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Fraud : साहब मैं राजू बोल रहा हूं, मेरे घर सोना निकला है, मैं आपको सस्ते में दे दूंगा…लालच देकर ठगी की जाल में कैसे फंसते हैं लोग?

‘टटलू’ यह मूर्ति का मेवाती नाम है। ‘टटलू काटना’ यानी कि लालची आदमी को मनोवैज्ञानिक तरीके से बेवकूफ बनाकर लूटना। पीड़ितों की ऐसी हालत हो जाती है कि लुटने के बाद किसी से अपना दर्द भी साझा नहीं कर सकते है। लुट चुके लोगों पर यह कहावत ‘मारे भी और रोने भी न दे’​ फिट बैठती है। पढ़िए मेघश्याम पाराशर की दिलचस्प रिपोर्ट।
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Oct 18, 2026
Fraud
नाम राजू, काम ठगी और तलाश रही देश के 11 राज्यों की पुलिस (Photo: ChatGpt)

Fraud : 12 मई 1978 को रिलीज हुई अमिताभ बच्चन की फिल्म डॉन का डायलॉग ‘डॉन का इंतजार तो 11 मुल्कों की पुलिस कर रही है’, ‘डॉन जख्मी है, तो क्या…? फिर भी डॉन है’, और डॉन को पकड़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। देश में ठगी के लिए बदनाम मेवात के ठग राजू भाई की कहानी भी इस डायलॉग से कम नहीं है।

देश के 11 राज्यों की पुलिस के लिए पिछले 20 साल से यह नाम रहस्य बना हुआ है। थानों में पीतल की ईंट को सोने की बताकर बेचने की एफआइआर में यह नाम आम है, लेकिन किसी भी राज्य की पुलिस इस ठग को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। इस नाम से ठगी का सिलसिला थमा नहीं है, बल्कि अब भी देशभर से पीडि़तों के साथ ठगी के मामले सामने आ रहे हैं।

देश में हर दिन कोई ना कोई परिवार साइबर ठगी की वारदात का शिकार हो रहा है, लेकिन संभवतया बहुत कम लोग जानते हैं कि ठगी के यह खेल असल शुरुआत हरियाणा, राजस्थान व उत्तरप्रदेश के मेवात एरिया के अनपढ़ ठगों से हुई है। ठगी की इस काली कमाई से जिन गांवों में लाइट तक नहीं आती थी, उन गांवों में एसी और जनरेटर तक लग गए।

लालच देकर ठगी का चलता रहा सिलसिला

1990 के दशक में इसकी शुरुआत तब हुई जब ठगों की ओर से जमीन की खुदाई में मुगलकालीन मुहर या सोने की नकली ईंट/बिस्किट मिलने का लालच देकर देश भर के अमीर लोगों को मेवात बुलाया जाता था और उनसे लाखों रुपए ऐंठ लिए जाते थे। इसमें सर्वाधिक शिकार महाराष्ट्र, गुजरात के व्यापारी हुए, क्योंकि वे हिंदी और मेवात के बारे में नॉलेज कम रखते थे। भले ही ठगी का यह तरीका समय के अनुसार बदलता रहा है, लेकिन किसी समय पर विधायक, मंत्री, एसएचओ से लेकर डीजीपी, बॉलीवुड के स्टार्स तक को ठगों ने चूना लगा दिया। यह तरीका आज भी ठग अपनाते हुए ठगी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।

असली की जांच करवा कर काटा जाता है टटलू

टटलू काटने वाले अक्सर मोबाइल पर कॉल कर कहते हैं कि ‘मेरा भाई या रिश्तेदार जेसीबी चलाता है। मेरे घर में खुदाई के दौरान सोने की ईंटें या सिक्के मिले हैं। मैं तो गरीब आदमी हूं और ये चीजें मैंने अब तक देखी नहीं है। लेकिन अगर आप चाहो, तो इन्हें मैं आपको मामूली कीमत पर दे सकता हूं।’ मोबाइल धारक पहली बार तो रॉन्ग नंबर कह कर काट देता है। लेकिन टटलुबाज अपने शिकार को तब तक फांसते रहते हैं, जब तक शिकार जाल में न फंस जाए। फिर सोने की जांच के लिए ईंट का कोने का एक टुकड़ा भी काट कर दिया जाता है, जो असली होता है।

