
केंद्र सरकार द्वारा जारी वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के GDP आंकड़ों ने बड़ा सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। सरकार का दावा है कि इस दौरान भारत की वास्तविक GDP वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई है और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच यह आंकड़ा उम्मीद से बेहतर है। इस मजबूत आंकड़े पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वीडियो संदेश जारी कर देशवासियों को बधाई दी और इसे 140 करोड़ भारतीयों के संकल्प व सामूहिक मेहनत का नतीजा बताते हुए स्वदेशी अपनाने की अपील की।
केंद्र सरकार द्वारा जारी GDP के आंकड़ों पर पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने सवाल उठाया है। सुभाष चंद्र गर्ग ने दावा किया कि अगर पिछले साल की जीडीपी को करीब 86 लाख करोड़ रुपये से घटाकर 80 लाख करोड़ रुपये न किया गया होता, तो मौजूदा कीमतों पर वास्तविक वृद्धि दर करीब 2.6 प्रतिशत ही होती। उनका तर्क था कि वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही के लिए नई जीडीपी सीरीज में 'रियल जीडीपी' का जो आंकड़ा अब बेस के तौर पर इस्तेमाल हो रहा है। वह सरकार ने पहली बार जारी किया है, इसलिए इससे तुलना करते समय सावधानी बरतनी चाहिए।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में पुरानी और नई सीरीज के बीच का अंतर करीब 1.37 लाख करोड़ रुपये पॉजिटिव था, जबकि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में यही अंतर 1.06 लाख करोड़ रुपये निगेटिव हो गय। सूत्रों के मुताबिक, इस बदलाव का ताजा ग्रोथ रेट पर करीब 3.2 प्रतिशत अंक का असर पड़ा। एक और अहम तथ्य यह भी है कि यह पहला मौका नहीं है, जब पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत का आंकड़ा सामने आया हो, पिछले साल भी पहली तिमाही में विकास दर 7.8 प्रतिशत बताई गई थी। लेकिन बाद में संशोधन के बाद इसे घटाकर 6.9 प्रतिशत कर दिया गया था, जिससे संशयवादियों के तर्क को और बल मिला है।
सरकार की ओर से इस दावे को सिरे से खारिज किया गया। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव सौरभ गर्ग ने स्पष्ट किया कि हालिया जीडीपी अनुमान की तुलना पुरानी डेटा सीरीज़ से करना दो बिल्कुल अलग चीजों की तुलना करने जैसा है। 7.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी ठोस आउटपुट डेटा पर आधारित है।
सांख्यिकी मंत्रालय पहले भी इस तरह के स्पष्टीकरण दे चुका है। नई और पुरानी सीरीज के आंकड़ों की तुलना को 'सेब और संतरे की तुलना' बताते हुए मंत्रालय ने आगाह किया था कि पुरानी सीरीज की 5 प्रतिशत वृद्धि दर नई सीरीज में 6.5 या 7 प्रतिशत के बराबर भी हो सकती है। बता दें कि नई जीडीपी सीरीज में आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 किया गया है। इसमें CGA, MCA-21, RBI के अलावा GST, ई-वाहन पोर्टल तथा UPI जैसे नए डेटा स्रोतों को भी शामिल किया गया है। यही वजह है कि सरकार पुराने और नए आंकड़ों की सीधी तुलना को गुमराह करने वाला मानती है।
राजनीतिक मोर्चे पर कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार आंकड़ों की बाजीगरी से गढ़ी गई फर्जी वाहवाही का ढोल पीट रही है, जबकि जमीनी हकीकत इसके उलट है। कांग्रेस पार्टी ने विधिवत बयान में यह भी कहा कि 7.8 प्रतिशत की जीडीपी ग्रोथ आर्थिक 'बहार' नहीं है, बल्कि यह अर्थव्यवस्था की बहुत गलत तस्वीर पेश करती है, क्योंकि इसमें निवेश को लेकर कमजोर सेंटीमेंट नहीं झलकता। इस बहस में राष्ट्रीय जनता दल के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव का भी बयान सामने आया है। तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री के जीडीपी दावों पर सवाल उठाए है।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने पलटवार करते हुए कहा कि कुछ बेरोजगार लोग खुद को अर्थशास्त्री बताकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं और सच छुपाया नहीं जा सकता। उन्होंने 7.8 प्रतिशत की रिकॉर्ड ग्रोथ को किसी अन्य देश द्वारा न दोहराए जाने वाली उपलब्धि बताया। यह विवाद सिर्फ एक संख्या का नहीं, बल्कि जीडीपी मापने की पद्धति, आधार वर्ष परिवर्तन और डेटा स्रोतों में बदलाव को लेकर पारदर्शिता की मांग का भी है। सरकार नई पद्धति को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बता रही है, वहीं विपक्ष और कुछ पूर्व नौकरशाह आंकड़ों की तुलनात्मकता पर सवाल उठा रहे हैं।