
World Blood Donor Day 2026 Story : देश को मजदूरों का पसीना सींचता है और अब यही श्रमिक रक्तदान करके देश की तस्वीर भी बदल रहे हैं। डब्ल्यूएचओ (WHO) ने बताया कि असम के डिपो वर्कर ज्ञान चंद जैन (जिन्हें बिल्लू जी के नाम से जाना जाता है) ने पिछले 3 दशकों में 114 बार रक्तदान किया है। इसी तरह राजस्थान के मजदूर अमर सिंह नायक हैं, जो करीब 108 बार खून दान करके लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं। भारत के ये वर्कर ही हैं जिन्होंने खून देकर चीन को इस मामले में पीछे छोड़ दिया है।
आज विश्व रक्तदाता दिवस 2026 पर इन दोनों मजदूरों को दिल से सैल्यूट करना तो बनता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में वार्षिक रक्त संग्रह साल 2023 में 1.26 करोड़ (12.6 मिलियन) यूनिट था, जो बढ़कर 2024 में 1.46 करोड़ (14.6 मिलियन) यूनिट हो गया। 2025 में इसमें और अधिक वृद्धि देखी गई। कुल रक्त संग्रह में स्वैच्छिक रक्तदान की हिस्सेदारी 74.55% रही है, जो जनता की मजबूत भागीदारी को दर्शाती है।
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा 2022 में प्रकाशित और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के 2018 के आंकड़ों के अनुसार, चीन 1,37,0,619 (13.7 मिलियन) यूनिट रक्तदान के साथ दुनिया में पहले स्थान पर था, जबकि भारत 1,24,00,000 (12.4 मिलियन) यूनिट के साथ दूसरे स्थान पर था। हालांकि, भारत ने हालिया वर्षों में तेजी से प्रगति की है और 2024 में भारत का कुल रक्त संग्रह 1.46 करोड़ यूनिट तक पहुंच गया। इस प्रकार, भारत का वर्तमान आंकड़ा चीन के 2018 के रिकॉर्ड (13.7 मिलियन) को पार कर गया है।
अब हम इस मामले में शीर्ष पर हैं। यहां तक पहुंचाने में ज्ञान चंद और अमर जैसे लोगों का योगदान कितना अहम है, यह आपको नीचे समझ आ जाएगा।
डब्ल्यूएचओ ने 12 जून 2026 को जारी एक रिपोर्ट में बताया है कि विश्व स्तर पर रक्तदान की दर देशों की आय के अनुसार काफी भिन्न होती है। प्रति 1000 लोगों पर रक्तदान का औसत इस प्रकार है:
दुनिया भर में कुल 120.4 मिलियन (लगभग 12 करोड़) रक्तदान होते हैं, जिसमें से 36% हिस्सा उच्च आय वाले देशों का है, जबकि वहां दुनिया की सिर्फ 15% आबादी रहती है।
वर्ल्ड बैंक के वर्गीकरण के अनुसार, भारत निम्न-मध्यम आय वाला देश है। यहां की आबादी में ज्ञान चंद और अमर जैसे आम लोग अधिक हैं। सोचिए, आमतौर पर निम्न आय वाले देशों में रक्तदान सबसे कम होता है, उसके बावजूद भी हम आज दुनिया में टॉप पर हैं।
पीआईबी से बातचीत में राष्ट्रीय रक्त आधान परिषद (NBTC) के निदेशक डॉ. कृष्ण कुमार ने बताया, "भारत की रक्त सेवाओं ने एक लंबा सफर तय किया है। मैनुअल रजिस्टर से रियल-टाइम डिजिटल प्लेटफॉर्म तक का बदलाव हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। स्वैच्छिक दान अब केवल एक अभियान नहीं है, यह एक संस्कृति है जिसे हम समुदायों में पोषित कर रहे हैं।"
वहीं, डब्ल्यूएचओ की भारत में प्रतिनिधि, सुश्री पेडेन (Ms Payden) ने कहा, "भारत में रक्त सेवाओं में हुई प्रगति इस बात का प्रमाण है कि राष्ट्रीय नेतृत्व, वैज्ञानिक कठोरता और सामुदायिक भावना के एक साथ आने पर क्या कुछ हासिल किया जा सकता है।"
भारत सरकार का लक्ष्य दिसंबर 2026 तक देश के हर जिले में कम से कम एक ब्लड बैंक स्थापित करना है ताकि हर जगह सुरक्षित रक्त उपलब्ध हो सके और संक्रमण (Zero transfusion-transmitted infections) के मामले शून्य हो जाएं।
सरकार रियल-टाइम डिजिटल ट्रैकिंग के लिए 'ई-रक्तकोष' (eRaktKosh) और 'ब्लड बैंक मैनेजमेंट सिस्टम' (BBMS) को हर जगह लागू कर रही है। साथ ही, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) से लिंक बायोमेट्रिक डोनर पहचान और ब्लड सेंटर्स के लिए हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री (HFR) बनाई जा रही है।
पीआईबी के मुताबिक, अभी भी दुनिया के 59 देशों में 50% से अधिक रक्त आपूर्ति परिवार/रिप्लेसमेंट या पैसे देकर बुलाए गए डोनर्स पर निर्भर है, इसे 100% स्वैच्छिक करने की आवश्यकता है। दुनिया के 10 देश अभी भी दान किए गए रक्त की सभी गंभीर संक्रमणों (जैसे HIV, हेपेटाइटिस) के लिए स्क्रीनिंग नहीं कर पा रहे हैं।
भारत में अभी सभी चालू ब्लड सेंटर्स को पूरी तरह से 'ई-रक्तकोष' और BBMS पर 100% अपडेट करने की आवश्यकता है। इसके अलावा, एडवांस टेस्टिंग (4th Gen Rapid Tests/ELISA/CLIA) की तरफ बढ़ने और रक्त से अलग-अलग घटक (components) निकालने की क्षमता (component-separation capacity) को हर ब्लड बैंक में सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक, सुनीता शर्मा ने कहा, "सुरक्षित रक्त तक पहुंच सुनिश्चित करना केवल एक तकनीकी लक्ष्य नहीं है, यह एक नैतिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य जिम्मेदारी है। स्वेच्छा से दान किए गए रक्त की हर एक यूनिट स्वास्थ्य सेवा में समानता की दिशा में एक कदम है।"
डॉ. राकेश गुप्ता (अतिरिक्त सचिव और महानिदेशक, NACO) ने वीडियो कॉन्फ्रेंस में हर नागरिक के लिए समय पर, सुलभ और सुरक्षित रक्त सुनिश्चित करने के राष्ट्रीय लक्ष्य को दोहराते हुए 'जीरो ट्रांसफ्यूजन-ट्रांसमिटेड इंफेक्शंस' (TTI) की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।
अब आपकी बारी है। आइए, रक्तदान करते हैं। आप हमें कमेंट करके बताइए कि आपने अब तक कितनी बार ब्लड डोनेट किया है।