
Indian Wolf : बाघ, तेंदुआ, हाथी, चीता, बारहसिंगा जैसे वन्यजीवों के लिए प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व और अभयारण्य के बारे में आपने बहुत सुना होगा। लेकिन भारत में एक ऐसा भी टाइगर रिजर्व है, जो टाइगर, तेंदुआ के लिए नहीं बल्कि भेड़िया (वुल्फ) के लिए देश भर में प्रसिद्ध है। जंगलों का रक्षक माने जाने वाला भेड़िया वीडीटीआर (वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व) की पांच दशक से शान बना हुआ है। वीडीटीआर पूर्व में नौरादेही अभयारण्य के रूप में पहचाना जाता था, लेकिन 2018 में टाइगर्स की शिफ्टिंग के बाद इसको रिजर्व का दर्जा मिल गया।
क्षेत्रफल की दृष्टि से वीडीटीआर प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। 2339 वर्ग किमी के क्षेत्रफल में फैले टाइगर रिजर्व का कोर एरिया 1414 वर्ग किमी है, जबकि बफर एरिया 925 वर्ग किमी है, जो तीन जिलों सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों की सीमाओं में फैला हुआ है। वीडीटीआर के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश सिंह बताते हैं कि साल 1975 में नौरादेही अभयारण्य बना था।
इस दौर में देश भर में कई अभयारण्य बनाए गए थे, जिसमें सागर मध्य प्रदेश से नौरादेही में शामिल था। दिलचस्प बात यह है कि जब इसके लोगो पर काम शुरू हुआ, तो बड़े स्तर पर चर्चा हुई, क्योंकि किस वन्यजीव को प्रदर्शित किया जाए। नौरादेही अभयारण्य खास तौर पर बुंदेलखंड के अधिकांश जंगल में भेड़ियों की संख्या बहुत ज्यादा था। नौरादेही में छोटी घास का विशाल मैदान है। ईको सिस्टम बहुत मजबूत है, जिसके कारण आखिर में नौरादेही अभयारण्य देश का ऐसा पहला वन क्षेत्र बना, जो भेड़ियों के लिए संरक्षित किया गया।
कहते हैं कि किसी भी वन्य जीव को सर्कस या अन्य जगहों पर पालतू जानवर के रूप में देख सकते हैं। कई जगहों पर बाघ, तेंदुआ जैसी प्रजातियां भी पालतू देखी गईं हैं, लेकिन भेड़िया के पालतू होने न होने को लेकर वन्यजीव विशेषज्ञों में अलग-अलग मत है। वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे बताते हैं कि भेड़िया एक प्रकार से श्वान (कुक्कर) प्रजाति का है। इसलिए यह कहना गलत होगा कि वह पालतू नहीं। हां इतना जरूर है कि भेड़ियों के शिकार करने की तकनीक बहुत ही अलग है। वे छोटे वन्यजीव होने के बावजूद बाघ, तेंदुआ, हाथी जैसे बड़े जानवरों को कई बार परेशान कर देते हैं। कई बार उन्हें अपना शिकार तक छोड़ना पड़ता है, क्योंकि भेड़िया बहुत ही योजनाबद्ध तरीके से अपने शिकार या जिससे उन्हें खतरा है, उस पर हमला करते हैं।