राजस्थान के हृदय में बसा शेखावाटी क्षेत्र, सिर्फ रेत के टीलों और शुष्क हवाओं के लिए नहीं जाना जाता। यह अपनी भव्य, चित्रों से सजी हवेलियों की वजह से भी दुनियाभर में प्रसिद्ध है।
झुंझुनूं। राजस्थान के हृदय में बसा शेखावाटी क्षेत्र, सिर्फ रेत के टीलों और शुष्क हवाओं के लिए नहीं, बल्कि अपनी भव्य, चित्रों से सजी हवेलियों की वजह से भी दुनियाभर में प्रसिद्ध है। समय की धूल में लिपटी ये हवेलियां, शेखावाटी के सुनहरे अतीत और उसकी सांस्कृतिक विरासत की अनमोल गवाही देती हैं। शेखावाटी की हवेलियां कोई आम इमारतें नहीं, बल्कि इतिहास की जीवंत किताबें हैं। इनकी दीवारों पर उकेरे गए भित्तिचित्र न सिर्फ स्थापत्य का कमाल हैं, बल्कि राजस्थान के सामाजिक, धार्मिक और व्यापारिक जीवन की झलक भी दिखाते हैं। मगर अब इनके संरक्षण की जरूरत महसूस की जा रही है।
इन हवेलियों को हेरिटेज वॉक, सांस्कृतिक केंद्र, आर्ट गैलरी, होमस्टे और टूरिज्म हब के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। शेखावाटी क्षेत्र की धरती अपने आप में कला, संस्कृति और आस्था का अद्वितीय संगम है। ऐसे में शेखावाटी क्षेत्र आज पर्यटन क्षेत्र में सिरमौर बनता जा रहा है। इस वर्ष के छह माह में शेखावाटी के तीन जिलों (सीकर, झुंझुनूं और चूरू) में लगभग एक करोड़ 90 लाख देशी और 33 हजार से अधिक विदेशी पर्यटक पहुंचे।
बड़ी-बड़ी हवेलियां शेखावाटी को अलग पहचान दिलाती हैं। राजस्थान के झुंझुनूं में आने वाले अधिकांश विदेशी पर्यटकों की पहली पसंद हेरिटेज हवेलियां देखना ही होता है, लेकिन संरक्षण के अभाव में यह दम तोड़ रही हैं। कुछ लोग जिम्मेदार अफसरों के साथ मिलीभगत कर हवेलियों को तोड़ रहे हैं। सबसे ज्यादा हवेलियां नवलगढ़, मंडावा व झुंझुनूं में तोड़ी जा रही है। प्रशासन के अधिकारियों को कई बार इसकी लिखित शिकायत की जा चुकी, लेकिन दबंगों व प्रशासन की मिलीभगत के खेल में शिकायतों का कोई ठोस असर नहीं हो रहा। हवेलियों को तोड़कर आधुनिक होटल और कॉम्पलेक्स बनाए जा रहे हैं।
खाटूश्यामजी मंदिर और सालासर बालाजी मंदिरों को धार्मिक पर्यटन केन्द्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है। शेखावाटी क्षेत्र की हवेलियों को कुल 30 हेरिटेज प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं। ये प्रमाणपत्र हवेलियों को संरक्षण से जोड़ते हुए उन्हें पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों का हिस्सा बना रहे हैं। शेखावाटी क्षेत्र में पर्यटन को लेकर अब तक 58 एमओयू हुए हैं। अब इनको धरातल पर उतारने की जरूरत है।
-तोड़ने के लिए कलक्टर स्तर पर अनुमति ली जाए।
-अनुमति से पहले टीम मौके पर जाकर देखे कि इसे तोड़ना जरूरी है या रिपेयर किया जा सकता है।
-यहां पर्यटकों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाए।
-हर संरक्षित हवेली के आगे उसकी जानकारी अंग्रेजी व हिन्दी में लिखी जाए।
-हवेलियों को कोई तोड़े तो इसकी शिकायत के लिए अलग से वाट्सएप नम्बर जारी किए जाएं।
-हवेलियों के मालिकों के साथ बैठक कर इनके संरक्षण पर जोर दिया जाए।
-हवेलियों का प्रचार-प्रसार किया जाए।
-पर्यटन मेलों में हवेलियों के मॉडल रखे जाएं।
पर्यटक सीजन शुरू हो चुका है। जिले के होटल व्यवसायियों ने बताया कि इस सीजन पर्यटकों की एडवांस बुकिंग अच्छी है। उम्मीद है कि इस बार सबसे अधिक संख्या में विदेशी पर्यटक झुंझुनूं जिले में आएंगे। झुंझुनूं में आने वाले अधिकांश पर्यटकों की पहली पसंद हवेलियां देखना ही होता है। जिले में फिल्म शूटिंग, डेस्टिनेशन वेडिंग एवं प्री-वेडिंग शूट में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
देवेन्द्र चौधरी, उप निदेशक, पर्यटन विभाग झुंझुनूं
मंडावा की विशेष पहचान हवेलियों से है। इनके संरक्षण की पहल बहुत अच्छी है। मंडावा की पहचान बरकरार रहने से ही पर्यटक ज्यादा आएंगे। पर्यटक आने से वे होटलों में रुकेंगे। घूमेंगे, खरीदारी भी करेंगे। खाना खाएंगे व नाश्ता करेंगे। ऐसे में पर्यटन क्षेत्र में रोजगार बढ़ेगा। इस बार उम्मीद है पर्यटक ज्यादा आएंगे।
गोविंद जोशी, होटल व्यवसायी , मंडावा