LPG Crisis: इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है। इसका असर रसोई गैस की कीमतों पर भी पड़ा है...
LPG Crisis: @ गुंजन परमार। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय हालात का असर अब घरेलू बाजार में भी दिखाई देने लगा है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है। इसका असर रसोई गैस की कीमतों पर भी पड़ा है। हाल ही में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 60 रुपए की बढ़ोतरी होने से आम लोगों, खासकर गृहिणियों की चिंता बढ़ गई है।
शहर और गांवों में इन दिनों गैस की कीमतों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं सुनने को मिल रही हैं। कई परिवारों में घर के मुखिया अब परिवार के सदस्यों को यह सलाह देते नजर आ रहे हैं कि रसोई में अनावश्यक व्यंजन बनाने से बचा जाए और केवल दाल, चावल और सब्जी जैसे जरूरी भोजन ही तैयार किए जाएं। ऐसे में घर की महिलाओं को चिंता होने लगी है कि यदि अचानक मेहमान आ जाएं तो उनके सत्कार के लिए भी सोचना पड़ेगा।
7 मार्च से पहले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 924 रुपए थी, जो अब बढक़र 984 रुपए हो गई है। शहर के गैस कार्यालय में नई दर सूची भी चस्पा कर दी गई है। इसके अनुसार 19 किलोग्राम के कमर्शियल सिलेंडर की दरें 2091 रुपए, 2336.50 रुपए और 2113.50 रुपए बताई गई हैं। वहीं 14.2 किलोग्राम का घरेलू सिलेंडर 984 रुपए, 5 किलोग्राम सिलेंडर की कीमत 364 और 592 रुपए, तथा 10 किलोग्राम सिलेंडर की कीमत 703 रुपए निर्धारित की गई है। घरेलू उपयोग में सबसे अधिक 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर का ही इस्तेमाल किया जाता है। इंडेन गैस एजेंसी के संचालक गजानन सोनवानी ने बताया कि फिलहाल गैस सिलेंडरों की पर्याप्त उपलब्धता है और लोगों को आपूर्ति को लेकर घबराने की आवश्यकता नहीं है।
राजिम शहर में घरेलू गैस की केवल एक ही एजेंसी है, जो लगभग 25 हजार की आबादी के साथ-साथ गोबरा नवापारा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी गैस सिलेंडरों की आपूर्ति करती है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना शुरू होने के बाद घरेलू गैस कनेक्शनों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। अब शहर से लेकर गांव तक अधिकांश घरों में गैस चूल्हे का ही उपयोग किया जा रहा है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार देश की रिफाइनरियां फिलहाल अपनी क्षमता से कम उत्पादन कर रही हैं और एलपीजी गैस की आपूर्ति को प्राथमिकता दी जा रही है। देश में लगभग 72 दिनों का गैस भंडारण उपलब्ध बताया जा रहा है। अन्य देशों से गैस आपूर्ति बढ़ाने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार पहले अन्य स्रोतों से लगभग 55 प्रतिशत आपूर्ति हो रही थी, जो अब बढक़र 70 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
नई व्यवस्था के तहत पहले एलपीजी गैस की आपूर्ति की जा रही है, इसके बाद सीएनजी और पाइप्ड कुकिंग गैस क्षेत्र को दी जा रही है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 मई 2016 को उत्तर प्रदेश के बलिया से की थी। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराना था, ताकि उन्हें स्वच्छ ईंधन मिल सके। वर्तमान में होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग उद्योग में भी गैस सिलेंडरों का व्यापक उपयोग हो रहा है।
