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क्या सच में बांस का चावल होता है? इंटरनेट पर छिड़ी बहस का पूरा सच जानिए

क्या आपने कभी सुना है बांस के चावल के बारे में? ये अनोखा अनाज न केवल स्वादिष्ट है, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है!
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भारत

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Ravi Gupta

Aug 19, 2026

bas ka chawal

प्रतीकात्मक तस्वीर | Gemini AI

बांस का चावल सच में होता है या कोई मिथक है? दरअसल, इंटरनेट पर एक वीडियो पोस्ट किया जिसके बाद इसको लेकर बहस छिड़ी है। आइए, हम जानते हैं कि वाकई बांस का चावल होता है क्या?

वास्तव में यह एक दुर्लभ और पौष्टिक अनाज है, जो भारत के कुछ विशेष क्षेत्रों में ही पाया जाता है। आइए विस्तार से समझते हैं कि यह क्या है, इसका इतिहास क्या है, इसमें कौन-कौन से पोषक तत्व होते हैं, और भारत में यह कहां-कहां मिलता है।

बांस का चावल क्या है और इसका इतिहास

बांस का चावल, जिसे “मुलयारी” के नाम से भी जाना जाता है, वास्तव में बांस के पेड़ के फूलने के बाद बनने वाले बीज होते हैं। जब बांस अपनी जीवन अवधि पूरी कर फूलता है, तो उसके तनों में छोटे-छोटे दाने जैसे बीज बनते हैं, जिन्हें बांस का चावल कहा जाता है।

यह प्रक्रिया कई वर्षों में एक बार होती है - कुछ रिपोर्टों में इसे 60 वर्ष तक बताया गया है। इसलिए यह चावल नियमित रूप से उपलब्ध नहीं होता और इसकी उपलब्धता बहुत सीमित रहती है।

भारत में कहां मिलता है

वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि बांस का चावल विशेष रूप से दक्षिण-पश्चिमी घाटों में आदिवासी समुदायों द्वारा संग्रहित और उपयोग किया जाता है। केरल के वायनाड, कर्नाटक के कोडागु और बेरंबाडी राज्य वन, तमिलनाडु के नीलगिरी जिले (गुडालूर) जैसे क्षेत्रों में यह चावल मिलता है। यह जंगलों में रहने वाले आदिवासियों के लिए आय का एक स्रोत भी है।

इसके अलावा, यह “Sri Saraswathi Organics”, “B&B Organics”, “Daivik Organic” जैसे ऑनलाइन ऑर्गेनिक स्टोर्स पर भी सीमित मात्रा में उपलब्ध है।

हालांकि, इसकी उपलब्धता सीमित होने के कारण इसे नियमित आहार में शामिल करना आसान नहीं है। ऑनलाइन स्टोर्स पर यह महंगा भी मिलता है, जैसे 500 ग्राम के लिए ₹350–₹480 तक कीमत होती है।

पोषक तत्व और स्वास्थ्य लाभ

वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि बांस का चावल पोषक तत्वों से भरपूर होता है। एक अध्ययन (ScienceDirect, जून 2023) के अनुसार, बांस के चावल में प्रोटीन की मात्रा लगभग 14.66 ± 0.58 ग्राम/100 ग्राम और कुल आहार फाइबर लगभग 6.98 ± 0.19 ग्राम/100 ग्राम होती है, जो ब्राउन और पॉलिश्ड चावल से अधिक है। इसमें जिंक (3.38 ± 0.13 मि.ग्रा./100 ग्राम), आयरन (4.47 ± 2.31 मि.ग्रा./100 ग्राम), कॉपर (1.16 ± 0.15 मि.ग्रा./100 ग्राम), कैल्शियम (21.38 ± 2.60 मि.ग्रा./100 ग्राम), विटामिन B2 (0.18 ± 0.01 मि.ग्रा./100 ग्राम) और B5 (0.92 ± 0.01 मि.ग्रा./100 ग्राम) भी अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं।

