Road Accident: आईरेड सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा- पिछले साल जिले में हुई 236 सड़क मौतों में से 106 मौतें सिर्फ शाम 6 से रात 12 बजे के बीच हुईं।
Road Accident: जैसे ही घड़ी शाम के छह बजाती है, जिले की सड़कों पर खतरे का ग्राफ अचानक तेज़ी से ऊपर चढ़ने लगता है। आईरेड सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि पिछले साल सड़क हादसों में हुई 236 मौतों में से 106 मौतें सिर्फ शाम 6 से रात 12 बजे के बीच हुईं। यानी महज़ छह घंटे जिले के लिए सबसे जानलेवा साबित हुए। दिन की तुलना में रात का समय दोगुना घातक बनता जा रहा है, जिससे ट्रैफिक व्यवस्था और सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
दिनभर की भागदौड़ के बाद जैसे ही घड़ी की सुई शाम 6 बजाती है, जिले की सडक़ें सबसे खतरनाक समय में प्रवेश कर जाती हैं। ट्रैफिक पुलिस के आईरेड सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पिछले साल सड़क हादसों में जान गंवाने वाले 236 लोगों में से 106 की मौत सिर्फ शाम 6 से रात 12 बजे के बीच हुई। यानी कुल मौतों का करीब 50 प्रतिशत सिर्फ 6 घंटे में। आंकड़े बताते हैं कि जैसे ही शाम ढलती है, सड़कों पर खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
दिन के समय (सुबह 6 से शाम 6 बजे तक) कुल 92 मौतें हुईं।
जबकि शाम 6 बजे के बाद से सुबह 6 बजे तक कुल 144 मौतें दर्ज की गईं।
यानी रात का समय दिन की तुलना में कहीं ज्यादा घातक साबित हुआ।
पुलिस की विशेष प्लॅानिंग:
6 से 12 बजे ‘हाई अलर्ट’
इन चिंताजनक आंकड़ों के सामने आने के बाद पुलिस ने विशेष कार्ययोजना तैयार की है।
सुबह 6 से 9 बजे: 14 मौत
सुबह 9 से दोपहर 12 बजे: 34 मौत
दोपहर 12 से 3 बजे: 20 मौत
दोपहर 3 से 6 बजे: 24 मौत
शाम 6 से रात 9 बजे: 56 मौत
रात 9 से 12 बजे: 50 मौत
रात 12 से 3 बजे: 24 मौत
रात 3 से सुबह 6 बजे: 14 मौत
स्पष्ट है कि सबसे खतरनाक स्लॉट शाम 6 से रात 9 बजे रहा, जहां 56 लोगों ने जान गंवाई। वहीं रात 9 से 12 बजे के बीच 50 मौतें हुईं। दोनों को जोड़े तो सिर्फ 6 घंटे में 106 मौतें।
शराब पीकर वाहन चलाना सबसे बड़ी वजह: ट्रैफिक पुलिस के अनुसार अधिकांश गंभीर हादसों में ड्राइवर के शराब सेवन की पुष्टि हुई है। शाम के समय सामाजिक कार्यक्रम, ढाबे, बार और पार्टियां बढ़ जाती हैं। कई लोग नशे की हालत में खुद वाहन चलाकर निकलते हैं, जो हादसों की बड़ी वजह बन रहा है।
ओवरस्पीडिंग और कम दृश्यता: अंधेरा बढऩे के साथ ही वाहन चालक अक्सर तेज रफ्तार पकड़ लेते हैं। कई जगह स्ट्रीट लाइट की कमी और हाईबीम लाइट से भी दुर्घटना की आशंका बढ़ती है।
ऑफिस टाइम का दबाव: शाम 6 बजे के आसपास ऑफिस और कामकाज से लौटने का समय होता है। सडक़ों पर ट्रैफिक का दबाव अधिक रहता है। जल्दबाजी और नियमों की अनदेखी हादसों को न्योता देती है।
भारी वाहनों की बढ़ती आवाजाही: रात के समय में ट्रकों और भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ जाती है। इनसे टक्कर के मामलों में मौत की संभावना अधिक रहती है।
आईरेड सिस्टम के विश्लेषण में यह तथ्य सामने आया है कि शाम 6 बजे से रात 12 बजे के बीच सडक़ दुर्घटनाओं और मौतों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है। दुर्घटनाओं को रोकने और लोगों की जान बचाने के लिए शाम 6 से रात 12 बजे के बीच विशेष चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। ड्रिंक एंड ड्राइव, ओवरस्पीडिंग और बिना हेलमेट/सीट बेल्ट के वाहन चलाने वालों पर सख्ती की जा रही है- रामगोपाल करियारे, एएसपी, ट्रैफिक पुलिस