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पुण्यतिथि विशेष: राजघराने से निकलकर सुरों को बनाया करियर, संगीतप्रेमियों के दिलों में जिंदा है एसडी बर्मन

अनमोल संगीतकार सचिन देव बर्मन की हिंदी सिनेमा में खास और अलग पहचान है। SD बर्मन के नाम से मशहूर सुरों के सरताज संगीतप्रेमियों के दिलों में आज भी जिंदा हैं।
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Updated: 30 Oct 2026, 1:07 PM IST
music composer sachin dev burman
संगीतकार एसडी बर्मन (इमेज सोर्स- Janani)

हिंदी सिनेमा ने अनमोल संगीतकार सचिन देव बर्मन (SD बर्मन) को 31 अक्टूबर 1975 को खो दिया था। उनकी धुनों में बसी मिठास, लोकसंगीत की खुशबू और जादुई अंदाज आज भी संगीतप्रेमियों के दिलों में जिंदा है।

राजघराने में जन्म और सुरों की दास्तां

एसडी बर्मन का जन्म 1 अक्टूबर 1906 को तत्कालीन पूर्वी बंगाल के कोमिल्ला (बांग्लादेश) में हुआ था। उनके पिता नबद्वीपचंद्र देव बर्मन त्रिपुरा के शाही परिवार से ताल्लुक रखते थे, जबकि मां निर्मला देवी मणिपुर के राजपरिवार की राजकुमारी थीं। बर्मन की शुरुआती पढ़ाई कोमिल्ला में हुई।

आगे चलकर उन्होंने संगीत की औपचारिक शिक्षा ली और केसी डे, भीष्मदेव चट्टोपाध्याय तथा उस्ताद अलाउद्दीन खान जैसे दिग्गजों से संगीत की बारीकियां सीखीं। संगीत के प्रति उनका जुनून इतना गहरा था कि उन्होंने अपनी पढ़ाई अधूरी छोड़कर इसी दुनिया में करियर बनाने का फैसला किया। उन्होंने गाइड, आराधना, प्यासा और बंदिनी जैसी फिल्मों में ऐसा संगीत दिया, जिसे आज भी लोग सुनते हैं।

करियर की शुरुआत

एसडी बर्मन ने अपने करियर की शुरुआत बंगाली लोकसंगीत और शास्त्रीय संगीत से की थी। वह 1930 के दशक में कोलकाता रेडियो से जुड़े और अपनी आवाज का जादू बिखेरने लगे। साल 1932 में उनका पहला रिकॉर्ड भी रिलीज हुआ। बाद में उन्होंने बंगाली फिल्मों में संगीत देना शुरू किया और 1944 में मुंबई पहुंच गए।

हिंदी सिनेमा में खास पहचान

सचिन देव बर्मन को फिल्म 'दो भाई' (1947) के गाने 'मेरा सुंदर सपना बीत गया' ने उन्हें हिंदी सिनेमा में खास पहचान दिलाई। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। फिल्म बाजी, टैक्सी ड्राइवर, देवदास, प्यासा, गाइड और आराधना जैसी फिल्मों में उनके संगीत ने खूब लोकप्रियता हासिल की।

एसडी बर्मन की सबसे खास बात यह थी कि वह हर गायक की आवाज के हिसाब से धुन तैयार करते थे। किशोर कुमार के साथ उनकी जोड़ी ने कई यादगार गाने दिए।

फिल्म आराधना के संगीत ने किशोर कुमार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई। वहीं, आशा भोसले के साथ भी उन्होंने कई हिट गाने दिए। लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी की आवाज में भी उनके कई गीत आज तक लोगों की पसंद बने हुए हैं। 31 अक्टूबर 1975 को मुंबई में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। लेकिन उनके जाने के बाद भी उनका संगीत लोगों के दिलों में जिंदा है।

Updated on:
30 Oct 2026, 1:07 PM IST
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