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चार घंटे फोन पर झुकी गर्दन… साउथ एक्ट्रेस शकीला का अनुभव बता रहा मोबाइल कब सुविधा के बजाय बन जाता है सेहत का दुश्मन

Mobile Phone Addiction: मोबाइल हमारी जिंदगी का ऐसा हिस्सा बन चुका है, जिससे कुछ घंटे दूर रहना भी मुश्किल लगता है। लेकिन जब यही जरूरी चीज सेहत की दुश्मन बन जाए तब क्या किया जाए? साउथ मूवीज की एक्ट्रेस शकीला के एक्सपीरियंस से जानिए मोबाइल की लत कितना बड़ा रिस्क? क्यों पड़ गई गरदन की सर्जरी की जरूरत?
3 min read
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Aug 14, 2026
mobile phone addiction
mobile phone addiction: साउथ एक्ट्रेस शकीला को झेलना पड़ा है मोबाइल एडिक्शन का दर्द... जानिए कब पड़ती है गरदन की सर्जरी की जरूरत (AI Creative)

Mobile Phone Addiction: दक्षिण भारतीय फिल्मों की अभिनेत्री शकीला ने हाल ही में अपने स्वास्थ्य को लेकर एक अनुभव साझा किया, जिसने इस आदत के दूसरे पहलू पर ध्यान खींचा है। उन्होंने बताया कि वह लंबे समय तक लेटकर ऑनलाइन गेम खेलती थीं और कई बार करीब चार घंटे तक लगातार फोन पर रहती थीं। इसके बाद उन्हें गर्दन की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ा और सर्जरी करानी पड़ी। यहां कहानी केवल एक अभिनेत्री की नहीं है। दरअसल, लंबे समय तक गर्दन झुकाकर मोबाइल देखने की आदत आज बच्चों, युवाओं और कामकाजी लोगों में आम है।

असली खतरा फोन नहीं, इस्तेमाल का तरीका है

हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक फोन अपने आप में गर्दन की बीमारी पैदा करने वाली चीज नहीं है। समस्या तब बढ़ती है जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठा या लेटा रहता है। फोन नीचे रखकर देखने पर गर्दन लगातार आगे की ओर झुकी रहती है। घंटों तक यही स्थिति रहने से गर्दन और कंधों की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ सकता है। लगातार एक ही मुद्रा में गेम खेलने, वीडियो देखने या स्क्रॉल करने से परेशानी और बढ़ सकती है।

शकीला ने भी अपने अनुभव में लंबे समय तक लेटकर गेम खेलने की बात कही। इस पर एक्सपर्ट्स का कहना है कि कई बार समझाइश दी जाती है कि लगातार चार घंटे एक ही मुद्रा में रहना और बीच-बीच में उठकर शरीर को चलाना, दोनों स्थितियां एक जैसी नहीं हैं।

गर्दन का दर्द सिर्फ थकान समझकर न टालें, ये लक्षण हों तो जाएं डॉक्टर के पास

कभी-कभार गर्दन में दर्द होना सामान्य हो सकता है, लेकिन अगर दर्द बार-बार लौट रहा है, कंधे या हाथ तक पहुंच रहा है या हाथों में झनझनाहट, सुन्नपन अथवा कमजोरी महसूस हो रही है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। एक्सपर्ट्स चेताते हैं कि संतुलन बिगड़ना, चलने में बदलाव या हाथों के तालमेल में परेशानी जैसे लक्षण अधिक गंभीर समस्या की ओर संकेत कर सकते हैं और ऐसे मामलों में चिकित्सकीय जांच जरूरी है।

मोबाइल की लत का असर सिर्फ गर्दन तक सीमित नहीं

  • अत्यधिक मोबाइल इस्तेमाल को लेकर प्रकाशित शोधों में नींद की समस्या, थकान और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कुछ नकारात्मक संबंध भी सामने आए हैं। एक शोध समीक्षा में ज्यादा मोबाइल इस्तेमाल को नींद की कमी और अवसाद जैसे लक्षणों से जुड़ा पाया गया था।
  • 2026 में प्रकाशित एक अध्ययन में भी स्मार्टफोन के अत्यधिक इस्तेमाल को तनाव और खराब नींद से जोड़कर देखा गया। हालांकि ऐसे अध्ययनों के आधार पर हर व्यक्ति में बीमारी का सीधा कारण मोबाइल को मानना सही नहीं होगा।
  • यानी चिंता की बात सिर्फ स्क्रीन टाइम नहीं है। सवाल यह भी है कि मोबाइल की वजह से आपकी नींद, शारीरिक गतिविधि, काम, पढ़ाई और सामाजिक जीवन कितना प्रभावित हो रहा है।

सुधार लें ये चार आदतें, तो बदल सकती हैं तस्वीर

मोबाइल पूरी तरह छोड़ना व्यावहारिक समाधान नहीं है। जरूरत है उसके इस्तेमाल का तरीका बदलने की।

पहली आदत- फोन को आंखों के करीब उचित ऊंचाई पर रखें, ताकि गर्दन लगातार नीचे न झुके।

दूसरी आदत- लंबे समय तक लेटकर मोबाइल चलाने से बचें।

तीसरी आदत- गेमिंग, वीडियो या लगातार स्क्रॉलिंग के बीच छोटे-छोटे ब्रेक लेकर शरीर की मुद्रा बदलें।

चौथी आदत- बच्चों के लिए केवल स्क्रीन टाइम तय करना ही पर्याप्त नहीं है। उनके दिन में खेल, शारीरिक गतिविधि और पर्याप्त नींद के लिए भी जगह होनी चाहिए।

कब पड़ सकती है सर्जरी की जरूरत?

  • दवा और फिजियोथेरेपी से दर्द में राहत न मिले
  • दर्द हाथों तक पहुंचे, सुन्नपन या कमजोरी हो
  • रीढ़ की नस या स्पाइनल कॉर्ड पर दबाव मिले
  • चलने-फिरने या रोजमर्रा के काम में दिक्कत होने लगे

शकीला की कहानी का सबसे बड़ा सबक यही है कि मोबाइल दुश्मन नहीं है, लेकिन उसका अनियंत्रित इस्तेमाल शरीर के लिए समस्या बन सकता है। सुविधा के लिए बनाया गया यह छोटा उपकरण अगर हमारी नींद, गर्दन और रोजमर्रा की गतिविधियों पर नियंत्रण करने लगे, तो समय रहते अपनी आदतों पर नजर डालना जरूरी है।

Updated on:
19 Aug 2026 03:01 pm
Published on:
14 Aug 2026 01:11 pm
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