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FTA का असर: आसियान का निर्यात 61% उछला, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत के निर्यात में आई तेजी

वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मुक्त व्यापार समझौते (FTA) वाले साझेदार देशों को भारत के निर्यात में तेज बढ़ोतरी हुई है। सिंगापुर और श्रीलंका को निर्यात दोगुने से अधिक बढ़ा है, जबकि आसियान देशों को निर्यात में 60 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है।
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Sep 20, 2026
Fta impact asean exports surge
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) में भारत के मुक्त व्यापार समझौते (FTA) वाले साझेदार देशों को निर्यात में तेज उछाल दर्ज किया गया है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, सिंगापुर और श्रीलंका को निर्यात इस दौरान दोगुने से भी अधिक बढ़ गया, जबकि आसियान देशों को निर्यात में 60 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि हुई।

भारत का निर्यात कितना बढ़ा?

आंकड़े इस बात का संकेत देते हैं कि भारत के व्यापार समझौते अब बातचीत के जरिए मिली बाजार पहुंच को वास्तविक निर्यात वृद्धि में बदलने लगे हैं। वाणिज्य मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-जून 2026 के दौरान सिंगापुर को भारत का निर्यात सालाना आधार पर 101.2 प्रतिशत बढ़कर 6.52 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले साल की इसी अवधि में 3.24 अरब डॉलर था। श्रीलंका को निर्यात में इससे भी तेज उछाल आया। यह 123.8 प्रतिशत बढ़कर 2.35 अरब डॉलर हो गया, जबकि पिछले साल यह 1.05 अरब डॉलर था।

आसियान क्षेत्र का निर्यात मजबूत

आसियान क्षेत्र को भी मजबूत निर्यात वृद्धि दर्ज की गई। पहली तिमाही में आसियान देशों को भारत का निर्यात 61.6 प्रतिशत बढ़कर 14.61 अरब डॉलर पहुंच गया, जो अप्रैल-जून 2025 में 9.04 अरब डॉलर था। इसके अलावा मलेशिया को निर्यात 75.2 प्रतिशत बढ़कर 2.54 अरब डॉलर और ऑस्ट्रेलिया को निर्यात 25.2 प्रतिशत बढ़कर 2.68 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

दक्षिण कोरिया को निर्यात 22.6 प्रतिशत बढ़कर 1.95 अरब डॉलर और जापान को 22.4 प्रतिशत बढ़कर 1.75 अरब डॉलर दर्ज किया गया। ओमान को निर्यात 26.4 प्रतिशत बढ़कर 1.39 अरब डॉलर और नेपाल को निर्यात 18.1 प्रतिशत बढ़कर 2.28 अरब डॉलर रहा, जबकि भूटान और थाईलैंड को निर्यात में क्रमशः 16.1 और 6 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई।

इस तेजी के चलते चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत के कुल निर्यात (वस्तु व सेवाएं मिलाकर) में 15.92 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। यह 129.32 अरब डॉलर तक पहुंच गया। भारत अब तक कुल 17 एफटीए पर हस्ताक्षर कर चुका है, जिनमें से 16 पूरी तरह लागू हैं। यह तेजी ऐसे समय पर आई है जब भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में अपने अब तक के सबसे ऊंचे निर्यात स्तर को छुआ।

भारत का कुल निर्यात कितना बढ़ा?

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बीते वित्त वर्ष में भारत का कुल निर्यात 4.59 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 863.11 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो इससे पिछले साल 825.26 अरब डॉलर था। इसमें वस्तु निर्यात 441.78 अरब डॉलर और सेवा निर्यात रिकॉर्ड 421.32 अरब डॉलर रहा। संसद में सरकार द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, यह वृद्धि यूएई, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, ओमान और ईएफटीए देशों के साथ हुए व्यापार समझौतों से मिली विस्तारित बाजार पहुंच से समर्थित रही।

हाल के वर्षों में नई दिल्ली ने कई अहम व्यापार समझौतों को अंतिम रूप दिया है, जिनमें भारत-UAE व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA), भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौता (ECTA), भारत-EFTA व्यापार एवं आर्थिक भागीदारी समझौता (TEPA), भारत-ओमान CEPA और भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) शामिल हैं। इसके अलावा भारत न्यूजीलैंड के साथ भी FTA पर सहमति बना चुका है, जो अभी लागू होने की प्रक्रिया में है। यूरोपीय संघ के साथ व्यापार वार्ता जनवरी 2026 में पूरी हो चुकी है।

वाणिज्य मंत्रालय के एक अधिकारी के हवाले से रिपोर्टों में कहा गया कि विभिन्न प्रमुख FTA साझेदार देशों में भारत के निर्यात में लगातार मजबूती दिख रही है। तिमाही के दौरान समग्र निर्यात गति में इस उछाल का बड़ा योगदान रहा। विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत सिर्फ निर्यात की मात्रा नहीं बढ़ा रहा, बल्कि तरजीही व्यापार व्यवस्थाओं का इस्तेमाल कर वैश्विक बाजार में अपनी मौजूदगी को भी व्यवस्थित रूप से विस्तार दे रहा है।

Updated on:
20 Sept 2026 04:46 pm
Published on:
20 Sept 2026 04:46 pm