
Time-Restricted Eating: अगर आप बढ़ती उम्र के साथ अपनी याददाश्त, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता और सोचने-समझने की ताकत को 20 साल के जवान की तरह बनाए रखना चाहते हैं, तो यह खबर आपके बेहद काम की है। 'अमेरिकन सोसाइटी फॉर न्यूट्रिशन' (ASN) की वार्षिक प्रमुख बैठक 'न्यूट्रिशन 2026' (मैरीलैंड, यूएसए) में प्रस्तुत किए एग एक नए क्लिनिकल ट्रायल ने मेडिकल साइंस की दुनिया में नई चर्चा छेड़ दी है। रटगर्स यूनिवर्सिटी और रटगर्स-आरडब्ल्यूजे मेडिकल सेंटर की प्रमुख रिसर्चर और प्रोफेसर डॉ. सू शेप्स (PhD, RD, DFASAN) के नेतृत्व में की गई इस रिसर्च से यह साबित हुआ है कि अगर दिन भर का खाना सिर्फ 8 से 9 घंटे के अंतराल में समेट लिया जाए, तो बढ़ती उम्र में भी ब्रेन की कार्यक्षमता (Brain Functioning) मजबूत बनी रहती है। इस अध्ययन के मुताबिक, भोजन का समय सही रखने से वजन तो घटता ही है, साथ ही अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी बीमारियों का खतरा भी काफी हद तक कम हो सकता है।
आजकल की व्यस्त और अनियमित जीवनशैली में हम सुबह उठने से लेकर देर रात सोने तक कुछ न कुछ खाते रहते हैं। अमूमन लोग 12 से 14 घंटे के दायरे में भोजन करते हैं।
वैज्ञानिकों का कहना है कि जब हम अपने खाने के समय को सीमित (Time-Restricted Eating) कर देते हैं—जैसे सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे के बीच तो शरीर को 15 से 16 घंटे का एक प्राकृतिक उपवास (Fasting Window) मिलता है। यह ब्रेक केवल पाचन तंत्र को ही आराम नहीं देता, बल्कि मस्तिष्क की कोशिकाओं को खुद को दोबारा जीवंत और मरम्मत (Cellular Repair) करने का पर्याप्त अवसर प्रदान करता है।
रटगर्स यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर डॉ. सू शेप्स और उनकी टीम ने इस रिसर्च को पूरी वैज्ञानिक सटीकता के साथ अंजाम दिया:
प्रतिभागी: इस ट्रायल में 50 से 79 वर्ष की आयु की 47 महिलाओं को शामिल किया गया, जो अधिक वजन या मोटापे की समस्या से जूझ रही थीं।
कैलोरी कट: सभी प्रतिभागियों को उनकी दैनिक डाइट से 500 कैलोरी कम करने का निर्देश दिया गया।
पहला समूह (8-9 घंटे की विंडो): 26 महिलाओं को अपना पूरा भोजन दिन के 8 से 9 घंटे के भीतर (जैसे सुबह 10:00 से शाम 6:00 बजे) खत्म करने को कहा गया।
दूसरा समूह (12 घंटे की विंडो): शेष महिलाओं को सामान्य तरीके से 12 घंटे या उससे अधिक समय में भोजन करने दिया गया।
नियम: दोनों ही समूहों को सोने से कम से कम 4 घंटे पहले खाना बंद करने का सुझाव दिया गया।
यह परीक्षण पूरे छह महीने तक लगातार चलाया गया, जिसके बाद प्रतिभागियों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के कई कड़े टेस्ट लिए गए।
रोजाना 8 घंटे खाना खाने से अल्जाइमर और डिमेंशिया का खतरा जड़ से कम होता है। ( फोटो: ChatGPT.)
