
Analogue Paneer : हरियाणा व राजस्थान का मेवात अब साइबर ठगों का गढ़ ही नहीं बल्कि देश के चार राज्यों में जहरीला पनीर खपाने में भी आगे पहुंच गया है। दोनों ही राज्यों के मेवात से पिछले डेढ़ महीने के अंदर 15 हजार किलो से अधिक नकली पनीर बरामद किया जा चुका है, लेकिन इसके बाद भी एनसीआर में नकली पनीर की सप्लाई हो रही है। यह भी सच है कि सिर्फ त्यौहारों पर खाद्य विभाग की कार्रवाई नजर आती है। बाकी दिन नकली पनीर आसानी से शहरों तक पहुंचता है। इसे पूरे नेटवर्क पर पत्रिका ने पड़ताल की तो चौंकाने वाला सच निकल कर सामने आया।
राजस्थान के डीग जिले के कामां, पहाड़ी, जुरहरा, हरियाणा के नूंह-मेवात के 40 से अधिक गांवों में कृषि क्षेत्रों और आवासीय परिसरों में बनी झोपड़ियों के अंदर छिपी ये इकाइयां सोयाबीन के अर्क, ताड़ के तेल, वनस्पति, दूध पाउडर, बेकिंग सोडा और सेल्खाड़ी (साबुन पत्थर/टैल्क पाउडर) का उपयोग करके असेंबली लाइन पर पनीर का निर्माण करती हैं। दीपावली व होली पर पनीर की डिमांड अधिक रहती है, ऐसे में महीनों पहले से पनीर का स्टॉक कर लिया जाता है। यहां से हरियाणा के रेवाड़ी, खैरथल-तिजारा, दिल्ली-एनसीआर, गुरुग्राम और फरीदाबाद के कारोबार से जुड़े बड़े माफियाओं के पास माल पहुंचाया जाता है। जहां से इसे होटलों में पहुंचाया जाता है। मेवात में बना नकली पनीर, मावा हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान व उत्तरप्रदेश तक सप्लाई होता है।
पड़ताल में सामने आया कि रोजाना कम से कम 140 रुपए किलो पनीर से लेकर 190 रुपए प्रति किलो तक यह उपलब्ध है। गांव जाजमका में इस कारोबार से जुड़े एक मजदूर शैफी ने बताया कि कीमत उत्पाद में इस्तेमाल होने वाले सोयाबीन, मिल्क पाउडर, पाम ऑयल और सेल्खादी के अनुपात पर निर्भर करती है। शुद्ध पनीर के बारे में पूछे जाने पर उसने कहा कि इस क्षेत्र में शुद्ध पनीर उपलब्ध नहीं है। इस प्रक्रिया को बताने के लिए मुस्तफा टीम को एक कारखाने में ले गया, वहां दूध और ताड़ के तेल के मिश्रण का उपयोग करके पनीर का उत्पादन किया जा रहा था। उसने सोया दूध निकालने के लिए सोयाबीन को पीसने से पहले 10-12 घंटे तक भिगोया जाता है। फिर कर्मचारी उसमें दूध पाउडर मिलाते हैं, मिश्रण को उबालते हैं और तैयारी के दौरान परिष्कृत तेल का उपयोग करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि केवल शुद्ध दूध का उपयोग करके बड़ी मात्रा में पनीर का उत्पादन करना संभव नहीं है। पनीर बनाने के लिए निर्माता पहले दूध से मलाई निकालते हैं और फिर मलाई रहित दूध को दूध पाउडर और परिष्कृत तेल के साथ मिलाकर पनीर बनाते हैं। उनके अनुसार, निर्माता वसायुक्त दूध में बेकिंग सोडा मिलाते थे और उसमें डाल्डा (वनस्पति) या घी मिलाकर कृत्रिम रूप से वसा की मात्रा बढ़ाते थे। उसने दावा किया कि वसा का स्तर बढ़ाने के लिए 30 किलोग्राम स्किम्ड मिल्क में एक किलोग्राम घी और बेकिंग सोडा मिलाया जाता है। इस तरह का दूध सरकारी प्रयोगशाला परीक्षण में खरा नहीं उतरेगा।
