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चेन्नई से पुडुचेरी तक पानी पर दौड़ेगी ‘मेट्रो’? 200 किमी के समुद्री कॉरिडोर में कितना दम

Chennai Puducherry Water Metro : चेन्नई से पुडुचेरी के बीच 200 किमी लंबे समुद्री कॉरिडोर और बकिंघम नहर पर वाटर मेट्रो (Water Metro) की संभावना तलाशी जा रही है। जानिए इस महत्वाकांक्षी परियोजना की सच्चाई, चुनौतियां और इससे होने वाले फायदे।
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Chennai Puducherry Water Metro

Chennai Puducherry Water Metro : क्या है चेन्नई वाटर मेट्रो प्रोजेक्ट, PC- Chatgpt

चेन्नई और पुडुचेरी के बीच सड़क और रेल के अलावा अब पानी के रास्ते यात्री परिवहन की संभावना तलाशा जा रही है। तमिलनाडु सरकार ने एन्नोर से पुडुचेरी तक करीब 200 किलोमीटर लंबे समुद्री संपर्क कॉरिडोर की योजना सामने रखी है। इसी के साथ एन्नोर से मामल्लपुरम तक बकिंघम नहर के रास्ते Water Metro जैसी सेवा शुरू करने की व्यवहार्यता भी जांची जा रही है। यानी अभी यह कोई तैयार परियोजना नहीं, बल्कि अध्ययन और योजना के चरण में है।

यही इस कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा है। 200 किमी का समुद्री कॉरिडोर और एन्नोर-मामल्लपुरम Water Metro एक ही परियोजना नहीं हैं, लेकिन दोनों को तटीय परिवहन के बड़े नेटवर्क के रूप में देखा जा रहा है।

सबसे पहले समझिए क्या बनने जा रहा है?

तमिलनाडु के राज्य राजमार्ग और छोटे बंदरगाह विभाग ने एन्नोर से मामल्लपुरम होते हुए पुडुचेरी तक करीब 200 किमी का समुद्री संपर्क विकसित करने की योजना बताई है। इसके साथ इसी मार्ग पर यात्री नौका सेवा शुरू करने की संभावना भी तलाशने की बात कही गई है। इसके लिए केंद्र के पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय तथा पुडुचेरी सरकार के साथ समन्वय किया जाना है।

दूसरी तरफ चेन्नई मेट्रो रेल लिमिटेड ने एन्नोर से मामल्लपुरम तक बकिंघम नहर के किनारे Water Metro की व्यवहार्यता जांचने के लिए विस्तृत अध्ययन शुरू किया है। इसमें मार्ग, तकनीक, लागत, वित्तीय मॉडल और पर्यावरणीय-सामाजिक प्रभावों का अध्ययन किया जाएगा।

इसलिए फिलहाल इसे 'चेन्नई-पुडुचेरी Water Metro' कहना जल्दबाजी होगी। सही तस्वीर यह है कि सरकार पानी आधारित यात्री परिवहन की संभावना को परख रही है।

200 किलोमीटर का यह कॉरिडोर क्यों महत्वपूर्ण है?

चेन्नई महानगर तेजी से फैल रहा है और दक्षिण में मामल्लपुरम तथा आगे पुडुचेरी तक तटीय इलाका आर्थिक और पर्यटन गतिविधियों का बड़ा क्षेत्र है। अगर समुद्री परिवहन सफल होता है तो सड़क पर निर्भरता को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

प्रस्तावअभी स्थितिमुख्य उद्देश्य
एन्नोर–मामल्लपुरम वाटर मेट्रोव्यवहार्यता अध्ययन जारीयात्री परिवहन को बढ़ावा देना
एन्नोर–पुडुचेरी समुद्री कॉरिडोरयोजना/संभाव्यता चरण मेंतटीय क्षेत्रों के बीच बेहतर संपर्क
बकिंघम नहरपुनर्जीवन और विकास की आवश्यकताजल परिवहन नेटवर्क का आधार बनाना
समुद्री यात्री सेवासंभावना की जांच जारीचेन्नई–पुडुचेरी के बीच यात्री संपर्क स्थापित करना

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अभी परियोजना की अंतिम लागत और यात्री क्षमता तय नहीं हुई है। ये आंकड़े विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट और DPR के बाद ही विश्वसनीय तरीके से सामने आएंगे। CMRL का अध्ययन इन्हीं पहलुओं लागत, वित्तीय मॉडल, मार्ग और सामाजिक-पर्यावरणीय प्रभाव को तय करने के लिए है।

बकिंघम नहर क्यों बन सकती है इस योजना की रीढ़?

