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अंतरिक्ष में ‘नकली सूरज’: अमेरिकी स्टार्टअप के ‘स्पेस मिरर’ पर FCC की मुहर, गुम हो जाएंगी रातें?

अमेरिका के कैलिफोर्निया में अंतरिक्ष में 'नकली सूरज' स्थापित करने के प्रोजेक्ट पर कार्य शुरू हो गया है। इस प्रोजेक्ट ने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। क्या है ये प्रोजेक्ट, आइए जानते हैं।
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भारत

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Vinay Shakya

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Updated: 30 Oct 2026, 3:24 PM IST

artificial sun

सांकेतिक इमेज (सोर्स- Janani)

रात के आसमान को अपनी मर्जी से रोशन करने का इरादा रखने वाली एक अमेरिकी स्टार्टअप विवादों में है। कैलिफोर्निया की कंपनी रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल अंतरिक्ष में विशाल दर्पण भेजकर सूरज की रोशनी रात में धरती के चुने हुए हिस्सों पर डालना चाहती है। इस योजना को अमेरिकी नियामक की हरी झंडी मिल चुकी है, लेकिन खगोलविद और पर्यावरण संगठन इसके खिलाफ हैं।

FCC की मंजूरी

9 जुलाई 2026 को फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) के स्पेस ब्यूरो ने रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल को एक डेमो उपग्रह 'एरेंडिल-1' तैनात करने और चलाने की अनुमति दी। इस उपग्रह में 18×18 मीटर का दर्पण है और लाइसेंस दो साल तक परीक्षण की इजाजत देता है। कंपनी इसे इसी साल के अंत में लॉन्च करने की तैयारी में है।

FCC की यह मंजूरी कंपनी की पूरी योजना को हरी झंडी नहीं देती। 50,000 दर्पणों वाले बड़े नेटवर्क के लिए कंपनी ने अभी आवेदन भी दाखिल नहीं किया है। FCC ने पर्यावरण संबंधी आपत्तियों को यह कहकर खारिज किया कि वे रेडियो फ्रीक्वेंसी के उपयोग की अनुमति देने की उसकी भूमिका से जुड़ी नहीं हैं।

कैलिफोर्निया में दिखी रहस्यमयी रोशनी

स्काई एंड टेलीस्कोप के मुताबिक कैलिफोर्निया में कंपनी का प्रदर्शन असली उपग्रह से नहीं, बल्कि जमीन पर लगे स्पॉटलाइट्स से हुआ, जो सूरज की रोशनी लौटाने वाले उपग्रहों की नकल कर रहे थे। सिएरा नेवादा की ओर बढ़ते हुए एक खगोलविद ने दूर किसी रोशन इमारत जैसी चीज देखी। परीक्षण की रोशनी रेगिस्तानी इलाके को पूर्णिमा से थोड़ी अधिक चमक में नहला रही थी। इसी रिपोर्ट के अनुसार खगोलविदों को इस परीक्षण की पहले से जानकारी नहीं थी।

कितनी होगी रोशनी?

शोधकर्ताओं के अध्ययन (प्रीप्रिंट) में गणना की गई कि 18 मीटर का प्रोटोटाइप करीब 4 गुना पूर्णिमा जितनी रोशनी देगा। प्रस्तावित 54 मीटर का दर्पण करीब 38 गुना रोशनी देगा, जो स्ट्रीट-लाइट के स्तर की होगी। स्पेस.कॉम के अनुसार, दर्पण का आसमान में दिखना किरण के केंद्र में खड़े व्यक्ति को पूर्णिमा से करीब 40 गुना चमकीला लगेगा।

टेक्नोलॉजी रिव्यू के मुताबिक 400 उपग्रहों की किरणें मिलाने पर 5 किलोमीटर के इलाके में रोशनी 10,000 पूर्णिमा के बराबर होगी, जो सूरज की चमक का 2.4% है। यह दिन की पूरी रोशनी नहीं, बल्कि सूर्यास्त के ठीक बाद जैसी धुंधलके वाली स्थिति के करीब है। इसका असर सिर्फ निशाने तक सीमित नहीं रहेगा। केंद्र से 14 किलोमीटर दूर भी आसमान पूर्णिमा जितना चमकीला रहेगा।

कंपनी की योजना और दावे

कंपनी की योजनाओं में 2028 तक 1,000 से अधिक, 2030 तक 5,000 से अधिक और 2035 तक 50,000 से अधिक उपग्रह शामिल हैं। कंपनी का तर्क है कि इससे सोलर पैनलों का उत्पादन सूर्यास्त के बाद भी चल सकता है, आपदा क्षेत्रों में रोशनी मिल सकती है, या सड़कों की बत्तियों की जगह ली जा सकती है। लेकिन पहला मिशन बिजली नहीं बनाएगा। कंपनी का 2026 का एनर्जी रोडमैप भी "टेस्टिंग" ही बताता है।

विरोध और चिंताएं

अमेरिकन एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी ने फैसले पर निराशा जताई है। आलोचकों के अनुसार इससे पायलटों का ध्यान भटक सकता है, खगोलीय प्रेक्षण बिगड़ सकते हैं और जैविक घड़ी (सर्कैडियन रिदम) प्रभावित हो सकती है। अगस्त में अर्थजस्टिस की ओर से प्रतिनिधित्व पाने वाले समूहों ने FCC से मंजूरी वापस लेने की मांग की। वहीं दूसरी तरफ कंपनी ने भारतीय कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस से दो लॉन्च खरीदे हैं, जो भारत से होंगे। इससे नियामकीय सवाल और जटिल हो सकते हैं। फिलहाल एरेंडिल-1 सिर्फ यह परखेगा कि दर्पण अंतरिक्ष में खुल, घूम और निशाने पर टिक पाता है या नहीं। असली बहस इसके बाद की है।