पड़ताल में सामने आया कि मेवात में 100 से भी ज्यादा छोटी-बड़ी डेयरियां है। यह मिलावटखोरों के लिए कम लागत और बड़ा मुनाफा का सौदा रहता है। ऐसे में यहां बनने वाला नकली पनीर किसी जहर से कम नहीं होता है। यह पनीर 140 रुपए प्रति किलो के हिसाब से वाहनों के माध्यम से राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली व उत्तरप्रदेश के थोक विक्रेता व होटलों में सप्लाई किया जाता है। हालांकि खाद्य विभाग की कार्रवाई सिर्फ दीपावली तक ही सीमित होकर रह जाती है। इससे पहले भी पुलिस बड़ी मात्रा में नकली पनीर नष्ट करा चुकी है। दीपावली और त्योहारों के सीजन में मिलावटी और नकली खाद्य पदार्थों, विशेषकर मावा और पनीर की मांग अचानक बढ़ जाती है, जिसका फायदा उठाकर मिलावटखोर भारी मात्रा में मिलावटी पनीर बाजारों में खपाने की योजना बनाते हैं।
मेवात के कामां, पहाड़ी, जुरहरा, सीकरी व नगर एरिया में ही जहर का यह कारोबार सबसे ज्यादा है। आश्चर्य की बात यह है कि इस एरिया में स्थिति यह हो गई है कि स्थानीय लोग ज्यादातर तो पनीर ही नहीं खरीदते हैं और अगर खरीद करते हैं तो स्थानीय किसी विश्वसनीय कारोबारी से ही लेते हैं। शादियों में भी पनीर की सब्जी बनवाने से परहेज करते हैं। दीपावली के आसपास तो स्थानीय स्तर पर पनीर खरीदना ही बंद कर दिया जाता है। उनका तर्क है कि पनीर की शुद्धता को प्रमाणित ही नहीं किया जा सकता है। ऐसे में उसे खाने से बचना ही ठीक है।
खाद्य नियमों के अनुसार, पनीर गाय या भैंस के दूध से बना होना चाहिए और उसमें वसा और नमी के निर्धारित मानक होने चाहिए। वनस्पति वसा और पादप प्रोटीन से बने उत्पाद डेयरी विकल्पों की श्रेणी में आते हैं और उन पर स्पष्ट रूप से गैर-डेयरी या एनालॉग का लेबल लगा होना चाहिए। हालांकि, यहां निर्मित उत्पादों को सामान्य पनीर के रूप में बेचा जा रहा है।
-सबसे बड़े उपभोक्ता देश भारत का पनीर बाजार 2023 में 570 अरब रुपए का था, इसके 2030 तक बढकऱ 1,848 अरब रुपये (अनुमानित) हो जाने की उम्मीद है, यह सालाना 14 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है।
-देश में दूध का जितना उत्पादन है, खपत उससे कहीं ज्यादा है। ऐसे में नकली उत्पादों को बढ़ावा भी मिलता है। देश में दूध का उत्पादन सिर्फ 248 मिलियन टन, खपत इससे कहीं ज्यादा है। ऐसे में सिंथेटिक दूध, फॉर्मलिन वाले पनीर और नकली घी से यह मांग पूरी हो रही है। देश में घरेलू खपत और तरल दूध की मांग भी अनुमानित तौर पर 240 मिलियन टन के आसपास बनी हुई है। यानी दूध के उत्पादन का अधिकांश हिस्सा देश में दूध के रूप में ही खप जा रहा है। 1950 में 17 मिलियन टन था जो बढ़कर 2025 में 247 मिलियन टन से ज्यादा हो गया। 2024-25 में 247.87 मिलियन टन, यानी करीब 24.79 करोड़ टन रहा। यह 2023-24 के 239.30 मिलियन टन से 3.58 प्रतिशत अधिक है। प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 485 ग्राम प्रतिदिन रही। 2023-24 में औसतन दूध की मासिक खपत ग्रामीण क्षेत्रों में 5.085 लीटर प्रति व्यक्ति और शहरी क्षेत्रों में 5.686 लीटर प्रति व्यक्ति थी। यानी मोटे तौर पर रोजाना करीब 170-190 मिलीलीटर प्रति व्यक्ति घरेलू खपत, इसमें होटल, मिठाई, चाय-दुकान, फूड प्रोसेसिंग और डेयरी उत्पादों में इस्तेमाल होने वाला दूध अलग है।
