
QR Code Scam: नेहा बाजार में सब्जी खरीदने गई। दुकानदार ने पेमेंट के लिए QR कोड दिखाया। उन्होंने जल्दी से मोबाइल निकाला, QR कोड स्कैन किया और पेमेंट कर दिया। यह रोजमर्रा की एक सामान्य घटना है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस QR कोड पर आप हर दिन आंख मूंदकर भरोसा करती हैं, वह किसी साइबर अपराधी का जाल भी हो सकता है?
डिजिटल पेमेंट ने भारत में लेन-देन को बेहद आसान बना दिया है। होटल, अस्पताल, मंदिर, पार्किंग, पेट्रोल पंप, किराना दुकान, यहां तक कि सड़क किनारे ठेले तक QR कोड पहुंच चुका है। समस्या यह नहीं है कि QR कोड खतरनाक है, बल्कि परेशानी यह है कि इंसान QR कोड को पढ़ नहीं सकता। वह यह नहीं जान सकता कि स्कैन करने के बाद मोबाइल किस वेबसाइट पर जाएगा या किस लिंक को खोलेगा। साइबर अपराधी आपकी इसी कमजोरी का फायदा उठा रहे हैं। यही वजह है कि साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ अब QR बेस्ड धोखाधड़ी को केवल बैंकिंग फ्रॉड नहीं, बल्कि डिजिटल पहचान पर हमला मान रहे हैं।
मानव व्यवहार की एक खास प्रवृत्ति है कि वह मशीन द्वारा बनाए गए संकेतों पर आसानी से और अटूट भरोसा करता है। QR कोड दिखने में तकनीकी और व्यवस्थित लगता है। लोग मान लेते हैं कि इसे किसी अधिकृत संस्था ने लगाया होगा। यही कारण है कि वे बिना जांचे स्कैन कर देते हैं। जब किसी ईमेल में संदिग्ध लिंक दिखता है तो लोग कई बार सतर्क हो जाते हैं, लेकिन QR कोड के मामले में यह सतर्कता लगभग खत्म हो जाती है, क्योंकि इसके अंदर छिपा लिंक आंखों से नजर नहीं आता।
साइबर सुरक्षा की दुनिया में QR आधारित फिशिंग को Quishing (QR + Phishing) कहा जाता है। इसमें अपराधी नकली QR कोड बनाकर लोगों को ऐसी वेबसाइट पर पहुंचा देते हैं, जो बिल्कुल असली बैंक, UPI ऐप, सरकारी वेबसाइट या ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म जैसी दिखती है। वहां लॉगिन, कार्ड विवरण, UPI PIN या अन्य संवेदनशील जानकारियां मांगी जाती है। वहीं कुछ मामलों में QR स्कैन करते ही मोबाइल में हानिकारक ऐप डाउनलोड कराने की कोशिश भी की जाती है।
QR स्कैन के बाद खतरा केवल बैंक खाते तक सीमित नहीं रहता। यदि उपयोगकर्ता किसी नकली वेबसाइट पर अपनी जानकारी दर्ज कर देता है या किसी संदिग्ध ऐप को अनुमति दे देता है तो अपराधी, ईमेल अकाउंट तक अपनी पहुंच बना सकते हैं। सोशल मीडिया अकाउंट पर कब्जा कर सकते हैं। मोबाइल में मौजूद संपर्क सूची प्राप्त कर सकते हैं। भविष्य में और बड़े साइबर हमले कर सकते हैं। कुल मिलाकर आपकी छोटी सी लापरवाही आपकी पूरी डिजिटल लाइफ प्रभावित कर सकती है।
अमेरिकी संघीय जांच ब्यूरो (FBI) ने अपनी साइबर सुरक्षा सलाह 2022 में कहा है- 'अपराधी QR कोड से छेड़छाड़ कर लोगों को फर्जी वेबसाइटों तक पहुंचा रहे हैं, जहां उनकी वित्तीय जानकारी चोरी की जाती है।'वहीं यूके के National Cyber Security Centre (NCSC) ने भी सलाह दी है कि 'QR कोड भी मूल रूप से एक लिंक ही है, इसलिए केवल भरोसेमंद स्रोत का ही QR स्कैन करना चाहिए।'भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल भुगतान बाजारों में शामिल है। करोड़ों लोग प्रतिदिन UPI के माध्यम से QR कोड स्कैन करते हैं। ऐसे में जितना अधिक उपयोग बढ़ेगा, अपराधियों के लिए अवसर भी उतने ही बढ़ते जाएंगे। यही कारण है कि अब साइबर अपराधी QR आधारित ठगी के नए तरीके विकसित कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI की मदद से नकली वेबसाइट और नकली QR आधारित धोखाधड़ी का जोखिम और ज्यादा बढ़ सकती है।
भले ही QR कोड ने आज डिजिटल पेमेंट को तेज और आसान बनाया है, लेकिन सुविधा के साथ सतर्कता भी उतनी ही जरूरी है। असली खतरा QR कोड नहीं है, बल्कि उस पर आंख मूंदकर भरोसा करना है। ध्यान रखिए साइबर अपराधी तकनीक से पहले हमारी और आपकी आदतों को निशाना बनाते हैं। इसलिए अगली बार जब आप किसी QR कोड को स्कैन करें, तो एक पल रुकें और यह जरूर सोचें की क्या यह वास्तव में भरोसा करने लायक है? ऐसी ही जरूरी, रोचक जानकारियों और जागरूक नागरिक बनने के लिए जुड़े रहिए हमारे साथ और पढ़ते रहिए patrika.com.