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि वीडीटीआर में तेंदुओं और बाघों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। वीडीटीआर में तेंदुओं की बसाहट बहुत पहले से है। बफर एरिया में आज भी कुछ गांव स्थापित हैं, जहां आए दिन तेंदुआ के हमले की घटनाएं सामने आती रहीं हैं। वाइल्ड लाइफ एक्टिविटी दुबे का कहना है कि वीडीटीआर में भेड़ियों के दबदबा रहने का मुख्य कारण यही था कि बाघ व तेंदुआ की जंगल में मौजूदगी बहुत ही कम थी। लेकिन अब इनकी संख्या में इजाफ हुआ है। जल्द ही अफ्रीकन चीते भी लाए जा रहे हैं, जिनको रिजर्व की मोहली रेंज में छोड़ा जाना है। इस वजह से अब रिजर्व में भेड़ियों और बाघ, तेंदुओं व चीतों के बीच टकराव की आशंका ज्यादा है। पांच दशक से जंगल पर राज करने वाले भेड़ियों को अब अपने अस्तित्व के लिए लडऩा पड़ सकता है।
वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे बताते हैं कि भेड़िया जंगल का वाकई रक्षक होता है। छोटी घास के मैदान हों या नदी, तालाब के किनारे का क्षेत्र, इनकी मौजूदगी जंगल में हर जगह मिल जाएगी। पारिस्थितिकी तंत्र भेड़िया के कारण ही मजबूती मिलती है। ये सामान्यत: ऐसे वन्यजीवों का शिकार करते हैं, जो वृद्ध हो जाते हैं। बाघ, तेंदुआ की ओर से किए गए शिकार के बाद जो अवशेष बचते हैं, उसको भी यही खत्म करते हैं। सबसे बड़ी बात ये शाकाहारी जानवरों की आबादी को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। शाकाहारी जानवरों की संख्या ज्यादा बढ़ने पर घास, पत्तियों के खत्म होने की आशंका बढ़ जाती है, ऐसे में भेड़िया मजबूत ईकोलॉजी बनाते हैं।
1975 में नौरादेही अभयारण्य की स्थापना के समय इसके लोगो में सिर्फ भेड़िया की तस्वीर थी। सितंबर 2023 में अभयारण्य को टाइगर रिजर्व घोषित किया गया और इसका नया लोगो जारी किया गया, जिसमें भेड़िया के साथ बाघ, हिरण व गिद्ध को शामिल किया गया।
वीडीटीआर में चीता प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है और सॉफ्ट रिलीज बोमा बनकर तैयार हो गए हैं, अक्टूबर-2026 तक यहां अफ्रीकन चीतों की बसाहट भी की जानी है, इसलिए 29 जुलाई 2026 को तीसरी दफा लोगो बदला गया, जिसमें वुल्फ और टाइगर के साथ अफ्रीकन चीता की तस्वीर को भी शामिल किया गया है। वीडीटीआर के जंगल पर पांच दशक से पकड़ बनाए रखने के कारण भारतीय भेड़िया का जलवा 52 साल से लगातार बरकरार है।
वीडीटीआर में भेड़ियों की संख्या का अनुमान आज तक कोई भी विशेषज्ञ नहीं लगा पाया है, लेकिन बताया जाता है कि इनकी संख्या सैकड़ों में है। यही वजह है कि तीन जिलों की सीमाओं में होने के बावजूद वीडीटीआर के जंगल अब भी सुरक्षित हैं। वीडीटीआर में भेड़ियों की मौजूदगी के कारण वन तस्कर भी यहां प्रवेश करने से डरते हैं।
हॉलीवुड में वुल्फ पर दर्जन भर से ज्यादा मूवी बन चुकीं हैं, जिन्हें लोगों की ओर से पसंद भी किया गया। वाइल्ड लाइफ के शौकीन देश भर से वीडीटीआर पहुंचते हैं, लेकिन पूर्व में यहां पर उनके लिए रुकने, खाने-पीने के लिए कोई इंतजाम नहीं थे, जिसके कारण पर्यटकों की संख्या धीरे-धीरे कम होती गई। बीते वर्ष से वाइल्ड लाइफ टूरिज्म पर वीडीटीआर ने तेजी से काम शुरू किया है और बाघ व चीता प्रोजेक्ट के कारण अब वीडीटीआर देश भर में प्रसिद्ध हो गया है, जिसके कारण इस बार 1 अक्टूबर को जैसे ही रिजर्व खुलेगा तो यहां की तस्वीर बदली हुई नजर आएगी।