
चीन की ‘गोल्ड शॉक’ नीति जिसकी हाल ही में चर्चा हुई है। इसको लेकर वास्तव में कोई स्पष्ट नाम या आधिकारिक घोषणा नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक रुझान और रणनीतिक बदलाव का संकेत है, जिसमें चीन ने सोने के बाजार में अपनी भूमिका और खरीद को बढ़ाया है। हम इस रुझान को समझने का प्रयास करेंगे, साथ ही यह भी देखेंगे कि इसका भारत पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।
चीन के केंद्रीय बैंक, पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (PBoC), ने मई 2026 में 10 टन सोना खरीदा जो दिसंबर 2024 के बाद सबसे बड़ी मासिक खरीद थी जिससे उसका आधिकारिक सोना भंडार 2,332 टन हो गया, जो उसके विदेशी मुद्रा भंडार का लगभग 9% है। यह लगातार 19वां महीना था जब PBoC ने सोने की खरीद की, और इस अवधि में कुल 67 टन सोना जोड़ा गया।
साथ ही, चीन ने अप्रैल 2026 में 157 टन सोने का आयात किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 40% अधिक था और मार्च 2024 के बाद सबसे अधिक मासिक आयात था।
दूसरी ओर, Q2 2026 में चीन में सोने की मांग (ज्वेलरी, बार, ETF आदि मिलाकर) 155 टन रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में 41% कम थी - यह 2022 के बाद का सबसे कमजोर दूसरी तिमाही का प्रदर्शन था।
आंकड़ों के अनुसार चीन के केंद्रीय बैंक के पास लगभग 2,366 टन (यानी 2.3 लाख किलो से अधिक) सोने का भंडार है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट बताती है, चीन दुनिया के सबसे बड़े स्वर्ण भंडार वाले देशों में शामिल है।
इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि चीन ने सोने को सुरक्षित निवेश और विदेशी मुद्रा भंडार के रूप में मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं - यही रुझान ‘गोल्ड शॉक’ के रूप में देखा जा सकता है।
भारत, जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता देश है, चीन के इस रुझान से अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो सकता है। हाल ही में भारत ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया है - यह जुलाई 2024 में की गई कटौती को पूरी तरह पलटने जैसा कदम है। इस कदम का उद्देश्य विदेशी मुद्रा भंडार को बचाना और रुपये पर दबाव कम करना था।
इस नीति के बाद भारत में सोने की कीमतों में तेजी आई और घरेलू बाजार में डिस्काउंट रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया - कुछ स्थानों पर औपचारिक घरेलू कीमतों से $207 प्रति औंस तक की छूट देखने को मिली। इससे मांग धीमी हो गई, विशेषकर आभूषण खरीद में, जबकि निवेशकों ने पुरानी ज्वेलरी बेचकर आपूर्ति बढ़ाई।
भारत में सोने की कुल मांग Q2 2026 में शुल्क वृद्धि की वजह से 6% घटकर 131.4 टन रह गई, जबकि इससे पहले Q1 2026 में सोने के ETF में रिकॉर्ड 20 टन का शुद्ध निवेश हुआ था।
इसके अलावा, भारत का सोना आयात बिल 2025–26 में लगभग $71.9 बिलियन रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 24% अधिक था।
चीन की बढ़ती खरीद और भारत की कड़ी नीति - दोनों मिलकर वैश्विक सोने की आपूर्ति और कीमतों पर असर डाल सकते हैं। चीन की खरीद से अंतरराष्ट्रीय कीमतों में स्थिरता आ सकती है, जबकि भारत में कड़े नियमों से घरेलू मांग दब सकती है।
‘गोल्ड शॉक’ नीति का अर्थ और भारत के लिए मायने
यह स्पष्ट है कि चीन की नीति - चाहे वह सोने की खरीद में तेजी हो या आयात में वृद्धि - एक रणनीतिक कदम है, जो उसे वैश्विक वित्तीय अस्थिरता के समय सुरक्षित स्थिति में रखता है। भारत के लिए इसका अर्थ है:
यदि चीन लगातार सोने की खरीद जारी रखता है, तो यह वैश्विक सोने की कीमतों को स्थिर कर सकता है और इसे एक सुरक्षित निवेश विकल्प बना सकता है। वहीं, भारत को सोने की आयात नीति में संतुलन बनाना होगा, ताकि घरेलू मांग और व्यापार घाटे दोनों का ध्यान रखा जा सके।
अगर आप निवेशक हैं या सोने से जुड़े व्यवसाय में हैं, तो अंतरराष्ट्रीय रुझानों पर नजर रखें - विशेषकर चीन की खरीद और भारत की नीति में बदलाव पर। घरेलू बाजार में सोने की कीमतों और उपलब्धता पर प्रभाव को समझें और अपनी योजना उसी अनुसार बनाएं।