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Parametric Insurance: पाकिस्तान में भारत के इस बीमा योजना की क्यों हो रही चर्चा? जानिए किसे मिल रहा है लाभ

Parametric Insurance: भारत में पैरामीट्रिक मॉडल इंश्योरेंस को लागू करने का प्रयोग चल रहा है। नागालैंड में राज्य सरकार ने 2024 में इस बीमा योजना को लागू किया और एक बड़ी आबादी इससे लाभान्वित भी हुई है। इस बीमा को गुजरात के अहमदाबाद और आसपास के इलाकों में भी कुछ वर्षों से चलाया जा रहा है। आइए यह जानने की कोशिश करते हैं कि इसकी दरकार भारत जैसे देश में कितनी ज्यादा है।

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May 12, 2026
भारत में पैरामीट्रिक मॉडल इंश्योरेंस को लागू करने का प्रयोग चल रहा है।

Parametric Insurance in India: गुजरात के अहमदाबाद और आसपास के क्षेत्रों में महिला मजदूरों और निम्न-आय वर्ग की महिलाओं के बीच हीटवेव इंश्योरेंस की लोकप्रियता बढ़ रही है। इस योजना की ख्याति पाकिस्तान मीडिया की सुर्खियां बन रही हैं। दरअसल, पैरामीट्रिक मॉडल इंश्योरेंस (Parametric Insurance) के तहत महिलाओं और मजदूरों का भीषण गर्मी और मौसम की आपदा के चलते होने वाले नुकसान की भरपाई की जा रही है। गुजरात में यह योजना गैर सरकारी संस्था महिला हाउसिंग ट्रस्ट (Mahila Housing Trust) और गो डिजिट (Go Digit) के सहयोग से चल रहा है, जिसे 'क्लाइमेट रेजिलिएंस फॉर ऑल' पहल का समर्थन प्राप्त है। इस इंश्योरेंस को नागालैंड सरकार ने भी 2024 में लागू कर दिया है।

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क्या होता है पैरामीट्रिक मॉडल इंश्योरेंस?

पैरामीट्रिक मॉडल इंश्योरेंस एक ऐसा बीमा मॉडल है जिसमें नुकसान का सर्वे करने के बजाय पहले से तय मौसम या आपदा के आंकड़ों के आधार पर सीधे भुगतान किया जाता है। मिसाल के तौर पर यदि तापमान 43°C से ऊपर चला जाए या बारिश तय सीमा से ज्यादा या कम हो जाए, या चक्रवात की गति एक निश्चित स्तर पार कर जाए तो इन हालातों में बीमा कंपनी खुद ही मुआवजा जारी कर देती है। इसमें खेत, घर या संपत्ति का अलग-अलग निरीक्षण नहीं करना पड़ता।

हीटवेव में बीमा की छोटी राशि से मिल रही बड़ी राहत

एएफपी में छपी एक रिपोर्ट के अुनसार, लता सोलंकी जो अहमदाबाद में दरवाजे-दरवाजे जाकर कपड़े बेचती है, उसने 2023 में हीटवेव के दौरान काम जारी रखा। लता तब पैरामीट्रिक मॉडल इंश्योरेंस योजना से नहीं जुड़ी थी। वह हीटवेव की चपेट में आ गई और बीमार पड़ गईं। उन्हें 20 दिनों तक घर पर रहना पड़ा, जिसके चलते उन्हें कम से कम 2,000 रुपये की आय का नुकसान हुआ। उन्हें इस योजना के बारे में पता चला और उन्होंने इस योजना से खुद को जोड़ा। अगले वर्ष हीटवेव के दौरान उन्हें बीमा के चलते इस योजना से 750 रुपये प्राप्त हुए। यह राशि भले ही छोटी थी, लेकिन प्रीमियम की लागत से अधिक थी। भारत जैसे देश में जहां ग्रामीण परिवारों की औसत मासिक आय लगभग 10,000 भारतीय रुपये है, वहां 750 रुपये की बीमा के तहत मिलने से बहुत राहत मिली।

हर साल कामकाजी गरीब महिलाओं को होता था आर्थिक नुकसान

एमएचटी की कार्यक्रम प्रबंधक नितल राहुल पटेल ने एएफपी को बताया कि यह विचार अहमदाबाद की महिला श्रमिकों के साथ किए गए सर्वेक्षण और चर्चाओं के बाद सामने आया, जहां तापमान कभी-कभी 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। उन्होंने कहा, 'अहमदाबाद में हर साल बहुत गर्मी पड़ती है। हमने हमने उनके खर्चों का विश्लेषण किया, तो हमें पता चला कि गर्मियों के चार महीनों में उनकी आय 2,000 से 2,500 रुपये तक कम हो जाती थी।'

