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Free Veterinary Hospital : यहां ओटी, आईसीयू सबकुछ की मुफ्त सुविधा, अब तक पौने दो लाख बेजुबानों का हो चुका है इलाज

Free Veterinary Hospital : बारां के एक पशु चिकित्सालय में बीते साढ़े तीन साल में पौने दो लाख पशु-पक्षियों को नया जीवन मिला है। 35 बीघे में फैले इस अनूठे अस्पताल में हाथी से लेकर नन्हें पक्षी तक को यहां निःशुल्क इलाज की सुविधा मिलती है। इस बारे में पढ़िए जयप्रकाश सिंह की विशेष रिपोर्ट।
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Updated: 29 Oct 2026, 11:47 AM IST
Jeevasar Hospital
बारां का पशु-पक्षियों का मुफ्त अस्पताल (Photo : Rajasthan Patrika, Designed: ChatGpt)

Free Veterinary Hospital : किसी के पैर में गहरी चोट है। कोई सड़क हादसे में घायल होकर आया है तो कोई बीमारी से बेहाल है। किसी को सहारे की जरूरत है तो किसी को जिंदगी बचाने के लिए तत्काल ऑपरेशन की। रोजाना सुबह के दस बजने से पहले ही यहां मरीजों की कतार लगने लगती है। लेकिन यह किसी आम अस्पताल का नजारा नहीं है। यहां कतार में इंसान नहीं बल्कि बेजुबान पशु-पक्षी खड़े होते हैं। कोई गाय है तो कोई नंदी। कोई कुत्ता तो कोई नन्हा पक्षी। ये मूक जीव अपनी तकलीफ बता नहीं सकते लेकिन यहां मौजूद चिकित्सक उनकी पीड़ा समझते हैं। चोट देखते हैं। जांच करते हैं और जरूरत पड़ने पर ऑपरेशन कर उन्हें नया जीवन देने की कोशिश करते हैं।

पशु-पक्षियों का यहां होता है मुफ्त इलाज

यहां पशुओं-पक्षियों के इलाज का न तो बिल बनता है और न दवाइयों के लिए जेब ढीली करनी पड़ती। जांच से लेकर ऑपरेशन और दवाइयों तक की सुविधाएं निशुल्क हैं। सड़क हादसे में घायल पशु को लेने के लिए अस्पताल की एम्बुलेंस भी पहुंचती है। सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि जिन पशुओं का एक पैर हादसे में कट चुका है और जिन्हें सामान्य जीवन जीने में परेशानी होती है। उनके लिए भी यहां आरामदायक जिंदगी बिताने का इंतजाम है।करीब 35 बीघा क्षेत्र में फैला यह अस्पताल बेजुबानों के लिए उपचार केंद्र ही नहीं बल्कि उन लावारिस और दिव्यांग पशुओं का आशियाना भी है। जिन्हें अक्सर लोग सड़क पर बेसहारा छोड़ देते हैं।

बारां से 8 किलोमीटर की दूरी पर है जीवासरा नि:शुल्क अस्पताल

हम बात कर रहे हैं बारां शहर से करीब आठ किलोमीटर दूर मांगरोल रोड पर बड़ा गांव स्थित जीवासरा निशुल्क पशु-पक्षी अस्पताल की। पिछले साढ़े तीन वर्षों में यहां करीब पौने दो लाख से अधिक पशु-पक्षियों का निशुल्क उपचार किया जा चुका है। इन दिनों नई दिल्ली में पशु प्रेमी जागृति मिश्रा के निराश्रित जीवों के लिए बनाए जा रहे शेल्टर होम और अस्पताल की निर्माणाधीन भवन को तोडऩे का मामला पूरे देश में सुर्खियों में है। ऐसे में यह केन्द्र भी लोगों में चर्चा का विषय बन गया है।

ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू और वार्ड तक का इंतजाम

अस्पताल की खासियत केवल यहां होने वाला निशुल्क उपचार नहीं है बल्कि पशु-पक्षियों के इलाज के लिए उपलब्ध आधुनिक सुविधाएं भी हैं। करोड़ों रुपए की लागत से तैयार इस अस्पताल में अत्याधुनिक एक्स-रे और सोनोग्राफी मशीनों से लेकर मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर और आधुनिक जांच प्रयोगशाला तक की निशुल्क सुविधा है।

Photo: Rajasthan Patrika

छोटे पक्षियों से लेकर हाथियों तक के ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध

यहां छोटे पक्षियों से लेकर हाथियों तक के ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध है। पशुओं के आकार और वजन को ध्यान में रखते हुए तीन मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर बनाए गए हैं। इनमें लगी हाइड्रोलिक टेबल को जरूरत के अनुसार ऊपर-नीचे और अलग-अलग कोणों पर किया जा सकता है। एनेस्थीसिया और लेजर ऑपरेशन की मशीनें भी उपलब्ध हैं।

Photo: Rajasthan Patrika

इटली से मंगवाई गई सोनोग्राफी मशीनें

अस्पताल में लगी सीलिंग सस्पेंडेड हाई फ्रि क्वेंसी एक्स-रे मशीन 360 डिग्री तक घूम सकती है। इसे पशु के चारों ओर ले जाकर जांच की जा सकती है। सोनोग्राफी के लिए इटली से आयातित मशीन उपलब्ध है। बीमारियों की सटीक पहचान के लिए यहां प्रयोगशाला भी है। खून, मल और मूत्र की सामान्य जांच के साथ बायोकेमिस्ट्री, कल्चर और माइक्रोस्कोपी जांच की सुविधा उपलब्ध है। गंभीर रूप से बीमार पशुओं के लिए अलग वार्ड और पक्षियों के लिए आईसीयू तथा रिकवरी रूम बनाया गया है। भले ही बेजुबान अपनी तकलीफ जबानी नहीं बता सकते, लेकिन उनके इलाज में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की कोई कमी नहीं रखी गई है।

