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बढ़ेगी नौसेना की ताकत: युद्धपोतों के लिए ब्रह्मोस लॉन्चर और फायर कंट्रोल सिस्टम की डील, समुद्र और जमीनी लक्ष्य पर होगा सटीक प्रहार

रक्षा मंत्रालय ने ब्रह्मोस के फायर कंट्रोल सिस्टम व लॉन्चर की खरीद के लिए करार किया है। यह कदम भारतीय नौसेना की समुद्री मारक क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है।
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Oct 06, 2026
BrahMos launcher deal
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के युद्धपोतों की समुद्री मारक क्षमता बढ़ाने के लिए मंगलवार यानि 6 अक्टूबर 2026 को ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड (BAPL) के साथ ₹661.50 करोड़ का अनुबंध किया। इसके तहत नौसेना के जहाजों के लिए ब्रह्मोस फायर कंट्रोल सिस्टम और लॉन्चर खरीदे जाएंगे। अनुबंध पर रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में दिल्ली में हस्ताक्षर हुए।

क्या है रक्षा मंत्रालय की डील?

यह सौदा 'Buy (Indian-IDDM)' श्रेणी में हुआ है। IDDM का मतलब भारत में डिजाइन, विकसित और निर्मित (Indigenously Designed, Developed and Manufactured) है। रक्षा मंत्रालय के बयान के अनुसार परियोजना में कम से कम 68 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री होगी। इसमें कई सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) समेत भारतीय उद्योगों की भागीदारी रहेगी।

मंत्रालय के मुताबिक परियोजना से तीन वर्ष की अवधि में रोजगार के अवसर बनेंगे। मंत्रालय ने बताया कि युद्धपोतों पर लगी ब्रह्मोस प्रणाली नौसेना की प्रमुख सतह-से-सतह मिसाइल प्रणाली है, जो समुद्री हमले के अभियानों में काम आती है। यह जमीन और समुद्र के लक्ष्यों को सुपरसोनिक गति से, सटीकता और विस्तारित दूरी पर भेद सकती है। इसकी मानक मारक दूरी 290 किलोमीटर तक है। विस्तारित-रेंज संस्करण 400 किलोमीटर से अधिक तक मार कर सकते हैं।

फायर कंट्रोल सिस्टम और लॉन्चर का मतलब

लॉन्चर वह ढांचा है, जिससे मिसाइल दागी जाती है। फायर कंट्रोल सिस्टम वह तंत्र है जो लक्ष्य की जानकारी लेकर मिसाइल को दागने से पहले तैयार करता है और उसे लक्ष्य की ओर निर्देशित करता है। दोनों के बिना मिसाइल जहाज पर होते हुए भी असरदार नहीं हो सकती है। दूसरे शब्दों में कहें तो इन दोनों के बगैर मिसाइल को दागा नहीं जा सकता है।

क्या है रक्षा अनुबंध?

यह अनुबंध मिसाइलों की खरीद नहीं है। मार्च 2024 में रक्षा मंत्रालय ने ब्रह्मोस एयरोस्पेस से विस्तारित रेंज की ब्रह्मोस मिसाइलों के लिए ₹19,518.65 करोड़ का अनुबंध किया था। उसी समय जहाज पर तैनात ब्रह्मोस प्रणाली के लिए ₹988.07 करोड़ का एक और अनुबंध हुआ था। PIB के अनुसार वे कुल ₹39,125.39 करोड़ के 5 अनुबंधों का हिस्सा थे। नया करार इन्हीं मिसाइलों को जहाजों पर चलाने वाले तंत्र की खरीद से जुड़ा है।

भारत को क्या फायदा होगा?

  1. नौसेना की मारक क्षमता: नए लॉन्चर और फायर कंट्रोल सिस्टम से अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों पर ब्रह्मोस की तैनाती और संचालन बेहतर होने की उम्मीद है। इससे जहाज दूर के समुद्री और जमीनी लक्ष्य पर तेज और सटीक प्रहार कर सकेंगे।
  2. हिंद महासागर में मजबूती: रक्षा विशेषज्ञ हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए ऐसी क्षमताओं को अहम मानते हैं।
  3. आत्मनिर्भरता: IDDM श्रेणी में खरीद से विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता घटाने और घरेलू रक्षा उत्पादन बढ़ाने की नीति आगे बढ़ती है।
  4. MSME और रोजगार: आपूर्ति शृंखला में छोटे उद्योगों की भागीदारी से तीन साल में रोजगार बनने की संभावना है, जैसा मंत्रालय ने कहा है।
  5. तकनीकी क्षमता: अत्याधुनिक सैन्य उपकरणों के निर्माण में घरेलू उद्योग की भूमिका बढ़ने से देश की रक्षा-औद्योगिक क्षमता मजबूत होती है।

ब्रह्मोस की पृष्ठभूमि

ब्रह्मोस एयरोस्पेस भारत के DRDO और रूस की NPO मशीनोस्त्रोयेनिया का संयुक्त उपक्रम है। नेवल टेक्नोलॉजी के अनुसार यह दो चरणों वाली सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। यह करीब मैक-3 की गति हासिल कर सकती है। यह 'दागो और भूल जाओ' सिद्धांत पर काम करती है। नौसेना इसे 2005 से इस्तेमाल कर रही है और इसे जहाज, पनडुब्बी, विमान और जमीन से दागा जा सकता है।

Updated on:
06 Oct 2026 05:02 pm
Published on:
06 Oct 2026 05:02 pm