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पूर्वोत्तर की खास फसलों को ग्लोबल ब्रांड बनाने की तैयारी: किसान कमाएगा या बिचौलिया?

North East Crop Branding Mission : मेघालय की लाकाडोंग हल्दी, असम का मूगा सिल्क, त्रिपुरा का क्वीन पाइनएप्पल और अरुणाचल कीवी को ग्लोबल ब्रांड बनाने की तैयारी है। जानिए 2026 के नए मिशनों से किसानों की आय बढ़ेगी या फायदा बिचौलिए ले जाएंगे।
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Aug 19, 2026
North East Crop Branding Mission
North East Crop Branding Mission : क्या नार्थ ईस्ट की फसलों को मिलेगी पहचान, PC- Chatgpt

पूर्वोत्तर की चार खास उपज मेघालय की लाकाडोंग हल्दी, असम का मूगा सिल्क, त्रिपुरा का क्वीन पाइनएप्पल और अरुणाचल कीवी- को अब सिर्फ स्थानीय उत्पाद नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ब्रांड बनाने की कोशिश हो रही है। 2026 में चारों के लिए अलग-अलग मिशन शुरू किए गए हैं। सवाल यह है कि इन उत्पादों की कीमत बढ़ने का फायदा खेत और करघे तक कितना पहुंचेगा?

उत्पादराज्य2026 की पहलमुख्य फोकस
लाकाडोंग हल्दीमेघालय₹175.45 करोड़ Golden Spice Missionप्रसंस्करण, ब्रांडिंग, निर्यात
मूगा सिल्कअसमSenehjori Missionरीलिंग, बुनाई, GI, निर्यात
क्वीन पाइनएप्पलत्रिपुरा₹236 करोड़ Missionप्रसंस्करण, कोल्ड-चेन, निर्यात
कीवीअरुणाचलकरीब ₹167 करोड़ Missionकोल्ड-चेन, मूल्यवर्धन, ब्रांडिंग

किसान अभी कितना कमा रहा है?

लाकाडोंग हल्दी: मेघालय में एक किसान समूह के उदाहरण में कच्ची हल्दी की तुलना में स्लाइस और पाउडर बेचने पर ज्यादा कीमत मिली। 2026 की एक सरकारी-संबंधित रिपोर्ट में समूह ₹250/kg पर स्लाइस और ₹300/kg पर पाउडर बेच रहा था। वहीं एक अन्य परियोजना के अनुसार किसानों की सालाना आय हाल के वर्षों में करीब ₹50-60 हजार रही।

मूगा सिल्क: सरकार के मुताबिक करीब 2.6 लाख rearer और weaver परिवार इससे जुड़े हैं, लेकिन क्षेत्र अभी काफी कम मूल्य प्राप्त करता है। मिशन का लक्ष्य उत्पादन से लेकर रीलिंग, बुनाई और निर्यात तक पूरी श्रृंखला को मजबूत करना है।

क्वीन पाइनएप्पल: यहां समस्या सबसे साफ दिखती है। 2026 में राज्य सरकार ने बताया कि छोटे किसानों को अभी करीब ₹6-10/kg फार्म-गेट कीमत मिलती है, जबकि प्रसंस्कृत या निर्यात-ग्रेड उत्पाद का संभावित मूल्य ₹80-150/kg तक बताया गया।

अरुणाचल कीवी: सरकार के अनुसार राज्य भारत के कुल कीवी उत्पादन का 50% से ज्यादा देता है और सालाना उत्पादन 7,050 टन से अधिक है। इसके बावजूद Grade-C कीवी के लिए किसान को करीब ₹20-40/kg और Grade-A के लिए लगभग ₹120/kg मिलता है।