चेन्नई की बकिंघम नहर कभी तटीय परिवहन का महत्वपूर्ण जलमार्ग थी, लेकिन समय के साथ इसमें गाद, अतिक्रमण, प्रदूषण और जल प्रवाह से जुड़ी समस्याएं बढ़ीं। अब इसी पुराने जलमार्ग को नए परिवहन नेटवर्क के हिस्से के रूप में देखने की कोशिश हो रही है।

केंद्र सरकार ने बकिंघम नहर को National Waterway-4 का हिस्सा माना है। फरवरी 2026 में केंद्र ने लोकसभा में बताया कि तमिलनाडु के प्रमुख राष्ट्रीय जलमार्गों के लिए व्यवहार्यता अध्ययन पूरे हो चुके हैं और NW-4 के DPR को अपडेट करने के लिए ₹5.23 करोड़ मंजूर किए गए हैं।

इसके अलावा सरकार पहले ही बकिंघम नहर के अलग-अलग हिस्सों में जेट्टी विकसित करने की योजना बता चुकी है। इसमें महाबलीपुरम-एडियूर ब्रिज, कूम नदी के पास का हिस्सा, पुलिकट झील और एन्नोर पोर्ट से ETPS तक का क्षेत्र शामिल है।

यानी नहर को केवल पर्यटन के लिए नहीं, बल्कि कार्गो और यात्री जल परिवहन दोनों के लिए इस्तेमाल करने की संभावना देखी जा रही है।

लेकिन सबसे बड़ी चुनौती नहर की हालत

Water Metro का सपना सुनने में आसान है, लेकिन इसके पीछे सबसे मुश्किल काम पानी का रास्ता तैयार करना होगा। अगर बकिंघम नहर में नियमित यात्री नाव चलानी है तो कई जगहों पर जरूरी होगा।

  • नहर की सफाई और गाद हटाना
  • पर्याप्त जल गहराई बनाए रखना
  • संकरे हिस्सों को सुधारना
  • जेट्टी और टर्मिनल बनाना
  • पुलों के नीचे पर्याप्त ऊंचाई सुनिश्चित करना
  • जल प्रदूषण नियंत्रित करना
  • अतिक्रमण हटाना
  • मानसून और बाढ़ के दौरान जलस्तर का प्रबंधन

इसलिए नाव खरीदना इस परियोजना का सबसे बड़ा खर्च नहीं होगा; पूरा जलमार्ग तैयार करना ज्यादा बड़ी चुनौती हो सकती है।CMRL के अध्ययन में भी बकिंघम नहर का पुनरुद्धार इस परियोजना की प्रमुख चुनौतियों में शामिल बताया गया है।

क्या यह मुंबई या कोच्चि की Water Metro जैसी होगी?

यहां एक जरूरी अंतर समझना होगा। मुंबई में जल परिवहन का बड़ा आधार समुद्री और खाड़ी मार्ग हैं, जबकि चेन्नई की प्रस्तावित व्यवस्था में नहर आधारित और तटीय दोनों तरह के जलमार्ग की भूमिका हो सकती है।

भारत में सबसे स्पष्ट उदाहरण कोच्चि Water Metro का है, जहां शहर और आसपास के द्वीपों को आधुनिक इलेक्ट्रिक नौकाओं के जरिए जोड़ने की व्यवस्था विकसित की गई है।

चेन्नई में भी भविष्य में ऐसी ही अवधारणा अपनाई जा सकती है, लेकिन अभी यह तय नहीं हुआ है कि कौन-सी नावें चलेंगी, कितने यात्री बैठेंगे, कितने टर्मिनल होंगे और किराया कितना होगा। यानी फिलहाल कोच्चि को सीधे चेन्नई का मॉडल मानना सही नहीं होगा।

यात्री कितने होंगे और टिकट कितना?

यही वह सवाल है जिसका जवाब अभी नहीं है। CMRL ने जो अध्ययन शुरू कराया है, उसमें Market Analysis, लागत और वित्तीय मॉडल जैसे पहलुओं का आकलन होना है। इसलिए फिलहाल यात्री क्षमता, किराया, फेरे और टिकट दरों को लेकर कोई अंतिम सरकारी आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

DPR आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कितने यात्री रोज यात्रा करेंगे → कितनी नावें चाहिए → कितने टर्मिनल बनेंगे → कितनी लागत आएगी → किराया कितना होगा। यही वजह है कि अभी हजार करोड़ की कोई लागत या प्रतिदिन लाखों यात्रियों की क्षमता बताना अनुमान होगा, तथ्य नहीं।

सड़क के मुकाबले क्या फायदा?

