Sikh Regiment recruitment: सिख रेजिमेंट में लगातार सैनिकों की संख्या घटती जा रही है। यही वजह है कि सिख रेजिमेंट पंजाब के युवाओं से सिख रेजिमेंट में शामिल होने की अपील की है। इसको लेकर पंजाब के सांसद और सीएम भी चितिंत हैं। क्या है सिख रेजिमेंट की ताकत, कितना मिल चुका है सम्मान? क्यों पंजाब के युवा सेना से दूरी बना रहे हैं? पढ़िए विस्तृत रिपोर्ट।
Sikh Regiment recruitment : सिख रेजिमेंट ने पंजाब युवाओं की सेना में कम हो रही दिलचस्पी को लेकर बयान जारी किया है। सेना ने कहा कि सिख रेजिमेंट के कई सैनिकों ने समर्पित सेवा के माध्यम से वरिष्ठ पदों तक पहुंचकर नेतृत्व, अनुशासन और निष्ठा के अनुकरणीय मानक स्थापित किए हैं। भर्ती में घटती संख्या के मद्देनजर भारतीय सेना (Indian Army) ने पंजाब के युवाओं से सिख रेजिमेंट की गौरवशाली विरासत (Sikh regiment Legacy) को आगे बढ़ाने के लिए आगे आने की अपील की है। सेना ने इसके समृद्ध इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सिख रेजिमेंट के कई सैनिकों ने समर्पण और वीरता के बल पर वरिष्ठ नेतृत्व पदों तक पहुंचकर अनुशासन, साहस और कर्तव्यनिष्ठा के उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किए हैं।
भारतीय सेना ने इसी हफ्ते पंजाब के युवाओं से सिख रेजिमेंट में शामिल होने की भावुक अपील जारी की, जिसमें रेजिमेंट द्वारा प्राप्त सम्मान और पुरस्कारों में उत्कृष्ट प्रदर्शन को रेखांकित किया गया और कहा गया कि इसकी "वास्तविक शक्ति" राज्य के युवाओं में निहित है।
सेना ने कहा कि पंजाब के युवाओं को सिख रेजिमेंट में शामिल होना चाहिए और अपने माता-पिता और परिवार के लिए गर्व का विषय बनना चाहिए। बयान में कहा गया, "इतनी प्रतिष्ठित और प्रसिद्ध रेजिमेंट में सेवा करना अत्यंत सम्मान और सौभाग्य की बात है।" सेना के बयान में कहा गया है, "सिख रेजिमेंट भारतीय सेना की सबसे प्रतिष्ठित और विशिष्ट रेजिमेंटों में से एक है और परिचालन प्रभावशीलता में लगातार अग्रणी रही है।"
हालांकि, पंजाब के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने पत्रिका से बातचीत में कहा कि सेना में युवाओं की दिलचस्पी कम होने की सबसे बड़ी वजह नौकरी के लिए विदेश जाने की थी। कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से युवाओं को अच्छी कमाई का प्रलोभन मिल जाता था। अब पुलिस और सेना में भी अच्छी सैलरी मिलने लगी है और दूसरा लोगों को अपनी मिट्टी से जुड़े रहने की कीमत भी समझ आने लगी है। वह कहते हैं कि सोशल मीडिया पर कमाई के नए रास्ते का प्रलोभन और खुद का काम करने की सीख भी छोटी वजहें हैं। उन्होंने कहा कि सेना और पुलिस की नौकरी बहुत अनुशासन की डिमांड करती है। आज की युवा पीढ़ी सोशल मीडिया के प्रभाव में इस मामले में थोड़ी ढीली पड़ गई थी, लेकिन अब युवाओं को भी अपनी चिंता होने लगी है।
क्या पंजाब में युवाओं में नशाखोरी का चलन होने के चलते भी युवक सेना से दूरी बना रहे हैं? इस सवाल के जवाब में वह कहते हैं, 'नशाखोरी के चलते सेना में युवा कम जा रहे हैं, मैं ऐसा नहीं मानता हूं। पंजाब के युवा योग्य हैं। हेल्थ के मामले में भी वे तुलनात्मक रूप से बेहतर हैं। सेना से जुड़ने को लेकर यहां के युवा काफी इंटरेस्टेड भी रहते हैं। मुझे लगता है कि युवाओं की अब विदेशों में नौकरी करने वाली बात काफी कम हुई। अब सिख रेजिमेंट की दिक्कत दूर जाएगी।'