सिर्फ 354 रुपये में योजना का मिलता है लाभ

यह योजना 2024 में गुजरात की 26,000 महिलाओं के साथ शुरू हुई। उनका 354 रुपये का प्रीमियम “क्लाइमेट रेजिलिएंस फॉर ऑल” द्वारा वहन किया गया। 2025 में इसमें नामांकन बढ़ा, लेकिन तापमान तय सीमा तक नहीं पहुंचा, इसलिए कोई भुगतान नहीं किया गया। इस वर्ष तापमान सीमा घटाकर 42.74 डिग्री सेल्सियस कर दी गई है, और योजना का लक्ष्य 30,000 से अधिक महिलाओं को कवर करना है। यदि तापमान लगातार दो दिनों तक इस सीमा तक पहुंचता है, तो महिलाएं 850 से 2,000 भारतीय रुपये तक के भुगतान की पात्र होंगी। तापमान तय सीमा से ज्यादा और दिनों की संख्या दो से जितना ज्यादा बढ़ेगा बीमा भुगतान की राशि उतनी ज्यादा मिलेगी। इसका आकलन सितंबर में गर्मी के मौसम के अंत में किया जाता है और भुगतान की राशि एकमुश्त दी जाती है। गो डिजिट के अनुसार, कंपनी पिछले दो वर्षों में पैरामीट्रिक इंश्योरेंस के तहत 50,000 से अधिक लोगों को कवर कर चुकी है।

हीटवेव के चलते भारत में 194 अरब डॉलर का नुकसान

लैंसेट में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, 'वर्ष 2024 में भारत ने अत्यधिक गर्मी के कारण लगभग 247 अरब श्रम घंटों का नुकसान झेला। यह नुकसान आर्थिक तौर पर करीब 194 अरब डॉलर के के बराबर है।' वहीं 2023 में गर्मी के कारण श्रमिक क्षमता में कमी से भारत को लगभग 141 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ और 181 अरब श्रम घंटे नष्ट हुए। हीटवेव का सबसे ज्यादा असर कृषि क्षेत्र पर सबसे ज्यादा पड़ा, जबकि निर्माण क्षेत्र दूसरे स्थान पर रहा। पिछले पांच वर्षों में नुकसान के आंकड़े तेजी से बढ़े हैं। 2021 में अत्यधिक गर्मी के कारण भारत में लगभग 167 अरब श्रम घंटों का नुकसान हुआ और अनुमानित आय हानि 159 अरब डॉलर रही। 2022 में यह बढ़कर 191 अरब श्रम घंटे और लगभग 219 अरब डॉलर तक पहुंच गई।

नागालैंड सरकार ने 2024 में शुरू किया पैरामीट्रिक इंश्योरेंस

पैरामीट्रिक इंश्योरेंस को अत्यधिक गर्मी ही नहीं बल्कि भारी वर्षा जैसे जलवायु प्रभावों से सबसे कमजोर लोगों की सुरक्षा का एक तरीका माना जा रहा है। भारत के पूर्वोत्तर राज्य नागालैंड सरकार ने 2024 से पैरामीट्रिक मॉडल के तहत भारी वर्षा से होने वाले आर्थिक नुकसान के खिलाफ पूरी आबादी का बीमा किया है।

प्रभावित लोगों को 1 करोड़ 6 लाख 50 हजार रुपये का मुआवजा

नागालैंड सरकार ने 2024 में पैरामीट्रिक इंश्योरेंस मॉडल के तहत पूरे राज्य की आबादी को कवर करने की पहल की थी। यह योजना नागालैंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NSDMA) और एसबीआई जनरल इंश्योरेंस के बीच समझौते के तहत लागू हुई। इस योजना के तहत मार्च 2025 में पहला दावा निपटाया गया। मॉनसून 2024 के दौरान भारी वर्षा से प्रभावित लोगों के लिए लगभग 1 करोड़ 6 लाख 50 हजार रुपये का मुआवजा स्वीकृत किया गया था। यह राशि प्रभावित लाभार्थियों को डिजिटल भुगतान प्रणाली के माध्यम से वितरित की गई।

यह भारत का पहला बड़ा राज्य-स्तरीय पैरामीट्रिक डिजास्टर इंश्योरेंस मॉडल माना जा रहा है। इसकी खास बात यह है कि इसमें किसी के व्यक्तिगत नुकसान का सर्वे नहीं किया गया, बल्कि मौसम संबंधी डेटा विशेषकर अत्यधिक वर्षा के आधार पर भुगतान दिया गया।

क्या इसे पूरे भारत में लागू किया जा सकता है?

यह योजना अभी कुछ राज्यों में प्रयोग के दौर से गुजर रहा है। केंद्र सरकार इस योजना का लागू करने पर विचार कर रही है। वह इस बात का अध्ययन करवा रही है कि इन योजनाओं का विस्तार किस प्रकार अधिक व्यापक स्तर पर किया जा सकता है। इस बीमा का रक्षा कवर अधिक से अधिक लोगों को मिल पाए।

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