अगर जल परिवहन सफल हुआ तो इसका सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि सड़क पर बढ़ते यातायात का एक हिस्सा पानी की तरफ शिफ्ट हो। खासकर उन लोगों के लिए यह उपयोगी हो सकता है जो चेन्नई के उत्तरी और दक्षिणी तटीय इलाकों के बीच यात्रा करते हैं। इसके अलावा पर्यटन को भी फायदा मिल सकता है।

संभावित फायदे

  • सड़क पर यातायात का दबाव कम हो सकता है।
  • तटीय पर्यटन को नया विकल्प मिलेगा।
  • मामल्लपुरम जैसे पर्यटन केंद्रों की पहुंच बेहतर हो सकती है।
  • नहर के आसपास नए जेट्टी और स्थानीय कारोबार विकसित हो सकते हैं।
  • जलमार्ग का इस्तेमाल यात्री और कुछ जगहों पर माल ढुलाई के लिए हो सकता है।
  • भूमि अधिग्रहण की जरूरत कुछ हिस्सों में सड़क परियोजना की तुलना में कम हो सकती है।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सड़क और रेल की जरूरत खत्म हो जाएगी। जल परिवहन पूरक परिवहन व्यवस्था ज्यादा होगा।

पर्यावरण का सवाल भी उतना ही बड़ा

यह परियोजना समुद्र, नहर, आर्द्रभूमि और तटीय पारिस्थितिकी से जुड़े क्षेत्रों से होकर गुजर सकती है। इसलिए पर्यावरणीय प्रभाव इसका महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। पुडुचेरी में भी तटीय क्षेत्र के लिए अलग पर्यावरणीय नियामक व्यवस्था है और वहां करीब 45 किमी समुद्र तट तथा 192 किमी ज्वारीय प्रभाव वाले जल निकाय दर्ज हैं।

इसलिए किसी भी बड़े तटीय जल परिवहन नेटवर्क में यह देखना होगा कि:

  • मैंग्रोव और आर्द्रभूमि प्रभावित न हों
  • नावों से जल प्रदूषण न बढ़े
  • नहर की सफाई से प्राकृतिक पारिस्थितिकी को नुकसान न हो
  • तटीय कटाव न बढ़े
  • मछुआरों की आजीविका प्रभावित न हो
  • बंदरगाह और जेट्टी निर्माण का स्थानीय असर कितना होगा

यानी तेज परिवहन और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन इस परियोजना की सफलता की बड़ी शर्त होगी।

क्या 200 किमी का सफर पानी से सड़क से तेज होगा?

जरूरी नहीं। यह परियोजना तभी सफल होगी जब जल परिवहन का समय, किराया और आवागमन की सुविधा यात्रियों के लिए प्रतिस्पर्धी हो। उदाहरण के लिए अगर किसी यात्री को पहले बस/मेट्रो से जेट्टी तक पहुंचना पड़े, फिर नाव का इंतजार करना पड़े और उसके बाद दूसरे साधन से गंतव्य तक जाना पड़े, तो कुल यात्रा समय बढ़ सकता है। इसलिए सिर्फ 'पानी का रास्ता छोटा है' पर्याप्त नहीं है। जरूरी होगा कि जेट्टी को मेट्रो, बस और रेलवे नेटवर्क से जोड़ा जाए। यही कारण है कि भविष्य में इसकी सबसे बड़ी ताकत मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी हो सकती है।

असली सवाल: क्या चेन्नई को पानी पर नई सवारी मिल पाएगी?

फिलहाल जवाब है-संभावना है, लेकिन अभी फैसला नहीं हुआ है। अभी परियोजना व्यवहार्यता के चरण में है। CMRL के अध्ययन में करीब आठ महीने लग सकते हैं, जिसके बाद यह तय करने में मदद मिलेगी कि एन्नोर-मामल्लपुरम जलमार्ग तकनीकी और आर्थिक रूप से कितना व्यवहार्य है।

इस परियोजना की कहानी इसलिए दिलचस्प है क्योंकि यहां एक साथ तीन पुराने और नए इंफ्रास्ट्रक्चर जुड़ रहे हैं- पुरानी बकिंघम नहर + नया Water Metro विचार + एन्नोर-पुडुचेरी तटीय संपर्क।

अगर नहर को आधुनिक जलमार्ग में बदला जा सका, जेट्टी और टर्मिनल बनाए गए और मेट्रो-बस-रेल से उनका अच्छा जुड़ाव हुआ, तो चेन्नई के परिवहन नक्शे पर पहली बार पानी एक वास्तविक सार्वजनिक परिवहन विकल्प बन सकता है।