असली कमाई प्रसंस्करण में है

कच्चा उत्पाद बेचने पर किसान को कीमत का छोटा हिस्सा मिलता है। लेकिन वही उत्पाद अगर पाउडर, तेल, अर्क, पैकेज्ड फल, सूखा फल, कपड़ा या लक्जरी उत्पाद बन जाए तो मूल्य कई गुना बढ़ सकता है। यहीं सरकार की नई योजनाओं का असली फोकस है:

किसान उत्पादक संगठन और सहकारी संस्थाएं

  • स्थानीय प्रसंस्करण केंद्र
  • कोल्ड-चेन और भंडारण
  • GI प्रमाणन और नकली उत्पादों पर रोक
  • सीधे खरीदारों और निर्यातकों से संपर्क
  • ब्रांडिंग और पैकेजिंग
  • डिजिटल ट्रेसबिलिटी

उदाहरण के लिए अरुणाचल कीवी मिशन में 2,000 टन कोल्ड-चेन क्षमता बनाने और 7-10 दिन की मजबूरी वाली बिक्री को खत्म करने का लक्ष्य है।

फायदा किसान तक कैसे पहुंचेगा?

यही पूरी योजना की सबसे बड़ी परीक्षा है। अगर किसान सिर्फ कच्चा माल बेचता रहा और प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और निर्यात का मुनाफा निजी कंपनियों के पास चला गया, तो “ग्लोबल ब्रांड” तो बनेगा, लेकिन किसान की आय उतनी नहीं बढ़ेगी।

इसलिए चार चीजें निर्णायक होंगी:

  • किसान की हिस्सेदारी: FPO और सहकारी संस्थाओं को सिर्फ नाम के बजाय वास्तविक बाजार शक्ति मिले।
  • स्थानीय प्रसंस्करण: उत्पाद राज्य से कच्चे रूप में बाहर जाने के बजाय वहीं मूल्यवर्धित हो।
  • कीमत की पारदर्शिता: किसान को बाजार और निर्यात कीमत की जानकारी मिले।
  • ब्रांड का मालिक कौन? : अगर ब्रांडिंग सरकार और निजी कंपनियों के हाथ में रहे लेकिन किसान केवल आपूर्तिकर्ता बने, तो मूल्य का बड़ा हिस्सा ऊपर की श्रृंखला में रह सकता है।

चारों मिशन में सबसे बड़ा मौका

मेघालय के लाकाडोंग मिशन में ₹175.45 करोड़ से पूरी मूल्य श्रृंखला विकसित करने की योजना है, जबकि असम के Senehjori मिशन में आधुनिक रीलिंग इकाइयां, 30 FPO और डिजिटल ट्रेसबिलिटी जैसे लक्ष्य हैं। त्रिपुरा में ₹236 करोड़ का मिशन एक केंद्रीय हब और आठ संग्रह केंद्रों के जरिए खेत से बाजार तक नेटवर्क बनाने पर केंद्रित है।

अरुणाचल में करीब ₹167 करोड़ का मिशन किसानों को मौजूदा ₹20-120/kg की कीमत से चार से छह गुना बेहतर मूल्य प्राप्ति तक पहुंचाने की महत्वाकांक्षा रखता है।

पूर्वोत्तर की इन चार उपजों में वैश्विक बाजार की क्षमता जरूर है, लेकिन ब्रांड बनना और किसान अमीर होना दो अलग चीजें हैं। असली सफलता तब होगी जब किसान सिर्फ फसल उगाने वाला नहीं, बल्कि प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और बाजार में हिस्सेदार बने।

अगर ऐसा हुआ तो लाकाडोंग हल्दी सिर्फ हल्दी नहीं, मूगा सिर्फ रेशम नहीं और क्वीन पाइनएप्पल-कीवी सिर्फ फल नहीं रहेंगे। ये पूर्वोत्तर के किसानों की आय बढ़ाने वाले स्थानीय ब्रांड बन सकते हैं।

Updated on:
19 Aug 2026 01:08 pm
Published on:
19 Aug 2026 01:08 pm