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सुंबा द्वीप पर तोहफे में दिए जाते हैं इंसान: खूबसूरत वादियों में कैद हैं हजारों लोग, जानिए दास प्रथा की दर्दनाक कहानी

इंडोनेशिया का नाम सुनते ही आंखों के सामने बाली के सुनहरे समुद्र तट, लग्जरी रिसॉर्ट्स और खूबसूरत नजारों की तस्वीर उभर आती है। इंडोनेशिया की चमचमाती दुनिया के अलावा यहां एक ऐसा स्थान भी है, जहां आज भी दास प्रथा का चलन है।
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Sep 27, 2026
Slavery on Sumba Island
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

इंडोनेशिया का नाम सुनते ही आंखों के सामने बाली के सुनहरे समुद्र तट, लग्जरी रिसॉर्ट्स और खूबसूरत नजारों की तस्वीर उभर आती है। इंडोनेशिया में कई खूबसूरत स्थान हैं, जो पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। यहां आज भी ऐसी जगह है जहां हजारों लड़कियां, महिलाएं और पुरुष गुलामी की जंजीरों में कैद हैं।

इंडोनेशिया में पनप रही सदियों पुरानी दास प्रथा

इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता से करीब 2000 किलोमीटर दूर 'सुंबा द्वीप' पर 21वीं सदी में भी दास प्रथा चल रही है। इस द्वीप पर पैदा होने वाले बच्चे अपने मालिकों के 'गुलाम' होते हैं। इंडोनेशिया की राजधानी से 2000 किलोमीटर दूर स्थित 'सुंबा द्वीप' पर गुलामी का जीवन गुजार रहे बेबस लोगों को स्थानीय भाषा में 'अता' कहा जाता है। इस द्वीप पर मराम्बा समाज के अमीर और रसूखदार लोग मालिक होते हैं। इसी द्वीप पर दूसरे समुदाय के लोगों को कबीहू कहा जाता है। ये आम नागरिक होते हैं। यहां जन्म लेने वाला हर 'अता' बच्चा जन्मजात गुलाम होता है, जिसका जीवन उसके मालिक 'मराम्बा' के अधीन होता है।

गुलामी में जीवन गुजार रहे हजारों लोग

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार, खासकर पूर्वी 'सुंबा द्वीप' में 1,700 से लेकर कई हजार 'अता' आज भी गुलामी के चंगुल में फंसे हुए हैं। मार्था हेबी जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस व्यवस्था पर गहन अध्ययन किया है। मारापू पुजारी उम्बु रेमी डेटा कहते हैं कि यह धर्म सामाजिक स्तरीकरण का सार है। पुरानी मान्यताओं के अनुसार, सुंबा पहुंचने पर मराम्बा जनजाति को 'अता' पर अधिकार प्राप्त हुए।

बंधुआ मजदूरी और सजा की दर्दनाक कहानी

हिंसा, शोषण और बंधुआ मजदूरी का दंश झेल रहे 'अता' समुदाय के लोगों के पास अपने जीवन पर कोई अधिकार नहीं है। बचपन से ही उन्हें खेतों में काम करने, मवेशी चराने और मालिकों के घरों में खाना बनाने के लिए बाध्य किया जाता है। काम में लापरवाही बरतने पर बेरहमी से पीटा जाता है। बाल पकड़कर घसीटा जाता है। कभी-कभी तो सजा के रूप में खौलता पानी भी फेंका जाता है।

लड़कियों का रेप करते हैं मालिक

सुंबा द्वीप पर सबसे दर्दनाक स्थिति गुलाम महिलाओं और लड़कियों की है। स्थानीय धारणा के अनुसार, गुलाम लड़की मालिक की संपत्ति है। इसलिए 'अता' समुदाय की लड़कियों-महिलाओं के साथ शारीरिक संबंध बनाना 'रेप' नहीं माना जाता है, बल्कि इसे अपनी संपत्ति पर अधिकार माना जाता है। इंडोनेशिया की राष्ट्रीय महिला हिंसा आयोग की पूर्व प्रमुख एंडी येंट्रियानी इस सामाजिक धारणा की निंदा करती हैं।

सुंबा द्वीप की आबादी

सुंबा द्वीप की कुल आबादी लगभग 6.85 लाख है, जिसमें 80 प्रतिशत से अधिक लोग ईसाई हैं। यहां की सामाजिक व्यवस्था प्राचीन 'मारापू' परंपरा से संचालित होती है। यह परंपरा जीववाद और पूर्वज पूजा को मिलाती है और समाज को 3 वर्गों में बांटती है-
1- मराम्बा: कुलीन वर्ग, बड़े जमींदार और मालिक
2- कबीहू: आम नागरिक
3- अता: जन्मजात दास/गुलाम

Updated on:
27 Sept 2026 07:48 pm
Published on:
27 Sept 2026 07:48 pm