छह महीने के इस वैज्ञानिक अध्ययन के बाद जो नतीजे सामने आए, वे वजन घटाने के पारंपरिक तरीकों से काफी अलग और आंखें खोलने वाले थे:
(क) वजन घटाने में समान सफलता
छह महीने में दोनों समूहों की महिलाओं ने औसतन 15 पाउंड (लगभग 6.8 किलोग्राम) वजन कम किया। यानी केवल वजन घटाने के मामले में 8 घंटे वाले और 12 घंटे वाले समूह में कोई बड़ा अंतर नहीं था।
(ख) ब्रेन पावर और सोचने की क्षमता में बड़ा अंतर
भले ही दोनों समूहों का वजन एक समान घटा हो, लेकिन जब मस्तिष्क के परीक्षण (Cognitive Tests) किए गए, तो 8 से 9 घंटे में भोजन करने वाली महिलाओं का प्रदर्शन काफी बेहतर रहा:
प्रॉब्लम सॉल्विंग (Problem Solving): इन महिलाओं में जटिल समस्याओं को सुलझाने और योजनाएं बनाने (Spatial Planning) की क्षमता में सुधार देखा गया।
याददाश्त और फोकस (Memory & Focus): समय-सीमित भोजन करने वाली महिलाओं ने याददाश्त और सीखने से जुड़े टेस्ट में बेहद कम गलतियां कीं।
मल्टी टास्किंग: दैनिक जीवन के कामकाज में जानकारी को जल्दी याद करने और एकाग्रता बनाए रखने में यह समूह आगे रहा।
अध्ययन की मुख्य शोधकर्ता डॉ. सू शेप्स ने इस परिणाम की व्याख्या करते हुए बताया.आमतौर पर माना जाता है कि केवल वजन कम करने से उम्र के साथ होने वाली मानसिक गिरावट को रोका जा सकता है, लेकिन हमारी रिसर्च यह बताती है कि यदि आप सोने से 4 घंटे पहले खाना बंद कर देते हैं और भोजन का समय 12 घंटे से घटाकर 8-9 घंटे कर देते हैं, तो दिमाग को अतिरिक्त सुरक्षा और मजबूती मिलती है। उन्होंने कहा कि भोजन के समय को कम करने से रोजमर्रा के कामों में भूलने की आदत कम होती है और ध्यान भटकने की समस्या से निजात मिलती है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, सीमित समय में खाना खाने से मस्तिष्क को ये मुख्य फायदे मिलते हैं:
बायोलॉजिकल क्लॉक (Circadian Rhythm): इंसानी शरीर और दिमाग सूर्य के प्रकाश और भोजन के समय के साथ तालमेल बिठाकर काम करते हैं। सही समय पर खाने से दिमाग की आंतरिक घड़ी सही काम करती है।
सूजन (Inflammation) में कमी: देर रात तक खाते रहने से शरीर और दिमाग में क्रोनिक सूजन बढ़ती है, जो अल्जाइमर का मुख्य कारण है। 8 घंटे की ईटिंग विंडो इस सूजन को कम करती है।
इंसुलिन और ग्लूकोज कंट्रोल: दिमाग को काम करने के लिए ग्लूकोज की जरूरत होती है। समयबद्ध भोजन से इंसुलिन का स्तर संतुलित रहता है, जिससे मस्तिष्क को लगातार और सही ऊर्जा मिलती रहती है।
एक रिसर्च के मुताबिक बढ़ती उम्र में तय समय पर खाना खाने से अल्जाइमर का खतरा कम होता है। ( फोटो: ChatGPT.)
उम्र बढ़ने के साथ-साथ डिमेंशिया (भूलने की बीमारी) और अल्जाइमर का खतरा बढ़ता जाता है। आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं और अधिक वजन वाले लोगों में यह बीमारी होने की संभावना अधिक होती है। ऐसे में बिना किसी महंगी दवा या कठिन एक्सरसाइज के, केवल 'खाने का समय' बदलकर अपने दिमाग को सेहतमंद रखना एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकता है।
यदि आप भी इस रिसर्च का लाभ उठाना चाहते हैं, तो विशेषज्ञों के अनुसार इन आसान नियमों को अपना सकते हैं:
समय तय करें: अपने भोजन का समय सुबह 9:00 बजे से शाम 5:00 बजे या सुबह 10:00 बजे से शाम 6:00 बजे के बीच रखें।
डिनर जल्दी करें: रात का खाना हर हाल में सोने से 3 से 4 घंटे पहले खा लें।
फास्टिंग विंडो में क्या लें?: भोजन की 8-9 घंटे की अवधि के बाद यानी बाकी 15-16 घंटों में आप केवल पानी, ब्लैक टी, या बिना चीनी की ग्रीन टी ले सकते हैं।
संतुलित आहार: 8 घंटे की विंडो में भी जंक फूड के बजाय पौष्टिक, फाइबर और प्रोटीन से भरपूर भोजन ही करें।
अमेरिकन सोसाइटी फॉर न्यूट्रिशन की इस रिसर्च ने यह साफ कर दिया है कि बेहतर सेहत और तेज दिमाग के लिए सिर्फ यह काफी नहीं है कि आपकी थाली में क्या है, बल्कि यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि वह थाली किस समय आपके सामने है। बढ़ती उम्र में यदि आप याददाश्त, सोचने की गति और दिमागी ताजगी को बनाए रखना चाहते हैं, तो आज से ही अपनी ईटिंग विंडो को 8 से 9 घंटे तक सीमित करने का प्रयास करें। यह एक छोटा सा बदलाव आपके मस्तिष्क को लंबे समय तक युवा और ऊर्जावान बनाए रख सकता है।