किसी भी लैब में चेक कराने पर जब वह असली मिलता है, तब लोगों के मन में भी लालच आ जाता है। टटलू बाज एडवांस के तौर पर उससे मोटी रकम लेते हैं। इसके बाद माल देने के लिए जगह, दिन और समय निर्धारित किया जाता है। फिर पैक किए नकली सोने के आइटम को पकड़ाकर कहते हैं कि इसे यहां मत खोलना, हमारे पीछे पुलिस लगी है। उनके साथ कुछ आदमी भी होते हैं, ताकि पता चलने पर रुपया छीनकर भागा जा सके। शिकार को पुलिस का भय दिखाकर उसे तुरंत वहां से चलता करते हैं और टटलू बाज बकाया रकम लेकर चंपत हो जाते हैं। जब वे सोने की ईंट या सिक्कों को बेचने के लिए बाजार जाते, तब पता चलता कि वे ठगे गए हैं। जब वे पलटकर उस मोबाइल पर कॉल करते हैं, तो वह नंबर बंद मिलता है।

मेवात के टटलूबाज देशभर में करते हैं ठगी

मेवात क्षेत्र के बदमाश देश भर में नकली सोने की मूर्ति, ईंट तथा गिन्नियों से लोगों को झांसा देकर ठगी करते हैं। इन्हें टटलूबाज कहा जाता है। ठगी को टटलू काटना कहते हैं। ये लोग देश के दूर-दराज इलाकों में जेसीबी मशीन पर ऑपरेटर का काम करने का नाटक करते हैं और पैसे वालों को खुदाई के दौरान गांव में सोने की मूर्ति, ईंट और गिन्नियां मिलने का झांसा देकर ठग ले लेते हैं। उक्त ठग नकली सोने की मूर्ति, ईंट व गिन्नियां लोगों को दिखाते हैं, जिनमें कुछ हिस्सा असल सोने का होता है। उसे उसके सामने काट कर जांच कराने को देते हैं। सोना होने पर सस्ते में देने का झांसा देकर गांव बुला लेते हैं और ठग लेते हैं। सच सामने आने पर हथियार दिखाकर लूट लेते हैं। ऐसे कई मामले पुलिस में दर्ज हैं।

ऐसे करते हैं ठगी

आपको बता दें भरतपुर के मेवात इलाके में ठगों ने इसी प्रकार देश के कई राज्यों में ठगी की वारदात को अंजाम दिया है। भरतपुर के मेवात इलाके में हर दिन किसी न किसी राज्य की पुलिस आरोपियों की तलाश में आती रहती है। मेवात इलाके के ठग ओएलएक्स के जरिये कार बेचना या फोन पर जेसीबी से खुदाई करते समय जमीन के अन्दर से सोने की ईंट मिलना बताकर उसे सस्ते में बेचना बताकर कामां बुलाते हैं। इसके बाद वो ठगी या लूट की वारदात को अंजाम देते हैं। भरतपुर जिले का कामां, पहाड़ी और जुरहरा क्षेत्र मेवात इलाका कहलाता है। जहां काफी समय से पीतल की ईंट को सोने की बताकर फ्रॉड किया जाता रहा है। इन ठगों की बातों में आकर कई बड़े अधिकारी भी ठगी का शिकार हो गए हैं।

पिछले कुछ समय में सामने आए ऐसे प्रकरण

  1. डीग जिले के मेवात के जुरहरा थाना पुलिस ने 11 अगस्त 2026 को नकली सोने की ईंट बेचने वाले अन्तरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 53 लाख 39 हजार 5 सौ रुपए, एक गाड़ी, 5 मोबाइल, 10 फर्जी एटीएम, सोने जैसी दिखने वाली पीतल की ईंट बरामद कर जब्त की थी। गिरोह महाराष्ट्र व गुजरात में 24 व्यापारियों को ठग चुका था।
  2. 18 अप्रैल 2026 को हरियाणा के नूंह थाने में गुजरात के राजकोट की रहने वाली महिला विनीता ने बताया, उसे फोन पर किसी राजू नाम के युवक ने बताया कि उसका चाचा जेसीबी मशीन से खुदाई का कार्य करता है और एक पुराने किले की खुदाई करते समय उसे सोने की ईंट मिली है जिसे वो बेचना चाहते हैं। महिला विनीता ठगों के माया जाल में फंस गई और राजकोट से वहां पहुंच गई। महिला को एक सुनसान जगह ले जाकर उसे पीतल की ईंट थमाकर उससे दो लाख रुपये ठग लिए।

