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आतंक घटा, लेकिन चुनौती बरकरार, कश्मीर में क्यों निशाने पर आम नागरिक और प्रवासी मजदूर?

Kashmir Terrorism: कश्मीर में प्रवासी मजदूरों की हत्या की घटना ने एक बार फिर इस क्षेत्र में बढ़ते आतंकवाद और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले एक दशक पर नजरें घुमाई जाएं तो तस्वीर कुछ अलग नजर आती है, आतंकवादी घटनाओं का ग्राफ नीचे आया है, लेकिन चुनौतियां अब भी बरकरार हैं
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भारत

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Sanjana Kumar

Aug 01, 2026

Kashmir Terrorism

Kashmir Terrorism (AI Infographic)

Kashmir Terrorism: कश्मीर में हाल ही में प्रवासी मजदूरों की हत्या ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था और आतंकवादी घटनाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले एक दशक की आतंकवादी घटनाओं पर में इन घटनाओं में बड़ी गिरावट नजर आती है, लेकिन चुनिंदा और सॉफ्ट टारगेट आज भी आतंवादियों के निशाने पर बने हुए हैं। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि जब आतंकवाद का ग्राफ नीचे आया है तो, आम लोग और प्रवासी मजदूर ही निशाने पर क्यों हैं? पिछले 10 साल में आतंकवाद के बदलते स्वरूप और भविष्य में सुरक्षा के इंतजामात पर पढ़िए खास रिपोर्ट…

कश्मीर में हालिया हमला

हाल ही में कश्मीर में आतंकियों ने दो प्रवासी मजदूरों की हत्या कर दी। इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे पहले भी कई हमले हुए हैं, जिनमें गैर-स्थानीय मजदूरों को निशाना बनाया गया है। फरवरी 2024 में श्रीनगर में पंजाब से आए एक मजदूर की हत्या हुई थी। अक्टूबर 2024 में सोनमर्ग के पास सुरंग निर्माण स्थल पर आतंकियों ने सात लोगों की हत्या की थी, जिनमें पांच गैर-स्थानीय मजदूर शामिल थे।

पिछले दस वर्ष में सामने आईं कुछ प्रमुख आतंकवादी घटनाएं

  • फरवरी 2019: पुलवामा में जैश-ए-मोहम्मद ने सीआरपीएफ के काफिले पर आत्मघाती हमला किया, जिसमें 40 सुरक्षा कर्मी मारे गए थे।
  • जून 2024: रियासी में एक बस पर हमला हुआ, जिसमें कम से कम नौ नागरिकों की मौत हुई थी।
  • अप्रैल 2025: पहलगाम में एक आतंकी हमले में 26 लोगों की हत्या हुई, यह दशक का सबसे घातक हमला माना गया।
  • अक्टूबर 2024: सोनमर्ग के पास सुरंग निर्माण स्थल पर हमला हुआ, जिसमें सात लोग मारे गए थे। मरने वालों में गैर-स्थानीय मजदूर शामिल थे।
  • जनवरी 2023: राजौरी जिले में दो दिन में हुए हमलों में एक बच्चे सहित कई लोग मारे गए थे।

अब अगला कदम क्या?

इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि सुरक्षा बलों की सक्रियता और रणनीतियों के चलते आतंकवादी घटनाओं और नागरिकों की मौतों में कमी आई है। हालांकि, हालिया हमले यह याद दिलाते हैं कि खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। चुनौतियां अब भी सामने हैं। ऐसे में जरूरी है कि स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों का दायित्व है कि प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा के लिए विशेष कदम उठाएं। वहीं आम लोगों को समझना होगा कि समस्या अब भी बनी है, तो सतर्कता बनाए रखें।

महत्वपूर्ण यह भी है कि प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा, स्थानीय समुदायों के साथ संवाद और सुरक्षा नेटवर्क को मजबूत किया जाए। इसके लिए सरकार को ठोस नीतियां बनानी होंगी और सुरक्षा बलों को अत्याधुनिक तकनीक से लैस करना होगा। स्थानीय समुदायों के सहयोग से ही इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है।