
Water Sports : अजमेर की आनासागर झील में वॉटर स्पोर्ट्स और वॉटर टूरिज्म योजना शुरू होगी। पिछले बजट में इसकी घोषणा हो चुकी है। तकनीकी विशेषज्ञों की टीम जल्द इसका दौरा करेगी। इसके बाद संभाग की यह पहली झील होगी जहां वॉटर स्पोर्ट्स की शुरुआत की जाएगी।
राजस्थान में वाटर बेस्ड पर्यटन को बढ़ावा देने के मकसद से सरकार ने 19 फरवरी को 2025-26 के बजट में आनासागर वॉटर स्पोर्ट्स योजना की घोषणा की थी। इसका मकसद पर्यटकों के लिए रेसर बोट, स्कूबा डाइविंग सहित अन्य गतिविधियों को बढ़ावा देना है। इसके अलावा बीसलपुर बांध को भी शामिल किया गया है।
आनासागर झील करीब 7 किलोमीटर के दायरे में फैली हुई है। इसमें 13 फीट पानी का भराव होता है। उदयपुर की फतहसागर, पिछोला और स्वरूपसागर की तरह इसका बड़ा क्षेत्र नहीं है। लेकिन यहां टापू तक नौकायन और झील में घूमने के लिए सोलर क्रूज पहले ही संचालित है। अब तेज रफ्तार रेसर बोट, वाटर स्कूबा सहित अन्य संचालन होगा। अजमेर में वरुणसागर झील और चौरसियावास तालाब में भी नौकायन की घोषणा हुई है।
आनसागर झील में बांडी और लूणी नदी का पानी आता है। यहां से पानी खानपुरा तालाब, गोविंदगढ़, नागैार, पाली, जालौर, सिरोही, बाडमेर होता हुआ कच्छ की खाड़ी तक जाता है। सरकार की मंशा है, कि छोटे तालाबों और झीलों में भी वॉटर स्पोर्ट्स योजना शुरु की जाए तो पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
वॉटर स्पोर्टस की शुरुआत के बाद अजमेर में राज्य और राष्ट्रीय स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिताएं हो सकेंगी। इनमें नौकायन याचिंग, रोइंग और अन्य खेलकूद होंगे। इससे आनासागर झील की पहचान राष्ट्रीय स्तर तक बढ़ेगी। अजमेर शहर और जिले के खिलाड़ियों को वॉटर स्पोर्ट्स में कॅरिअर बनाने का अवसर मिलेगा।
अजमेर संभाग से जुड़े भीलवाड़ा, नागौर, डीडवाना-कुचामन, ब्यावर, टोंक, अजमेर जिले में वॉटर टूरिज्म और वॉटर स्पोटर्स सुविधा नहीं है। अजमेर में आनासागर-वरुणसागर झील, चौरसियावास तालाब है। भीलवाड़ा में मेनाल जल प्रपात है। ब्यावर में बिचड़ली तालाब है।
चौहान काल में अर्नोराज ने 1133 ईस्वी में आनासागर झील का निर्माण कराय था। तब झील का दायरा करीब 14 किमी तक फैला हुआ था। यह पुष्कर-नौसर घाटी से मौजूदा गौरव पथ तक फैला हुआ था। आनासागर झील से निकलने वाला अतिरिक्त पानी पालबीचला तालाब में भरता था। 1947 से पहले तक आनासागर झील से अजमेर शहर को पानी की सप्लाई होती थी।
-पर्यटकों के लिए रेसर बोट
-वॉटर स्कूबा का संचालन
-पर्यटकों के ठहराव के लिए हाउस बोट
-फूड प्लाजा अथवा रेस्टोरेंट
-निकटवर्ती इलाके में एडवेंचर टूरिज्म
-केरल में वॉटर स्पोर्ट्स है। यहां पतली सी नाव लती है। इसके अलावा यहां पर विंड सर्फिंग, स्कूबा डाइविंग करने का मौका भी मिलता है।
-अंडमान और निकोबार द्वीप समूह भी वॉटर स्पोट्र्स के लिए प्रस्दिध है। यहां देश की सबसे अच्छी स्कूबा डाइविंग है। हैवलॉक आइसलैंड में स्कूबा डाइविंग का अनुभव मिलता है।
-गोवा में वॉटर स्पोर्ट्स होते हैं। यहां सेलिंग, जेट स्की या वॉटर स्कूटर की सुविधा है। बनाना बोट की राइड में काफी लोग आसानी से बैठ सकते हैं। कोल्वा और बेनौलिम बीच पर सुविधा मिलती है।
-लक्ष्यद्वीप की राजधानी कवरत्ती में वॉटर स्पोर्ट्स है। कदमत आइसलैंड डाइविंग और स्नोर्कलिंग के लिए बहुत खास है। डीप सी डाइविंग भी होती है।
-उत्तराखंड में राफ्टिंग होती है। गंगा की लहरों के बीच में राफ्टिंग करते हुए मजे करना बेहतरीन अनुभव देता है।
-भोपाल में भोजताल मानव निर्मित झील है। यहां पैरासेलिंग और अन्य खेलकूद का लुत्फ उठाया जा सकता है।
-मप्र में सैलानी टापू जंगलों और नर्मदा के बीच है।
नर्मदा नदी पर जेट स्कीइंग की सुविधा है। क्रूज नावें भी चलाई जा रही हैं।
वॉटर स्पोर्ट्स और टूरिज्म से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। लाइफगार्ड, तैराकी शिक्षक, प्रतिस्पर्धी तैराकी कोच और बचाव तैराक शामिल हैं। पानी के नीचे की फोटोग्राफी और जीव विज्ञान को रिसर्च का अवसर मिलेगा। अजमेर में 2 राज एनसीसी नेवल यूनिट तैराकी और नौकायन का परीक्षण अधिक कर सकेगी।
सरकार वॉटर स्पोर्ट्स योजना को बीसलपुर तक ले जाना चाहती है। बीसलपुर की भराव क्षमता 315.50 आरएल मीटर है। यहां भविष्य में एशियन और कॉमनवेल्थ गेम्स होने पर राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता कराई जा सकती है।
आनासागर झील में फ्लोटिंग सोलर पैनल लगाने की योजना भी है। इसका मकसद पानी का वाष्पन रोकने के अलावा सौर ऊर्जा तैयार करना है। हालांकि यह फैसला अजमेर डिस्कॉम और अक्षय ऊर्जा निगम स्तर पर होना है।