
Monsoon Asthma Triggers : गर्मी के लंबे और उमस भरे दिनों के बाद मानसून की पहली बारिश हर किसी के चेहरे पर मुस्कान ले आती है। मौसम सुहाना हो जाता है और चारों तरफ हरियाली छा जाती है। लेकिन, जहां यह मौसम आम लोगों को राहत देता है, वहीं अस्थमा (Asthma) या दमा के मरीजों के लिए मुश्किलें भी खड़ी कर देता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बारिश के महीनों में अस्थमा के अटैक और सांस से जुड़ी अन्य बीमारियों के मामलों में अचानक 30 से 40 फीसदी की बढ़ोतरी देखी जाती है।
अगर आप या आपके परिवार में कोई अस्थमा से पीड़ित है, तो यह जानना बेहद जरूरी है कि इस मौसम में फेफड़े क्यों कमजोर पड़ने लगते हैं और इनसे बचने के लिए कौन-कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए।
मानसून आते ही ओपीडी में अस्थमा और सांस के मरीजों की संख्या अचानक क्यों बढ़ जाती है? इस मौसम में हवा में ऐसा क्या बदल जाता है?
इस मौसम में वातावरण में क्या बदलता है?
आम तौर पर लोग सोचते हैं कि बाहर बारिश में भीगने से दमा बढ़ता है, लेकिन घर के अंदर मौजूद 'सीलन (Mold)' और 'डस्ट माइट्स' कितने खतरनाक हैं? इनसे कैसे बचें?
अक्सर माना जाता है कि मानसून में बाहर भीगने से अस्थमा बढ़ता है, लेकिन भीगने से सिर्फ अस्थायी सर्दी-जुकाम ही होता है। असली खतरा तो घर के अंदर छिपी सीलन (Mold) और डस्ट माइट्स हैं, जो मरीजों को 24 घंटे बीमार रखते हैं।
सीलन/फफूंद (Mold): नमी के कारण दीवारों और कोनों में 24-48 घंटे में पनप जाती है। इसके बारीक बीजाणु सांस के जरिए फेफड़ों में जाकर तुरंत सूजन और तेज खांसी पैदा करते हैं। एस्परजिलस (Aspergillus) जैसी फफूंद फेफड़ों में गंभीर इन्फेक्शन भी कर सकती है।
डस्ट माइट्स (Dust Mites): ये अदृश्य सूक्ष्म जीव गद्दों, सोफों और कालीनों में लाखों की संख्या में बढ़ते हैं और तेज एलर्जिक रिएक्शन का कारण बनते हैं।
बचाव के 5 क्विक टिप्स:
मानसून के दौरान नियमित रूप से इन्हेलर लेना क्यों जरूरी है?
अस्थमा के मरीजों में यह एक बहुत ही आम प्रवृत्ति है कि जैसे ही उनके लक्षण (खांसी या सांस फूलना) ठीक होते हैं, वे अपना प्रिवेंटिव इन्हेलर (Preventive Inhaler) लेना छोड़ देते हैं। मानसून के दौरान ऐसा करना एक गंभीर अस्थमा अटैक को बुलावा देने जैसा है। इसमें मौजूद स्टेरॉयड सांस की नली की अंदरूनी सूजन को रोज कम करता है, जिससे फेफड़े मजबूत रहते हैं। इनहेलर बंद करने के कुछ दिन बाद तक मरीज को पता नहीं चलता, लेकिन अंदरूनी सूजन वापस आने लगती है। इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना इसे कभी बंद न करें।
मानसून डाइट चार्ट: क्या खाएं, किससे बचें?
यदि किसी मरीज को रात के समय अचानक गंभीर अस्थमा अटैक आ जाए, तो अस्पताल पहुंचने से पहले घर पर क्या 'फर्स्ट एड' या इमरजेंसी स्टेप्स उठाने चाहिए?
'2-2-2' का नियम अपनाएं: पहले 2 पफ दें, 2 मिनट का इंतजार करें और देखें कि क्या सुधार है। आराम न मिलने पर 2 पफ और दें। आपातकाल में डॉक्टर की सलाह के अनुसार 20 मिनट के भीतर अधिकतम 10 पफ तक दिए जा सकते हैं।
नोट: यदि घर पर नेबुलाइजर (Nebulizer) मशीन उपलब्ध है, तो बिना देरी किए तुरंत 1 राउंड नेबुलाइजेशन शुरू कर दें।
बच्चों और बुजुर्गों की इम्युनिटी कमजोर होती है। मानसून में उनके फेफड़ों को सुरक्षित रखने के लिए माता-पिता और तीमारदारों को किन विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए?
बच्चों और बुजुर्गों के फेफड़े मानसून के दौरान मौसम और एलर्जी के प्रति सबसे ज्यादा संवेदनशील होते हैं। उनकी कमजोर इम्युनिटी के कारण संक्रमण (Infections) बहुत तेजी से फैलता है। माता-पिता और तीमारदारों (Caregivers) को इन विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए:
गोल्डन टिप: अगर बच्चे या बुजुर्ग को लगातार सूखी खांसी आ रही हो या सोते समय सांस फूल रही हो, तो इसे सामान्य मौसमी सर्दी न समझें और तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।