
Brain Fog: अगर आपको लंबे समय से दिमाग सुस्त लगना, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी, शब्द याद न आना या छोटी-छोटी बातें भूलने जैसी समस्या रहती है, तो इसे सिर्फ तनाव या नींद की कमी समझकर नजरअंदाज करना सही नहीं होगा। एक नई रिसर्च में वैज्ञानिकों ने पाया है कि गंभीर और लंबे समय तक रहने वाले ब्रेन फॉग के कुछ जैविक संकेत हंटिंगटन डिजीज में दिखने वाले बदलावों से मेल खाते हैं।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह समानता मस्तिष्क की कोशिकाओं के काम करने के तरीके और सूजन (न्यूरो-इन्फ्लेमेशन) से जुड़ी हो सकती है। हालांकि विशेषज्ञ साफ कहते हैं कि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि हर ब्रेन फॉग वाला व्यक्ति हंटिंगटन डिजीज से ग्रस्त है। यह केवल दोनों स्थितियों के बीच संभावित जैविक संबंध की ओर इशारा करता है।
हंटिंगटन डिजीज एक दुर्लभ और आनुवंशिक न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी है। इसमें दिमाग की तंत्रिका कोशिकाएं धीरे-धीरे नष्ट होने लगती हैं, जिससे व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता, व्यवहार और शरीर की गतिविधियां प्रभावित होती हैं। विशेषज्ञ इसे कई बार डिमेंशिया और मोटर न्यूरॉन डिजीज जैसी समस्याओं का मिश्रण भी बताते हैं, क्योंकि इसमें मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की गंभीर परेशानियां देखने को मिलती हैं।
शोध में लंबे समय तक ब्रेन फॉग और अत्यधिक थकान से जूझ रहे लोगों की संज्ञानात्मक (कॉग्निटिव) क्षमता का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि इन लोगों में सूचना प्रोसेस करने की गति, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता और मानसिक प्रतिक्रिया में वही तरह की धीमापन दिखाई दिया, जो हंटिंगटन डिजीज के शुरुआती चरणों में देखा जाता है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर ब्रेन फॉग के पीछे काम कर रहे जैविक कारणों को बेहतर तरीके से समझा गया, तो भविष्य में न्यूरोलॉजिकल बीमारियों की शुरुआती पहचान और इलाज के नए रास्ते खुल सकते हैं। फिलहाल इस संबंध की पुष्टि के लिए और व्यापक अध्ययन की जरूरत है।
ध्यान दें अगर आपको भी लगता है कि आप भूलने लगे हैं, नाम याद रखने या निर्णय लेने में परेशानी हो रही है, ध्यान केंद्रित नहीं हो पा रहा है, तो इन बदलावों को भूलकर भी नजर अंदाज न करें। बल्कि अपने डॉक्टर से संपर्क करें, शुरुआत में रोग पकड़े जाएं तो उनका उपचार आसान हो जाता है।