… साहब मैं राजू बोल रहा हूं

साहब मैं राजू बोल रहा हूं, मजदूरी करता हूं। जेसीबी से खुदाई में सोने की ईंट निकली है। गरीब आदमी हूं, पुलिस से डर लग रहा है। आपको सस्ते दामों में बेच दूंगा। मोबाइल क्रांति के साथ मेवात में करीब दो दशक पहले यूं शुरू हुआ था ‘टटलूबाजी’ का धंधा, लेकिन इंटरनेट क्रांति के साथ-साथ मेवात के ये राजू अब ‘जेंटल ठग’ बन चुके हैं। सेक्सटॉर्शन से लेकर डिजिटल अरेस्ट सहित अलग-अलग तौर तरीके अपनाकर लोगों से साइबर फ्रॉड कर रहे हैं। इन ‘जेंटल ठगों’ के खिलाफ कार्रवाई में पुलिस सहित तमाम सुरक्षा एजेंसियों तक का माथा चकराया हुआ है।

एक कार्रवाई के बाद डीग पुलिस टीम एसपी के साथ (Photo: Patrika)

इंटरनेट क्रांति के साथ बदला ठगी का ट्रेंड

इंटरनेट क्रांति का दौर शुरू होते ही ठगों ने खुद का अपग्रेड कर लिया। फिर वे बैंक अधिकारी बन बैंक केवाईसी, एटीएम, पेटीएम, क्रेडिट कार्ड अपडेट करने का झांसा देकर लोगों के खातों से ऑनलाइन फ्रॉड करने लगे। इसके साथ ही ओएलएक्स पर स्क्रैप, व्हीकल, इलेक्ट्रॉनिक सामान व फर्नीचर आदि बेचने का झांसा देने लगे और लोगों से साइबर फ्रॉड करते रहे। पुलिस की सख्ती हुई तो ठगों ने अपना ट्रेंड फिर बदल दिया। लोगों को फेसबुक, इंस्टाग्राम व व्हाट्सऐप के जरिए सेक्सटॉर्शन और हनी ट्रैप के जाल में फंसाकर ब्लैकमेल कर रुपए ऐंठने लगे। साथ ही लोगों की फेसबुक और वाट्सऐप अकाउंट हैक कर साइबर ठगी करने लगे।

मेवात में गिरा साइबर क्राइम का ग्राफ

डीग जिला देश का सबसे बड़ा साइबर हॉटस्पॉट था। जनवरी 2024 में जब भारत में कुल 29,671 संदिग्ध लोकेशन दर्ज थीं, उनमें से 6030 लोकेशन डीग में थी, यानी भारत का 20.32% और राजस्थान का 64.82% हिस्सा अकेले डीग से था। इससे पता चलता है कि डीग पूरे देश में साइबर ठगी का सबसे बड़ा अड्डा बन चुका था, लेकिन मई 2025 तक तस्वीर बदल चुकी थी। देशभर की संदिग्ध लोकेशन घटकर 28,273 रह गईं, जिनमें डीग की संख्या सिर्फ 1017 रह गई। अब यह भारत के साइबर क्राइम में सिर्फ 3.59% और राजस्थान में 26.53% का हिस्सा है।

ये भी हो चुके हैं ठगी के शिकार

बॉलीवुड के दिग्गज सलमान खान के पिता लेखक सलीम खान के पीए को सस्ते सोने के सिक्कों का लालच देकर लाखों रुपये की चपत लगाई गई थी, जिसका मास्टरमाइंड मेवात क्षेत्र से जुड़ा हुआ था। इसके अलावा कर्नाटक के एक डीजीपी, केंद्रीय मंत्रियों, विभिन्न राज्यों के विधायकों को ठग चुके हैं। ठगों ने कई राज्यों के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों और रिटायर्ड जजों की फर्जी फेसबुक और व्हाट्सएप आईडी बनाई। इसके बाद उनके रिश्तेदारों और सहकर्मियों से आपातकाल बताकर वित्तीय धोखाधड़ी की।

Updated on:
18 Oct 2026 12:15 pm
Published on:
18 Oct 2026 12:15 pm