25 अगस्त 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

सोना-चांदी तो सबने खरीदा, लेकिन असली बादशाह निकला यह मेटल, कहीं आपने तो नहीं गंवा दिया मौका?

metal investment options copper platinum: सोना-चांदी की बढ़ती कीमतों के बीच एक विकल्प और है, क्या आप जानते है क्या है इस मेटल का नाम जिसने 2025 में 60 फीसदी से भी ज्यादा रिटर्न देकर हर किसी को चौंका दिया था। जानिए प्लैटिनम, पल्लाडियम और कॉपर जैसे विकल्प आपके निवेश पोर्टफोलियो को कैसे बदल सकते हैं
3 min read
Google source verification

भारत

image

Sanjana Kumar

Aug 25, 2026

metal investment options

metal investment options: क्या आप भी कर रहे हैं इन्वेस्टमेंट की प्लानिंग? (AI Creative)

Metal investment options copper platinum: सोने और चांदी को अब तक आपने भी 'सबसे सुरक्षित निवेश' मानकर खरीदा होगा। लेकिन क्या आपको पता है कि पिछले साल एक और धातु ने इन दोनों को रिटर्न के मामले में पीछे छोड़ दिया? मेटल निवेश की दुनिया में कदम रखना अब पहले से कहीं ज्यादा मायने रखता है। हाल के रुझानों से पता चलता है कि युवा निवेशक, छोटे व्यापारी और रिटायरमेंट प्लानर अब सिर्फ पारंपरिक धातुओं तक सीमित नहीं रहना चाहते। वे ऐसी धातुओं की ओर भी देख रहे हैं, जो औद्योगिक विकास, ऊर्जा संक्रमण और वैश्विक आपूर्ति-डिमांड असंतुलन से लाभ उठा सकती हैं।

निवेश के नए विकल्प: प्लैटिनम, पल्लाडियम और कॉपर

प्लैटिनम और पल्लाडियम जैसी धातुओं ने हाल के वर्षों में निवेशकों का ध्यान खींचा है। 2025 में पल्लाडियम ने मजबूत लाभ दिखाया, जबकि प्लैटिनम की औद्योगिक मांग में वृद्धि हुई। इलेक्ट्रॉनिक्स में 6%, रसायनों में 8% और हाइड्रोजन अनुप्रयोगों में 70% की वृद्धि देखी गई। हालांकि, 2026 में प्लैटिनम की जैविक मांग में गिरावट आई। दूसरी ओर, पल्लाडियम की मांग ऑटोमोबाइल क्षेत्र में अनिश्चितता के कारण स्थिर रही।

असली चौंकाने वाला नाम है कॉपर यानी तांबा

अब एक प्रमुख निवेश विकल्प बनकर उभरने वाला मेटल है कॉपर यानी तांबा। 2025 में कॉपर ने 60% से अधिक रिटर्न दिया, जो इसे सोने और चांदी से भी बेहतर बनाता है। इसकी वजह है, इलेक्ट्रिक वाहनों, डेटा सेंटर, ऊर्जा संक्रमण और AI जैसी तकनीकों में इसकी बढ़ती मांग। S&P Global की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 से 2040 तक वैश्विक कॉपर की मांग 28 मिलियन टन से बढ़कर 42 मिलियन टन हो सकती है और अगर उत्पादन नहीं बढ़ा तो, 2040 तक 10 मिलियन टन की कमी हो सकती है।

निवेश के रास्ते, आप कैसे कर सकते हैं शुरुआत

भारतीय निवेशक अब सिर्फ भौतिक धातुओं तक सीमित नहीं हैं। वे ETF, म्यूचुअल फंड, MCX फ्यूचर्स, और माइनिंग स्टॉक्स के माध्यम से भी निवेश कर रहे हैं। हालांकि, भारत में SEBI की नियमावली के कारण फिलहाल सिर्फ सोना और चांदी पर आधारित ETF ही संभव हैं। अन्य धातुओं पर ETF के लिए भौतिक बैकिंग की आवश्यकता होती है, जो कॉपर जैसे भारी धातुओं के लिए मुश्किल है।

फिर भी, निवेशक MCX फ्यूचर्स, भारतीय माइनिंग कंपनियों जैसे Hindustan Copper, Hindalco, Nalco में सीधे निवेश कर सकते हैं। इसके अलावा, विदेशी प्लेटफॉर्म्स और LRS (लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम) के तहत वैश्विक ETFs में निवेश की सुविधा भी उपलब्ध है।

जोखिम भी हैं, तो सावधानी है जरूरी

प्लैटिनम और पल्लाडियम की तरलता सोने-चांदी की तुलना में कम है। ये निवेश आम निवेशकों के लिए अधिक जटिल हो सकते हैं। पल्लाडियम की मांग ऑटो सेक्टर पर निर्भर है, जो इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ रहा है। इसलिए भविष्य में इसकी मांग घट सकती है। कॉपर में निवेश में दीर्घकालिक अवसर है, लेकिन यह अत्यधिक अस्थिर भी हो सकता है। इसके अलावा, विदेशी ETFs में निवेश करते समय मुद्रा जोखिम और अतिरिक्त लागत (जैसे ट्रांजेक्शन फीस, टैक्स) का ध्यान रखना जरूरी है।

यह जानना भी जरूरी

  1. अपने पोर्टफोलियो में सोने को मुख्य धातु के रूप में रखें, यह सबसे तरल और सांस्कृतिक रूप से स्वीकार्य विकल्प है
  2. यदि आप औद्योगिक विकास और उच्च वृद्धि की तलाश में हैं, तो कॉपर में छोटी हिस्सेदारी (जैसे 5-10%) जोड़ें
  3. प्लैटिनम और पल्लाडियम को विशेषज्ञ या लंबी अवधि के निवेश के रूप में देखें—जब तक आप उनकी अस्थिरता और तरलता को समझते हैं
  4. निवेश के लिए ETF, म्यूचुअल फंड, MCX फ्यूचर्स और माइनिंग स्टॉक्स जैसे विकल्पों का मिश्रण अपनाएं
  5. विदेशी निवेश करते समय मुद्रा जोखिम, टैक्स और फीस को ध्यान में रखें

धातु निवेश का भविष्य कैसा?

भविष्य में, धातु निवेश का परिदृश्य और भी जटिल हो सकता है। नई तकनीकों और नीतियों के चलते धातुओं की मांग में बदलाव आ सकता है। उदाहरण के लिए, ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन में प्लैटिनम की भूमिका बढ़ सकती है। इसके अलावा, सरकार की नीतियों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों का भी धातु बाजार पर प्रभाव पड़ सकता है। निवेशकों को इन परिवर्तनों पर नजर रखनी चाहिए और अपने निवेश को समय-समय पर पुनः मूल्यांकित करना चाहिए।

कहना होगा कि सोने और चांदी की पारंपरिक सोच को चुनौती देते हुए, प्लैटिनम, पल्लाडियम और कॉपर जैसे धातुओं ने निवेशकों के लिए नए अवसर खोले हैं। कॉपर विशेष रूप से ऊर्जा संक्रमण और तकनीकी विकास के दौर में दीर्घकालिक संभावनाओं से भरा हुआ है। हालांकि, हर धातु की अपनी जोखिम-लाभ प्रोफाइल होती है, इसलिए निवेश से पहले अपनी जोखिम सहनशीलता, निवेश अवधि और तरलता की जरूरतों को समझना जरूरी है।