दुग्ध उत्पादन में देश में उत्तर प्रदेश 15.6% के साथ पहले, राजस्थान 14.8% के साथ दूसरे, मध्य प्रदेश में 9.1%, गुजरात में 7.7%, महाराष्ट्र में 6.7% है। पंजाब, राजस्थान और हरियाणा में लोग सबसे ज्यादा दूध पीते हैं. पंजाब में हर दिन प्रति व्यक्ति औसत मिल्क कंजंप्शन 1245 ग्राम है, जबकि राजस्थान में यही आंकड़ा 1171 ग्राम है। हरियाणा में एक व्यक्ति रोजाना औसतन 1105 ग्राम दूथ पी जाता है।
मिलावटी या नकली पनीर का सेवन करना सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकता है. ऐसे पनीर का सेवन सिर्फ पेट खराब होने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लंबे समय में यह शरीर के कई अंगों पर गंभीर असर डाल सकता है। मिलावटी पनीर में शुद्ध दूध की जगह सिंथेटिक दूध, स्टार्च या अन्य घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। इस तरह का पनीर दिखने में असली जैसा लग सकता है, लेकिन इसकी क्वालिटी बेहद खराब होती है। ऐसे पनीर का सेवन करना सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। इससे लॉन्ग टर्म में कई बीमारियां हो सकती हैं। क्रोनिक डिजीज से जूझ रहे लोगों के लिए मिलावटी पनीर जानलेवा भी हो सकता है। मिलावटी पनीर खाने का सबसे पहले असर पाचन तंत्र पर होता है। इसमें मौजूद पदार्थ पेट दर्द, गैस, अपच, उल्टी और दस्त जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। अगर मिलावट ज्यादा हो, तो फूड पॉइजनिंग का खतरा भी बढ़ सकता है। अगर लंबे समय तक मिलावटी चीजों का सेवन किया जाए, तो इससे लिवर और किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। कुछ लोगों में मिलावटी पनीर खाने के बाद स्किन पर खुजली, रैशेज, लाल चकत्ते या अन्य एलर्जी की शिकायत हो सकती है।
डॉ. सौरभ जैन, एमडी गेस्ट्रोलॉजी।
वरिष्ठ अधिवक्ता उत्तम शर्मा बताते हैं कि भारत में नकली पनीर, सिंथेटिक या मिलावटी दूध बनाने और बेचने पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कड़ी सजा और जुर्माने का प्रावधान है। मिलावट की गंभीरता के आधार पर 1 लाख रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। खतरनाक रसायनों या स्वास्थ्य के लिए हानिकारक तत्वों (जैसे डिटर्जेंट, यूरिया, कास्टिक सोडा, सिंथेटिक केमिकल आदि) के मिलावट वाले मामले में गंभीर सजा का प्रावधान है। कुछ मामलों में उम्रकैद (जीवन कारावास) तक की सजा हो सकती है, जो इस बात पर निर्भर करता है कि मिलावट से जनस्वास्थ्य को कितना नुकसान पहुंचा है। कुछ राज्यों में गंभीर या स्वास्थ्य के लिए घातक मिलावट पाए जाने पर गैर-जमानती एफआइआर दर्ज करने का सख्त नियम है।