हादसे में पैर गंवाया, फिर भी मिला जिंदगीभर का सहारा

अस्पताल का सबसे सुखद पहलू यहां रहने वाले करीब 200 दिव्यांग पशु हैं। इनमें गाय, नंदी, बछड़े, बंदर, मोर, तोते, कबूतर और अन्य पक्षी शामिल हैं। किसी ने सडक़ हादसे में अपना एक पैर गंवा दिया तो किसी के लिए हादसे के बाद सामान्य जिंदगी जीना मुश्किल हो गया। ऐसे पशुओं का उपचार करने के बाद उन्हें यहीं आश्रय दिया गया है।

इन पशुओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इनके शेड कम वार्ड में करीब एक फीट गहराई तक रेत का लंबा प्लेटफॉर्म बनाया गया है। इससे उन्हें उठने-बैठने और आराम करने में सहूलियत होती है। उनके लिए भोजन, देखभाल और चिकित्सा की व्यवस्था भी की जाती है। जिन पशुओं के लिए सड़क पर जिंदा रहना मुश्किल था, उनके लिए यहां सुरक्षित जिंदगी का इंतजाम है। वे बोल नहीं सकते। किसी से अपनी जरूरत नहीं बता सकते, लेकिन उनकी देखभाल के लिए अस्पताल में कर्मचारी मौजूद रहते हैं।

Infographic ; ChatGpt

सड़क पर घायल पशु दिखे तो पहुंचती है एम्बुलेंस

सडक़ हादसों में घायल पशुओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती समय पर उपचार मिलने की होती है। कई बार वाहन की टक्कर से घायल पशु सड़क किनारे पड़ा रहता है। लोग उसे देखकर आगे निकल जाते हैं, लेकिन समय पर उपचार नहीं मिलने से उसकी हालत गंभीर हो सकती है। जीवासरा अस्पताल में ऐसी स्थिति के लिए एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई है। सडक़ हादसे में घायल पशु को लेने के लिए अस्पताल की एम्बुलेंस मौके पर पहुंचती है। अस्पताल लाने के बाद पशु की स्थिति के अनुसार जांच और उपचार किया जाता है। गंभीर हालत में उसे भर्ती कर लिया जाता है।

हालांकि अन्य पशुओं को अस्पताल तक लाने की जिम्मेदारी उनके मालिकों की होती है। यहां पहुंचने के बाद उपचार, जांच और दवाइयों के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता।

Photo : Rajasthan Patrika

हर दिन 250 किलो हरा चारा, खाने-पीने का भी पूरा इंतजाम

बीमार पशु को स्वस्थ करने में दवाइयों के साथ पौष्टिक भोजन की भी अहम भूमिका होती है। अस्पताल में इसका भी खास ध्यान रखा जाता है। परिसर में हाइड्रोपोनिक्स तकनीक से प्रतिदिन करीब 250 किलोग्राम हाई प्रोटीन युक्त हरा चारा तैयार किया जाता है। इसके लिए एसी प्लांट में जौ और पानी की मदद से सात दिन में अंकुरित चारा तैयार होता है। हरे चारे के अलावा पशुओं को भूसा, खल, चूरी और अन्य पशु आहार भी दिया जाता है।

यहां रहने वाले पशुओं की जरूरतों के अनुसार उनके भोजन और देखभाल का प्रबंध किया जाता है। अस्पताल का उद्देश्य केवल घायल पशु का इलाज करना ही नहीं बल्कि उसके स्वस्थ होने के बाद भी उसकी देखभाल करना है।

मृत्यु के बाद भी सम्मान, परिसर में गैस संचालित शवदाह गृह

अस्पताल में पशुओं के जीवन को बचाने के प्रयासों के साथ मृत्यु के बाद उनके अंतिम संस्कार की भी व्यवस्था है। परिसर में गैस संचालित शवदाह गृह बनाया गया है। इसमें अंतिम संस्कार के दौरान निकलने वाले धुएं को विभिन्न चरणों में फिल्टर कर ऊंची चिमनी के जरिए बाहर छोड़ा जाता है, जिससे प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। अंतिम संस्कार के बाद बची राख को नदी में प्रवाहित किया जाता है।

तत्कालीन मुख्यमंत्री ने किया था लोकार्पण

जीवासरा अस्पताल की शुरुआत सड़कों पर लावारिस पशुओं की पीड़ा को देखते हुए की गई थी। तत्कालीन गोपालन एवं खान मंत्री प्रमोद जैन भाया की पहल और मार्गदर्शन में श्री महावीर गो कल्याण संस्थान इसका संचालन कर रहा है। तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 14 फरवरी 2023 को अस्पताल का लोकार्पण किया था। इस अस्पताल के संचालन पर हर महीने लगभग 50 लाख रुपए खर्च होते हैं। इस खर्च का वहन संस्थान करता है।

Updated on:
29 Oct 2026, 11:47 AM IST
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