पद्मश्री से सम्मानित पंजाब से राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह ने एक्स पर सेना में युवाओं की कम होती दिलचस्पी के बारे में चिंता जताते हुए लिखा, 'पंजाब के युवाओं की सेना और सिख रेजिमेंट में घटती भर्ती का कारण विदेश प्रवास, नशाखोरी, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और अन्य विकल्पों की तुलना में अल्पकालिक "अग्निपथ/अग्निवीर" नौकरियों में घटती रुचि है।
पंजाब में आर्थिक और सामाजिक परिवर्तनों ने एक लंबे, स्थिर सैन्य करियर के पारंपरिक आकर्षण को कम कर दिया है, जिसका सीधा असर सिख रेजिमेंट में भर्ती पर पड़ता है।
युवाओं को प्रशिक्षण लेने और विभिन्न रैंकों पर सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित करके इस प्रवृत्ति को पलटने के लिए तत्काल प्रयास आवश्यक हैं।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कुछ समय पहले सिख रेजिमेंट में पंजाबी युवाओं की कमी को उजागर किया था और कहा था कि पश्चिमी कमान के जीओसी-इन-सी ने उनसे मुलाकात की थी और उन्हें इन चिंताओं से अवगत कराया था। इस बारे में इंडियन एक्सप्रेस से मुख्यमंत्री ने सेना में युवाओं की दिलचस्पी कम होने की वजह प्रवासन और युवाओं में नशे की लत की समस्या को बताया था।
पंजाब में 15.4% लोग किसी न किसी तरह का नशा करते हैं। यानी राज्य की कुल आबादी का यही हिस्सा ड्रग्स का सेवन कर रहा है। इसमें शराब, तम्बाकू और हीरोइन शामिल हैं। एक अनुमान के अनुसार, राज्य के 30 लाख लोग किसी न किसी तरह के नशा के आदी हैं।
| क्रम | विषय | आंकड़े / विवरण |
|---|---|---|
| 1 | NDPS Act के तहत दर्ज मामले (2023) | 11,589 मामले |
| 2 | देश में रैंक (NDPS केस) | तीसरा स्थान |
| 3 | ड्रग ओवरडोज़ मौतें (2023) | 89 मौतें |
| 4 | ड्रग ओवरडोज़ मौतें (2022) | 144 मौतें |
| 5 | देश में ओवरडोज़ मौतों में रैंक (2023) | पहला स्थान |
| 6 | देश में कुल ड्रग ओवरडोज़ मौतें (2023) | 654 मौतें |
| 7 | देश की कुल हीरोइन जब्ती में पंजाब का हिस्सा | लगभग 44.5% |
| 8 | NDPS मामलों में दोष सिद्ध दर (Conviction Rate) | 83.9% |
| 9 | Conviction Rate की अवधि | जनवरी 2022 – नवंबर 2025 |
सिख रेजिमेंट ने अब तक कुल मिलाकर 75 युद्ध सम्मान, 38 रंगमंच सम्मान (Theatre Honours)और 1,650 से अधिक वीरता पुरस्कार और सम्मान हासिल किए हैं। सिख रेजिमेंट ने ये सम्मान देश को स्वतंत्रता प्राप्ति से पहले और बाद में हासिल किए।
जनवरी 2026 में सिख रेजिमेंट की सात बटालियनों को सम्मानित किया गया। इनमें से दो बटालियनों को चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ (सीओएएस) यूनिट प्रशस्ति पत्र, एक बटालियन को सीओएएस यूनिट प्रशंसा पुरस्कार और चार बटालियनों को आर्मी कमांडर की यूनिट प्रशंसा पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
सिख रेजिमेंट ने दो विश्व युद्धों, भारत और पाकिस्तान के बीच तीन युद्धों (1947-48, 1965, 1971), 1962 में चीन और भारत युद्ध, भारत पाकिस्तान के बीच कारगिल में युद्ध (1999) और विभिन्न आतंकवाद विरोधी अभियानों सहित प्रमुख संघर्षों में भाग लिया है।
सिख रेजिमेंट की योद्धा परंपरा छठे सिख गुरु, गुरु हरगोबिंद द्वारा स्थापित की गई थी और दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह द्वारा इसे और मजबूत और अमर बनाया गया था। सेना का कहना है कि साहस, अनुशासन और बलिदान के शाश्वत सिद्धांत आज भी सिख सैनिकों की पीढ़ियों को प्रेरित करते रहते हैं।
सिख रेजिमेंट में 20 नियमित बटालियन और तीन प्रादेशिक सेना बटालियन हैं। इसके अलावा, रेजिमेंट से संबद्ध एक राष्ट्रीय राइफल्स बटालियन भी है।