
UNFPA Report 2026: दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, हंगरी, जापान, रूस, ताइवान और इटली जैसे ऐसे कई देश हैं, जहां जन आबादी में हर साल गिरावट दर्ज की जा रही है। और सरकारों की चिंता बढ़ती जा रही है। स्थिति ये आई कि सरकारों ने अपने अपने स्तर पर युवाओं को शादी करने से लेकर बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहि राशि, सब्सिडी, इंसेन्टिव्स, पैरेंटिंग लीव्ज, घर, शिक्षा जैसी सुविधाओं के साथ ही इनकम टैक्स में छूट जैसी योजनाएं शुरू कर दीं। लेकिन इन योजनाओं ने सरकारों को उम्मीद के मुताबिक परिणाम अब तक नहीं दिए हैं।'
UNFPA के लाइव्ज, चॉइसेस एंड फ्यूचर: डेमोग्राफिक फीचर्स सर्वे' में ऐसे कम आबादी वाले देशों के युवाओं को भी शामिल किया गया था। जब उनसे शादी या बच्चों के जन्म को लेकर ज्यादा समय लेने या फिर न सोचने के बारे में पूछा गया, तो इस बहस का एक और भावनात्मक पहलू सामने आया। ज्यादातर युवाओं ने आर्थिक परिस्थितियों, नौकरी, करियर, सरकारों पर भरोसे से इतर एक विश्वसनीय और सही जीवनसाथी का मिलना भी उतना ही जरूरी माना। यानी रिपोर्ट स्पष्ट संकेत देती है कि दुनिया भर की सरकारें आर्थिक रूप से सहयोग दे रही हैं, लेकिन एक अच्छा और खूबसूरत रिश्ता नहीं बना पा रहीं। patrika.com पर पढ़ें 'बदलती दुनिया, बदलता परिवार' के भाग - 2 में जानें बदलती रिश्तों की परिभाषा और सही जीवनसाथी के मिलने की चाहत कैसे निभा रही अहम भूमिका…
UNFPA की रिपोर्ट कहती है कि परिवार शुरू करने का फैसला आर्थिक गणित से ऊपर भावनाओं से भरे मन की दुविधा और न बदलने वाली मानसिकता पर भी निर्भर करने लगा है। युवाओं की मनोस्थिति बताती है कि वे एक भरोसेमंद जीवनसाथी की तलाश में हैं। जब उनसे पूछा गया कि वे अपने जीवनसाथी से किस भरोसे की उम्मीद कर रहे हैं? तो उनके कई जवाब बेहद जरूरी तोे कुछ चौंकाने वाले थे।
एक भरोसेमंद जीवनसाथी के रूप में उन्हें अपने जीवनसाथी में इन गुणों का होना जरूरी माना
एक भरोसेमंद साथी की तलाश में उम्र बिता रहे युवाओं की बातों में एक अहम और चौंकाने वाला खुलासा भी हुआ। अक्सर भारतीय युवा कहते सुनाई देते हैं कि पढ़े-लिखे होने के बाद भी उनकी मानसिकता नहीं बदली है कि ज्यादातर युवा नहीं चाहते कि उनकी पत्नी नौकरी करे। हालांकि एक तबका इसका विरोधी भी है। यही कारण है कि गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री और यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने भी अपने 'IAS से पहले एक्सपर्ट मॉम' बनने वाले बयान पर विरोध झेला। लेकिन हैरानी की बात यह है कि यह समस्या अकेले भारत की नहीं है, बल्कि दुनिया भर के युवाओं की मनोस्थिति है कि उन्हें सिर्फ शादी वाला रिश्ता नहीं चाहिए।
युवा मानते हैं कि समझौते वाला रिश्ता कभी लंबा चलने वाला साबित नहीं हो सकता। इसलिए युवा शादी करने या परिवार शुरू करने के लिए सही साथी के जीवन में आने का इंतजार कर रहे हैं। ताकि बराबरी के साथ और सम्मानपूर्वक जीवन बिताया जा सके।
यह स्थिति दुनिया के ज्यादातर देशों में है, लेकिन भारत में भी इसके संकेत नजर आते हैं। यहां भी युवक-युवतियों की शादी के बंधन में बंधने की औसत उम्र बढ़ रही है। उच्च शिक्षा, कार्यस्थलों पर महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और आर्थिक स्वतंत्रता के साथ ही बदलती सामाजिक अपेक्षाओं ने जीवन साथी को चुनने के मायने बदल दिए हैं। यानी आज का युवा परिवार की पसंद के साथ अपनी सोच, करियर, आर्थिक स्थिरता और जिम्मेदारियों को आपसी सहयोग से साझा करने वाले जीवन साथी की तलाश में है।
अगर दुनिया के कई देश करोड़ों अरबों रुपए खर्च कर भी उम्मीदों के मुताबिक जन्मदर नहीं बढ़ा पा रहे हैं, तो क्या केवल आर्थिक प्रोत्साहन काफी है? तो UNFPA की रिपोर्ट से साफ संकेत मिल चुके हैं कि ऐसा नहीं है। युवा अब बोनस या टैक्स में छूट से ज्यादा ऐसे माहौल को भी अहम मान रहा है जिसमें उसे भरोसेमंद जीवनसाथी, रिश्तों में समानता, काम और जीवन के बीच संतुलन और परिवार के लिए सहयोगी सामाजिक व्यवस्था नहीं मलेगी, तब तक अपेक्षित परिणाम मिलना मुश्किल होगा।