साथ ही, इसमें फाइटिक एसिड (जो खनिजों के अवशोषण में बाधा डालता है) की मात्रा कम होती है, जिससे खनिजों का अवशोषण बेहतर होता है।

एक अन्य अध्ययन (Indian Journal of Pharmaceutical Sciences, 2024) में बांस के चावल की फैटी एसिड प्रोफाइल, अमीनो एसिड, फाइटोस्टेरॉल, पॉलीफेनोल और एंटीऑक्सिडेंट क्षमता का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि इसमें संतृप्त, मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड क्रमशः 36.97 ± 6.01%, 28.59 ± 2.01% और 34.44 ± 6.22% हैं। कुल अमीनो एसिड की मात्रा 96.76 ग्राम/100 ग्राम प्रोटीन थी, जिसमें आवश्यक अमीनो एसिड 38.67 ग्राम/100 ग्राम थे, और लाइसिन सबसे सीमित अमीनो एसिड था।

इसमें फाइटोस्टेरॉल्स (जैसे एर्गोस्टेरॉल और बीटा-साइटोस्टेरॉल) और कई पॉलीफेनोल्स (जैसे कैटेचिन, प्रोटोकेटचुइक एसिड, सिनेपिक एसिड आदि) भी अधिक मात्रा में पाए गए, जो एंटीऑक्सिडेंट गतिविधि में सहायक हैं।

पोषक तत्व / घटकमात्रा (प्रति 100 ग्राम)
प्रोटीनलगभग 14.66 ग्राम
कुल आहार फाइबरलगभग 6.98 ग्राम
जिंकलगभग 3.38 मि.ग्रा.
आयरनलगभग 4.47 मि.ग्रा.
कॉपरलगभग 1.16 मि.ग्रा.
कैल्शियमलगभग 21.38 मि.ग्रा.
विटामिन B2लगभग 0.18 मि.ग्रा.
विटामिन B5लगभग 0.92 मि.ग्रा.
फैटी एसिड (संतृप्त)लगभग 36.97%
फैटी एसिड (मोनोअनसैचुरेटेड)लगभग 28.59%
फैटी एसिड (पॉलीअनसैचुरेटेड)लगभग 34.44%
कुल अमीनो एसिडलगभग 96.76 ग्राम
आवश्यक अमीनो एसिडलगभग 38.67 ग्राम (लाइसिन सीमित)
पॉलीफेनोल्स और फाइटोस्टेरॉल्सउच्च मात्रा में (कैटेचिन, एर्गोस्टेरॉल आदि)

उपयोग और सावधानियां

बांस का चावल स्वाद में गेहूं जैसा होता है और पकने पर हल्का हरा रंग तथा चिपचिपापन दिखाता है। यह मधुमेह रोगियों के लिए भी उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है।

बांस का चावल एक दुर्लभ, लेकिन पौष्टिक अनाज है, जिसे मुख्य रूप से दक्षिण-पश्चिमी घाटों में आदिवासी समुदायों द्वारा संग्रहित किया जाता है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, खनिज, विटामिन और एंटीऑक्सिडेंट्स की अच्छी मात्रा होती है, और फाइटिक एसिड कम होने के कारण पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर होता है। हालांकि इसकी उपलब्धता सीमित और महंगी है, लेकिन स्वास्थ्य के लिहाज से यह एक मूल्यवान विकल्प हो सकता है। यदि आप इसे आहार में शामिल करना चाहें, तो विश्वसनीय ऑनलाइन स्रोतों या स्थानीय आदिवासी बाजारों से सीमित मात्रा में खरीद सकते हैं।

यदि आप इसे नियमित रूप से उपयोग करना चाहें, तो स्थानीय कृषि विभाग या आदिवासी उत्पादों के विक्रेताओं से संपर्क कर इसकी उपलब्धता और मूल्य की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।