
Paper Leak Protest: पेपर लीक अब सिर्फ किसी एक परीक्षा की गड़बड़ी नहीं रही, बल्कि देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सबसे बड़ा सवाल बन चुका है। पिछले तीन साल (2024–2026) में NEET-UG 2024, SSC भर्ती विवाद, विभिन्न राज्यों की भर्ती परीक्षाओं और NEET-UG 2026 समेत कई बड़ी परीक्षाएं पेपर लीक या अनियमितताओं के आरोपों से घिरीं हैं। यदि दायरा बढ़ाकर देखा जाए, तो 2015 से 2026 के बीच AIPMT, SSC CGL, CBSE कक्षा 12 अर्थशास्त्र, REET, NEET और अन्य भर्ती परीक्षाओं समेत दर्जनों बड़े विवाद सामने आए हैं, जिन्होंने करोड़ों अभ्यर्थियों का भरोसा हिला दिया है। इसी बढ़ते असंतोष के बीच दिल्ली के जंतर-मंतर के बाद अब झारखंड में भी स्टूडेंट्स सड़कों पर उतर आए हैं। सवाल सिर्फ एक राज्य या एक परीक्षा का नहीं, बल्कि यह है कि आखिर बार-बार होने वाले पेपर लीक पर अब तक स्थायी रोक क्यों नहीं लग पा रही?
झारखंड में AISA और RYA जैसे छात्र संगठनों ने 6 जुलाई 2026 को रांची में राजभवन की ओर मार्च निकालकर विरोध दर्ज कराया। भारी बारिश और पुलिस बैरिकेड के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने 'पेपर लीक बंद करो' और 'शिक्षा मंत्री इस्तीफा दो' जैसे नारे लगाए। उन्होंने केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों से जवाबदेही की मांग की, साथ ही NTA और NEP 2020 को रद्द करने की भी आवाज उठाई।
इन घटनाओं को मिलाकर, 2024 से 2026 तक कम से कम दो बड़े राष्ट्रीय पेपर लीक की पुष्टि होती है। अन्य राज्यों और परीक्षाओं में भी इसी तरह अन्य पेपर लीक की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
झारखंड में यह आंदोलन CJP आंदोलन की लहर में शामिल हुआ। AISA और RYA ने रांची में विरोध प्रदर्शन कर केंद्र और राज्य सरकारों से जवाबदेही की मांग की। यह विरोध केवल NEET लीक तक सीमित नहीं था, बल्कि राज्य में शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव की मांग भी इसमें शामिल थी।
देश में पेपर लीक की घटनाओं ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। CJP आंदोलन ने केंद्र सरकार को फास्ट-ट्रैक अदालतों की घोषणा तक मजबूर किया। झारखंड में भी विरोध ने शिक्षा नीतियों और परीक्षा सुरक्षा पर ध्यान आकर्षित किया है।
चीन- परीक्षा केंद्रो पर AI कैमरे, फेस रिकग्निशन, सिग्नल जैमर और कड़ी डिजिटल निगरानी।
दक्षिण कोरिया- प्रश्नपत्रों की एन्क्रिप्टेड डिजिटल सुरक्षा, सीमित एक्सेस और बहुस्तरीय गोपनीयता।
अमेरिका- SAT, GRE जैसी परीक्षाओं में सुरक्षित डिजिटल बैंक, अलग-अलग प्रश्न सेट और कड़ी साइबर सुरक्षा।
ब्रिटेन- प्रश्नपत्रों की सुरक्षित पैकेजिंग, ट्रैकिंग और परीक्षा से ठीक पहले नियंत्रित वितरण।
सिंगापुर- प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर वितरण तक हर चरण का ऑडिट और सीमित मानव हस्तक्षेप।
देश में 2024 से 2026 के बीच दो बड़े राष्ट्रीय पेपर लीक (NEET 2024, NEET 2026) की पुष्टि होती है, साथ ही SSC और CBSE जैसी परीक्षाओं में भी लीक की घटनाएं रही हैं। CJP आंदोलन ने इस समस्या को राष्ट्रीय स्तर पर उजागर किया और झारखंड में भी इस पर प्रतिक्रिया स्वरूप विरोध हुआ। अब सवाल यह है कि सरकार कितनी तेजी और प्रभावी ढंग से इस परीक्षा संकट को सुलझाती है और क्या छात्रों को फिर से भरोसा दिला पाती है।