
शस्त्रों को लेकर अब लोगों की धारणाएं बदल रही हैं। (Photo: Rajasthan Patrika)
Gun Culture : चंबल के बीहड़… बंदूक की आवाज… और दबंगई की कहानियां। एक दौर में भिण्ड की पहचान इन्हीं तस्वीरों से बनती थी। यहां की बोली में भी ‘गोली और बोली’ का जिक्रआम था। घरों में बंदूक होना कई परिवारों के लिए सुरक्षा से ज्यादा सामाजिक प्रतिष्ठा का विषय हुआ करता था, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है।
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