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अरहर का सीक्रेट कोड मिला! ICAR की खोज किसानों के लिए क्यों है बड़ी और फायदे की खबर?

ICAR Pigeonpea Genome Breakthrough: ICAR ने अरहर दाल का देश का पूर्ण T2T रेफरेंस जीनोम तैयार किया है। यह उपलब्धि भविष्य में ज्यादा उत्पादन, रोग रोधी और जलवायु अनुकूल किस्म के विकास का आधार हो सकती है। तो क्या अब दालें भी होंगी डिजाइन्ड? जानिए किसानों को इसका क्या फायदा, कैसे जलवायु अनुकूल होगी ये उपज?
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Aug 05, 2026
ICAR Pigeonpea Genome Breakthrough
ICAR Pigeonpea Genome Breakthrough: तो क्या अब दालें भी होंगी डिजाइन्ड, जानें किसानों को क्या फायदा? (AI Creative)

ICAR Pigeonpea Genome Breakthrough: भारत में दालों की बढ़ती मांग, जलवायु परिवर्तन और फसल रोगों की चुनौती के बीच भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने अरहर (तूर) की खेती के लिए एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि हासिल की है। संस्थान ने देश का पहला पूरी तरह एनोटेटेड Telomere-to-Telomere (T2T) रेफरेंस जीनोम विकसित किया है। यह उपलब्धि भविष्य में ऐसी अरहर किस्में विकसित करने का रास्ता खोल सकती है जो अधिक उत्पादन दें, रोगों का बेहतर मुकाबला करें और सूखे जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों में भी टिक सकें।

यह उपलब्धि केवल एक वैज्ञानिक रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि भारत की दाल आत्मनिर्भरता और जलवायु-अनुकूल कृषि की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे नई किस्मों के विकास में लगने वाला समय कम हो सकता है क्योंकि जीन स्तर पर वांछित गुणों की पहचान पहले से कहीं अधिक सटीक तरीके से की जा सकेगी।

क्या है T2T जीनोम?

Telomere-to-Telomere (T2T) जीनोम का अर्थ है किसी जीव के पूरे जीनोम का बिना किसी बड़े गैप के संपूर्ण मानचित्र तैयार करना। ICAR के अनुसार अरहर का यह नया जीनोम 752.65 मिलियन बेस पेयर का है, जिसे 92 कॉन्टिग्स में व्यवस्थित कर सभी 11 गुणसूत्रों का पूर्ण प्रतिनिधित्व तैयार किया गया है। इससे वैज्ञानिकों को उन जीनों की पहचान करने में आसानी होगी जो उपज, पोषण, रोग प्रतिरोधक क्षमता और सूखा सहनशीलता जैसे गुणों को नियंत्रित करते हैं।

किसानों को क्या होगा फायदा?

इस जीनोमिक संसाधन के आधार पर भविष्य में विकसित होने वाली किस्मों में संभावित रूप से किसानों को कई फायदे बताए जा रहे हैं।

  • अधिक उपज देने की क्षमता
  • फसल रोगों के प्रति बेहतर प्रतिरोध
  • सूखा और तापमान जैसी जलवायु चुनौतियों को सहने की क्षमता
  • बेहतर पोषण गुणवत्ता
  • तेज और अधिक सटीक प्रजनन (Breeding) कार्यक्रम

जैसे सुधार संभव हो सकेंगे। हालांकि नई व्यावसायिक किस्में विकसित होने और किसानों तक पहुंचने में अभी शोध, परीक्षण और नियामकीय प्रक्रियाओं में समय लगेगा।

यह उपलब्धि क्यों है रणनीतिक?

भारत दुनिया के सबसे बड़े दाल उपभोक्ता देशों में है और अरहर भारतीय भोजन में प्रोटीन का प्रमुख स्रोत है। उत्पादन में थोड़ी भी गिरावट आयात का दबाव बढ़ा सकती है। ऐसे में जीनोमिक तकनीक का उपयोग केवल वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं, बल्कि खाद्य एवं पोषण सुरक्षा की रणनीति भी है।

विशेषज्ञों के अनुसार जीनोम आधारित ब्रीडिंग पारंपरिक चयन प्रक्रिया की तुलना में अधिक तेज और सटीक हो सकती है, जिससे भविष्य में जलवायु परिवर्तन के अनुरूप नई फसल किस्में विकसित करने की गति बढ़ सकती है।

रिसर्च टाइमलाइन

  • 2011: भारत ने अरहर का दुनिया का पहला ड्राफ्ट जीनोम प्रकाशित किया।
  • 2017: जीनोम का बेहतर संस्करण सामने आया।
  • 2026: पहला पूर्ण Telomere-to-Telomere (T2T) रेफरेंस जीनोम विकसित किया गया, जिसे अब सबसे व्यापक आनुवंशिक ब्लूप्रिंट माना जा रहा है।

फैक्ट फाइल

फसल: अरहर (तूर)

उपलब्धि: भारत का पहला Fully Annotated T2T Reference Genome

डीएनए आकार: 752.65 मिलियन बेस पेयर

गुणसूत्र: 11 का पूर्ण प्रतिनिधित्व

मुख्य उद्देश्य: बेहतर उपज, रोग प्रतिरोध, पोषण और जलवायु सहनशील किस्मों का विकास

बता दें कि ICAR की यह उपलब्धि तुरंत खेतों में नई फसल नहीं लाएगी, लेकिन यह आने वाले वर्षों में अरहर की वैज्ञानिक ब्रीडिंग का आधार बनेगी। यदि इस जीनोमिक संसाधन का प्रभावी उपयोग हुआ, तो भारत अधिक उत्पादक, जलवायु-अनुकूल और पोषण-संपन्न अरहर किस्में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण बढ़त हासिल कर सकता है।

Updated on:
05 Aug 2026 03:36 pm
Published on:
05 Aug 2026 03:36 pm