घरेलू गैस की कीमत बढऩे से आम नागरिकों में चिंता देखी जा रही है। गृहिणी प्रभा, रामकली, लच्छू, मोतिम और दीप्ति ने बताया कि वे रोजी-मजदूरी करने वाले परिवार से हैं और गैस की कीमत बढऩे से रसोई का खर्च संभालना मुश्किल हो जाता है। उनका कहना है कि सरकार को इस दिशा में कोई समाधान निकालना चाहिए।
संतोष, शांति, रत्ना, चांदनी, बिसाहिन, हिना और रुक्मणी ने बताया कि समाचार माध्यमों से उन्हें अंतरराष्ट्रीय संघर्ष की जानकारी मिली है, लेकिन उनका मानना है कि विश्व के देशों को युद्ध के बजाय बातचीत के माध्यम से समस्याओं का समाधान करना चाहिए।
विमला सेन, नागेश्वरी यादव, लक्ष्मी आडिल, गायत्री यादव और रामति सोनकर ने कहा कि गर्मी के दिनों में गैस की खपत बढ़ जाती है, इसलिए इस समय कीमतों में वृद्धि आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बनती है। वहीं होटल और रेस्टोरेंट संचालकों ने बताया कि अभी गैस की आपूर्ति नियमित रूप से मिल रही है, लेकिन कीमतों में वृद्धि पर नियंत्रण जरूरी है।
अब कई परिवार गैस सिलेंडर के विकल्प के रूप में इंडक्शन और इलेक्ट्रिक स्टोव की ओर रुख कर रहे हैं। शहर के इलेक्ट्रॉनिक बाजार में इंडक्शन चूल्हों और उनसे जुड़े बर्तनों की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो गई है। दुकानदारों के मुताबिक पहले जहां इंडक्शन चूल्हों की बिक्री सीमित थी, वहीं अब अचानक मांग बढऩे लगी है। पहले हफ्ते में औसतन दो से तीन इंडक्शन ही बिकते थे, लेकिन अब एक ही दिन में सात से आठ पीस तक बिक रहे हैं। कई ग्राहक गैस की संभावित कमी को देखते हुए पहले से ही बैकअप व्यवस्था करना चाहते हैं। बढ़ती मांग को देखते हुए दुकानदार भी अतिरिक्त स्टॉक मंगाने लगे हैं। बड़े होटल संचालक 10 से 12 इंडक्शन चूल्हे स्टॉक में रखने लगे हैं। उनका कहना है कि यदि गैस की स्थिति बिगड़ती है तो पहले से तैयारी करना जरूरी होगा।
दुकान संचालक कृष्णा लखोटिया ने बताया कि पहले बाजार में सिर्फ इलेक्ट्रिकल इंडक्शन ही बिक रहे थे, लेकिन अब इंफ्रारेड इलेक्ट्रिक स्टोव भी विकल्प के रूप में मिलने लगे हैं। हालांकि इलेक्ट्रिक चूल्हों में इंडक्शन के मुकाबले इंफ्रारेड इलेक्ट्रिक स्टोव महंगा होता है। इसकी शुरुआती कीमत करीब 3 हजार रुपए से शुरू होती है, जबकि इंडक्शन करीब 1200 रुपए में मिल जाता है। इंफ्रारेड स्टोव में बिजली की खपत अधिक होती है और इसे अपेक्षाकृत जोखिम भरा भी माना जाता है, इसलिए लोग इंडक्शन को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
शहर के होटल और रेस्टोरेंट संचालक भी गैस आपूर्ति को लेकर सतर्क हो गए हैं। बैकअप व्यवस्था के रूप में कई संचालक इंडस्ट्रियल ग्रेड इंडक्शन स्टोव के बारे में जानकारी ले रहे हैं। यह स्टोव सामान्य घरेलू इंडक्शन की तुलना में ज्यादा क्षमता वाले होते हैं और लगातार लंबे समय तक खाना बनाने के लिए उपयोग किए जाते हैं। कारोबारियों के अनुसार पिछले कुछ दिनों में रेस्टोरेंट संचालकों की ओर से इन स्टोव की पूछताछ बढ़ी है, ताकि गैस की आपूर्ति प्रभावित होने पर भी किचन का काम बाधित न हो।