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RBI ने नीतिगत रेपो रेट 5.25% पर स्थिर रखी, क्या होम लोन और FD के ब्याज पर असर होगा?

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने MPC की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। RBI ने मौजूदा आर्थिक और वित्तीय घटनाक्रमों को देखते हुए नीतिगत रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखने का निर्णय लिया है। RBI के इस निर्णय से क्या असर होगा, आइए जानते हैं।
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Aug 25, 2026
rbi new guidelines on loan emi
सांकेतिक इमेज (सोर्स- gemini)

भारतीय अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति और मौद्रिक नीति को लेकर एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ी है। भारतीय रिजर्व बैंक ने वैश्विक अनिश्चितताओं और बढ़ती महंगाई के जोखिम के कारण रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा है। इसके साथ ही चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि का अनुमान घटाकर 6.6% और खुदरा महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.1% कर दिया गया है।

क्या है RBI की नई पॉलिसी?

RBI ने वैश्विक अनिश्चितताओें और कच्चे माल की ऊंची कीमत को देखते हुए चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि के अनुमान को घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है। पहले इसके 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया था। वहीं, 2026-27 के लिए खुदरा मुद्रास्फीति के अनुमान को बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है, जो पहले 4.6 प्रतिशत था।

चालू वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा ऐसे समय हुई है, जब पश्चिम एशिया में फरवरी के अंत से जारी युद्ध के कारण कच्चे तेल के दाम में तेजी आई है। इससे महंगाई बढ़ने का जोखिम बढ़ा है। बता दें कि पिछले साल फरवरी से दिसंबर, 2025 तक रेपो दर में कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती की जा चुकी है। फरवरी और अप्रैल की द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में भी नीतिगत दर को यथावत रखा गया था।

होम लोन और FD पर क्या असर होगा?

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने MPC की बैठक में पॉलिसी रेपो रेट को स्थिर रखा है। RBI के इस निर्णय से होम लोन की EMI और FD पर कोई असर नहीं होगा। रेपो वह ब्याज दर है, जिस पर वाणिज्यिक बैंक अपनी तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिये केंद्रीय बैंक से कर्ज लेते हैं। RBI के रेपो दर को यथावत रखने के फैसले से होम, वाहन और वाणिज्यिक कर्ज की मासिक किस्त (EMI) जस-की-तस बने रहने की संभावना है। RBI ने इसके साथ मौद्रिक नीति रुख को ‘तटस्थ’ बनाए रखा है। इसका मतलब है कि केंद्रीय बैंक आर्थिक स्थिति के हिसाब से नीतिगत दर में समायोजन को लेकर लचीला बना रहेगा।

रेपो रेट स्थिर रहने से क्या बदलेगा?

  • होम लोन, कार लोन और क्रेडिट कार्ड जैसे ऋण महंगे नहीं होंगे।
  • बचत खाते और फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाला ब्याज स्थिर रहता है।
  • महंगाई अगर सीमित रहे, तो रोजमर्रा की चीजें जैसे राशन, सब्जियां और ईंधन महंगी नहीं होतीं।
  • अगर खाद्य या ईंधन की कीमतें बढ़ती हैं, तो यह सीधे आपके खर्च पर असर डाल सकता है। खासकर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए।
  • अगर मानसून कमजोर रहा या खाद्य उत्पादन प्रभावित हुआ, तो खाद्य मुद्रास्फीति बढ़ सकती है।
  • मध्य पूर्व में तनाव या तेल की कीमतों में उछाल से ईंधन महंगा हो सकता है, जिससे महंगाई बढ़ेगी।
  • अगर मुद्रास्फीति कोर स्तर पर फैलने लगे, तो आरबीआई को दर बढ़ाने पर विचार करना पड़ सकता है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

विशेषज्ञों का कहना है कि आर्थिक विकास भले ही मजबूत दिख रहा हो, लेकिन लागत के दबाव अब साफ तौर पर दिखने लगे हैं। निर्माण सामग्री और मजदूरी की बढ़ती कीमतों से कुल निर्माण लागत पहले ही बढ़ चुकी है, जिससे कामगारों की कमी और प्रोजेक्ट में देरी हो सकती है। यह बढ़ी हुई लागत आखिरकार घर खरीदने वालों पर ही पड़ेगी, खासकर अफोर्डेबल और मिडिल-इनकम हाउसिंग सेगमेंट में।

यह सब वैश्विक परिस्थितियों की गंभीरता और कितने समय तक यह संकट चलता है, इस पर निर्भर करेगा। अगले कुछ तिमाहियों में रेपो रेट बढ़ने और होम लोन की ब्याज दरें बढ़ने की संभावना को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता। घर खरीदने वाले अब अपनी आय की स्थिरता को और ज्यादा सख्ती से जांचेंगे। रेपो रेट को स्थिर रखकर RBI ने संकेत दिया है कि सरकार ऑयल संकट के जल्द स्थिर होने और महंगाई पर काबू पाने की उम्मीद कर रही है।

निर्माण लागत पर असर दिख रहा है, लेकिन अभी यह मैनेज करने के स्तर पर है। यह फैसला हाउसिंग सेक्टर के लिए सकारात्मक है। ब्याज दरों में स्थिरता आसानी और खरीदारों के आत्मविश्वास के लिए बेहद जरूरी है। उधार लेने की लागत लंबे समय तक स्थिर रहने से रेजिडेंशियल डिमांड को मजबूती मिलेगी, खासकर फर्स्ट-टाइम होमबायर्स और अपग्रेडर्स को। डेवलपर्स को भी प्रोजेक्ट प्लानिंग और निवेश के लिए बेहतर विजिबिलिटी मिलेगी।

Updated on:
25 Aug 2026 03:24 pm
Published on:
25 Aug 2026 03:24 pm