
India's Mozzarella: कश्मीर के सेब और केसर के चर्चे तो आपने बहुत सुने होंगे, लेकिन अगर आप कभी जम्मू के पहाड़ी रास्तों पर निकलें, तो हवा में उठती एक खास सौंधी-सौंधी खुशबू आपका ध्यान खींच लेगी। यह खुशबू है तवे पर धीमी आंच पर सिकती हुई 'कलाड़ी' की।
बाहर से एकदम क्रिस्पी, सुनहरी और अंदर से बेहद नरम, पिघली हुई और रेशेदार पहली नजर में यह किसी विदेशी मोज़ेरेला या कॉटेज चीज़ जैसी दिखती है, लेकिन इसका स्वाद और बनाने का अंदाज पूरी तरह से हिन्दुस्तानी और पारंपरिक है। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत करते हुए उधमपुर की इस खास 'कलाड़ी' (Udhampur Kaladi) को भौगोलिक संकेत (GI Tag) भी मिल चुका है। आइए जानते हैं जम्मू के इस 'देसी मोज़ेरेला' की दिलचस्प कहानी, इसके बनने का अनोखा तरीका और क्यों यह हर फ़ूड लवर की पसंदीदा बनती जा रही है।
कलाड़ी कोई आज का मॉडर्न फ़ूड ट्रेंड नहीं है, बल्कि इसका इतिहास सदियों पुराना है। इसकी शुरुआत जम्मू के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले गुज्जर और बकरवाल जनजातियों की सुझबुझ से हुई थी।
कलाड़ी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे पकाने के लिए आपको अलग से तेल या घी की एक बूंद भी नहीं डालनी पड़ती।
बनाने की पारंपरिक विधि: कलाड़ी बनाने के लिए गाय या भैंस के कच्चे, फुल-फैट दूध का इस्तेमाल किया जाता है। दूध को उबाले बिना इसमें मट्ठे (छाछ) का खट्टा पानी मिलाकर धीरे-धीरे फाड़ा जाता है। फिर इसे मखमली कपड़े में छानकर गोल टिक्कियों का आकार दिया जाता है और कुछ दिनों के लिए खुली धूप में सुखाया जाता है।
जब इस सूखी हुई कलाड़ी को गर्म तवे पर रखा जाता है, तो इसके अंदर मौजूद प्राकृतिक मक्खन और फैट खुद-ब-खुद बाहर आने लगता है। धीमी आंच पर सिकते ही इसका बाहरी हिस्सा क्रिस्पी और गोल्डन ब्राउन हो जाता है, जबकि अंदर का हिस्सा पिघलकर एकदम चीज़ी और खिंचावदार (stretchy) हो जाता है।
अगर आप जम्मू जाएं और आपने 'कलाड़ी कुलचा' नहीं खाया, तो आपकी यात्रा अधूरी मानी जाएगी। स्थानीय हलवाई और स्ट्रीट वेंडर्स तवे पर क्रिस्पी सेकी हुई गरम कलाड़ी को गोल कुलचे या ब्रेड के बीच में रखते हैं। इसके ऊपर चुटकी भर काला नमक, भुना जीरा, लाल मिर्च और इमली या अनारदाने की खट्टी-मीठी चटनी डाली जाती है। कुलचे के साथ जब पिघली हुई चीज़ी कलाड़ी का पहला बाइट मुंह में जाता है, तो स्वाद का जो धमाका होता है, उसकी तुलना दुनिया के किसी भी पश्चिमी बर्गर से नहीं की जा सकती।
3 अक्टूबर 2023 का दिन उधमपुर और डोगरा संस्कृति के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ, जब 'उधमपुर कलाड़ी' को आधिकारिक रूप से GI Tag मिला।
फ़ास्ट फ़ूड के इस दौर में कलाड़ी स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी बेहतरीन कॉम्बिनेशन है:
उधमपुर की कलाड़ी सिर्फ दूध से बना एक उत्पाद नहीं है, बल्कि यह जम्मू के पहाड़ों, चरवाहों की समृद्ध परंपरा और डोगरा संस्कृति की जीती-जागती मिसाल है। यह इस बात का सबूत है कि भारत के ग्रामीण अंचलों में स्वाद और सेहत के ऐसे अनगिनत खजाने छिपे हैं, जो दुनिया के बड़े से बड़े फ़ास्ट फ़ूड ब्रांड्स को मात दे सकते हैं।
अगली बार जब भी आप जम्मू की वादियों की तरफ रुख करें, तो तवे पर सिकती हुई गरमा-गरम कलाड़ी का स्वाद लेना बिल्कुल न भूलें.