
जब किसान खेत में यूरिया की सफेद दानेदार खाद डालता है, तो शायद ही उसके मन में यह सवाल आता हो कि आखिर यह खाद बनती कैसे है। यूरिया कोई ऐसी चीज नहीं है जो सीधे जमीन से निकलती हो। इसे बड़े-बड़े कारखानों में कई चरणों की प्रक्रिया से तैयार किया जाता है। दिलचस्प बात यह है कि यूरिया बनाने के लिए मुख्य रूप से प्राकृतिक गैस, हवा और पानी का इस्तेमाल होता है।
पौधों को बढ़ने के लिए नाइट्रोजन चाहिए। नाइट्रोजन की मदद से पौधों में हरियाली आती है, पत्तियां बढ़ती हैं और फसल का विकास होता है। यूरिया में लगभग 46 प्रतिशत नाइट्रोजन होती है, इसलिए इसे नाइट्रोजन का सबसे सस्ता और लोकप्रिय स्रोत माना जाता है।
यूरिया बनाने की कहानी प्राकृतिक गैस से शुरू होती है। कारखानों में प्राकृतिक गैस को बहुत अधिक तापमान पर भाप के साथ मिलाया जाता है। इस प्रक्रिया से हाइड्रोजन गैस निकलती है। दूसरी तरफ हवा से नाइट्रोजन गैस अलग की जाती है। क्योंकि हवा में लगभग 78 प्रतिशत नाइट्रोजन होती है, इसलिए इसकी कमी नहीं होती।
अब कारखाने के पास दो महत्वपूर्ण चीजें हैं-
अब हाइड्रोजन और नाइट्रोजन को बहुत ज्यादा तापमान और दबाव पर मिलाया जाता है। इससे अमोनिया (Ammonia) बनती है।इसे ऐसे समझिए कि अमोनिया यूरिया बनाने की "मुख्य सामग्री" है। अगर अमोनिया नहीं होगी तो यूरिया भी नहीं बन सकती।
जब अमोनिया बनती है, उसी प्रक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) भी निकलती है। कारखाना इस CO₂ को फेंकता नहीं है, बल्कि अमोनिया के साथ मिलाकर यूरिया तैयार करता है।
यानी सरल भाषा में कहें तो:
प्राकृतिक गैस → हाइड्रोजन → अमोनिया → यूरिया
यूरिया बनने के बाद यह तरल रूप में होती है।
अब सबसे रोचक हिस्सा आता है। कारखाने में एक बहुत ऊंचा टावर होता है, जिसे प्रिलिंग टावर (Prilling Tower) कहते हैं। इस टावर के ऊपर से तरल यूरिया की छोटी-छोटी बूंदें नीचे गिराई जाती हैं। नीचे आते-आते ये बूंदें ठंडी होकर छोटे-छोटे सफेद दानों में बदल जाती हैं। यही दाने बाद में किसानों को बोरी में भरकर बेचे जाते हैं।
आपने अक्सर 'नीम कोटेड यूरिया' का नाम सुना होगा। दरअसल, तैयार यूरिया के दानों पर नीम के तेल की बहुत पतली परत चढ़ाई जाती है। यही कारण है कि सरकार अब लगभग पूरी यूरिया नीम-कोटेड रूप में ही बेचती है।
1 - प्राकृतिक गैस से हाइड्रोजन बनाई जाती है
2 - हवा से नाइट्रोजन निकाली जाती है
3 - दोनों को मिलाकर अमोनिया बनाई जाती है
4 - अमोनिया और CO₂ से यूरिया तैयार होती है
5 - तरल यूरिया को सफेद दानों में बदला जाता है
6 - नीम की कोटिंग की जाती है
7 - बोरी में पैक कर किसानों तक भेजा जाता है
यूरिया की एक बोरी खेत तक पहुंचने से पहले कई मशीनों, रासायनिक प्रक्रियाओं और हजारों किलोमीटर की सप्लाई चेन से गुजरती है। यानी किसान जो सफेद दाने खेत में डालता है, उसके पीछे गैस, विज्ञान और बड़े उद्योगों की पूरी कहानी छिपी होती है।