हंगरी में परिवार में पहले बच्चे के जन्म पर बिना ब्याज के 23 लाख रुपए का लोन देने की सुविधा दी गई है। वहीं दूसरे बच्चे के जन्म पर लोन की 30 फीसदी राशि माफ कर दी जाती है, ताकि परिवार कार खरीद सके। वहीं तीसरे बच्चे की पैदाइश के बाद सरकार घर खरीदने के लिए 23 लाख रुपए की राशि देती है। तो जिन मांओं को चार या चार से ज्यादा बच्चे हैं, उन्हें पर्सनल इनकम टैक्स में जीवनभर तक की छूट मिल जाती है। जो शादीशुदा कपल बच्चे पैदा करने का वादा करते हैं, उन्हें घर के लिए सरकारी लोन दिया जाता है। जितने ज्यादा बच्चे उतनी ज्यादा रकम।
विएतनाम दुनिया का ऐसा देश है जहां सरकार ने 2025 में दो बच्चों की पॉलिसी बंद कर दी थी। देश की सरकार को जन्मदर में आई कमी के कारण भविष्य की चिंता सताई। सरकार ने जन्मदर को बढ़ाने के लिए इंसेटिव्स की देना शुरू कर दिया।
सिंगापुर में बच्चों के जन्म के बाद उन्हें खास योजना का हिस्सा बनाया जाता है।
पोलैंड सरकार ने एक नया टैक्स कानून लागू किया है। इसके तहत दो या दो से ज्यादा बच्चों वाले परिवारों तको 38,395 डॉलर की सालाना कमाई पर जीरो-इनकम टैक्स का कानून लागू किया गया है। इसके अलावा यहां एक खास कार्यक्रम भी आयोजित किया जाता है। इसके मुताबिक ज्यादा बच्चों वाले परिवार को 219 डॉलर की रकम दी जाती है।
इटली में यूनिवर्स चाइल्ड अलाउंस योजना संचालित की जाती है। यह राशि उन परिवारों को दी जाती है, जिनके घरों में बच्चे हैं। बच्चों की संख्या के हिसाब से यह राशि दी जाती है। 2025 में इस अलाउंस की राशि में तीन गुना का इजाफा किया गया।
एस्टोनेशिया में भी जिन परिवारों में दो या दो से ज्यादा बच्चे होते हैं उन्हें एक निश्चित अलाउंस दिया जाता है। पहले बच्चे के लिए 1 हजार 848 पाउंड की राशि दी जाती है। दूसरे बच्चे के लिए 3 हजार 48 पाउंड तो, तीसरे बच्चे के पैदा होने के बाद पैरेंट्स एनुअल टैक्स रिटर्न के लिए भी दावा कर सकते हैं। वार्षिक छुट्टी और अन्य कई लाभ दिए जाने का प्रावधान है। यह राशि तब तक दी जाती है, जब तक की बच्चा तीन साल का नहीं हो जाता।
रूस भी फैमिली कैपिटल देता है। यह एक निश्चित राशि है, जो बच्चों वाले परिवार अपने घर, शिक्षा आदि के लिए खर्च कर सकते हैं।
तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगान ने साल 2025 को परिवार का साल घोषित किया था। इसके तहत जिन परिवारों में बच्चे होते हैं उनकी आर्थिक मदद की जाती है। फैंमिली इंसेंटिव भी दिए जाते हैं।
दक्षिण कोरिया भी 694 डॉलर हर महीने देता है। यह राशि बच्चे की बच्चे के जन्म के साथ एक साल तक दी जाती है। बच्चे की उम्र बढ़ते ही यह राशि 5 गुना तक बढ़ा दी जाती है।।
जापान भी ऐसा ही देश है जहां बच्चों वाले परिवार के लिए सरकार कई योजनाएं संचालित कर रही है। इसके तहत अलग-अलग चिकित्सा संस्थान प्रसव का खर्च देते हैं। वहीं बच्चे के जन्म से 15 साल की आयु तक माता-पिता को सब्सिडी दी जाती है। तीन साल कम उम्र के बच्चों के लिए- 15000 येन प्रतिमाह, तीन वर्ष की आयु से प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने तक- 10, 000 येन, तीसरे बच्चे के लिए यह राशि 15 हजार येन प्रतिमाह है। वही जूनियर से हाई स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे को भी 10 हजार येन प्रतिमाह दिए जाने का प्रावधान है। शादी के इच्छुक जोडो़ं को 6 लाख येन यानी 4.25 लाख रुपए तक की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
2025 में ताइवान सरकार ने भी एक बच्चे के जन्म पर 3 लाख रुपए की राशि देने का और जुड़वां बच्चे होने पर 6 लाख रुपए देने का ऐलान किया था।