिक भाषा में स्किन का यह काम किसी रेडिएटर की तरह होता है।
  • रोम छिद्र और त्वचा के बाल भी अहम- हमारे शरीर के रोमछिद्र स्वेट ग्लैंड यानी पसीने की ग्रंथियों से जुड़े होते हैं। जो पसीना बाहर निकालकर शरीर का तापमान बेलेंस रखने में मदद करते हैं। जब शरीर गर्म होने लगता है तो इन्हीं रोम छिद्रों या पोर्स से बाहर निकलकर त्वचा की सतह पर फैलकर ही वाष्पीकरण करता है। इससे शरीर ठंडा होने लगता है। वहीं त्वचा के महीन बाल और उसके आसपास की संरचना हवा के संपर्क में आकर पसीने के फैलाव को प्रभावित करती है।

लेकिन जब वातावरण में ज्यादा उमस या ह्यूमिडिटी होती है, तो पसीना पूरी तरह से सूख नहीं पाता और बॉडी का यह कूलिंग सिस्टम कमजोर पड़ने लगता है। यही स्थिति हीटस्ट्रोक का खतरा बढ़ाने वाली होती है।

अगर लू से बचाने वाला प्याज एक मिथ, तो फिर कैसे बना परम्परा

भीषण गर्मी और लू से बचाव के लिए प्याज को बड़ा सहारा मानना कितना खतरनाक हो सकता है। अब सवाल ये है कि जब प्याज बनाम लू केवल एक मिथ है, तो फिर भारतीय समाज में यह एक परम्परा कैसे बन गया?

Scientist Dr Subhash C Pandeyइस मसले पर वैज्ञानिक डॉ. सुभाष सी. पांडे कहते हैं, प्याज और लू का कोई वैज्ञानिक कनेक्शन ही नहीं है। लेकिन फिर भी हर भारतीय घर में यह एक परम्परा बन चुका है कि भीषण गर्मी के दौर में प्याज दवा का काम करता है। दरअसल पुराने समय में न एसी होते थे न कूलर, ORS, Electral powder जैसे कोल्ड ड्रिंक्स भी नहीं थे। लेकिन हर घर की थाली में प्याज जरूर होता था। क्योंकि यह आसानी से उपलब्ध था। लोग इसे खाने के साथ खाते थे। इसे खाकर उन्हें हल्की सी राहत मिलती थी। धीरे-धीरे यह राहत एक विश्वास बनकर पारिवारिक मान्यता बनीं, फिर एक सामाजिक ट्रेडिशन।

कई भारतीय परम्पराओं में छिपा है व्यावहारिक अनुभव

डॉ. सुभाष कहते हैं कि भारत की कई पारंपरिक आदतों में एक व्यावहारिक अनुभव छिपा होता था। लेकिन हर परम्परा वैज्ञानिक सुरक्षा नहीं होती।

कहना होगा कि प्याज खाना या उसका रस पीना और माथे पर लगाना गलत नहीं है, लेकिन उसे भीषण गर्मी में लू या हीटस्ट्रोक का गारंटी वाला इलाज मानना खुद को धोखा देना है। आम या कैरी का पना, सत्तू, बेल और छआाछ भी शरीर को डिहाइड्रेट रखने में मदद करते हैं। लेकिन इन्हें लू से बचाने वाले पेय मानना सही नहीं है।

हीटस्ट्रोक या लू को लेकर क्या है WHO की गाइडलाइन

World Health Organization (WHO) ने अब तक ऐसा कोई भी वैज्ञानिक दावा या गाइडलाइन जारी नहीं की है, जिसमें कहा गया हो कि प्याज जेब में रखने से लू या हीटस्ट्रोक का खतरा टल जाता है।

इसके विपरीत WHO ने हीटस्ट्रोक से बचने के उपाय जरूर बताए हैं-

WHO Heatstroke safety tips (photo:WHO X)

AIIMS और ICMR की हीटस्ट्रोक से बचाव की थ्योरी

WHO की तरह ही AIIMS, ICMR जैसे बड़े मेडिकल संस्थान और यहां तक कि किसी भी अमेरिकी शोध में प्याज को पॉकेट में रखने, उसे खाने या लगाने से लू से बचाने जैसा कोई भी प्रमाण नहीं मिलता। सभी ने लू से बचने के उपाय बताए गए हैं।

ICMR के साथ ही AIIMS की ओर से बताए गए हीटस्ट्रोक से बचाव के उपाय-

AIIMS Summer safety guideline (photo: AIIMS Bhopal X)

हीटस्ट्रोक के लक्षण

जब शरीर का तापमान कंट्रोल सिस्टम फेल होने लगता है। तब शरीर का तापमान अंदरूनी तौर पर बढ़ता है। कई मामलों में शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाता है। ऐसी स्थिति में चक्कर, उलझन, बेहोशी और तेज बुखार और कई बार जान का खतरा भी हो सकता है।

लेकिन प्याज की खूबियां उसे बनाती है गर्मियों में खास

प्याज में सल्फर यौगिक, पानी, कुछ एंटी ऑक्सीडेंट और थोड़ी मात्रा में मिनरल्स होते हैं। इसीलिए प्याज खाने से कुछ लोगों को हल्की सी ठंडक या आराम महसूस हो सकता है।

गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने के तरीके

गर्मियों में शरीर को ठंडा बनाए रखने के लिए मौसमी फलों का सेवन करें, इनमें तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी आदि का सेवन करें। नींबू पानी के साथ ही, नारियल पानी जैसे इलेक्ट्रल पेय पीने की आदत बना लें। ज्यादा गर्म हवाओं या धूप के बीच निकलने से बचें

बता दें कि इस बार मध्यप्रदेश समेत देशभर के कई राज्यों में अप्रैल-मई की गर्मी में तापमान रिकॉर्ड तोड़ चुका है। एमपी के कई शहरों में तापमान 44-46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। खजुराहो 43.2, तो नौ गांव 44.3 और रतलाम में 44 डिग्री तक तापमान दर्ज किया गया है। वहीं सीजन के शुरुआती दौर में इंदौर में यह 46 डिग्री सेल्सियस तक भी पहुंचा है। इसे पिछले एक दशक का सबसे ज्याद तापमान भी बताया गया। मौसम विभाग एमपी समेत कई राज्यों में भीषण गर्मी और हीटवेव अलर्ट जारी कर चुका है।

ऐसे में जेब में प्याज रख लो, जैसे देसी दावों पर भरोसा करना जानलेवा साबित हो सकता है। क्योंकि हीटस्ट्रोक अब सिर्फ असहज होने वाली स्थिति नहीं, लगातार बढ़ते तापमान के बीच एक मेडिकल इमरजेंसी बन चुकी है।

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Updated on:
12 May 2026 05:15 pm
Published on:
13 May 2026 07:00 am
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