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संपादकीय: पुलिस की छवि सुधार में एडवाइजरी ही काफी नहीं

डिजिटल युग में पुलिस की हर गतिविधि कैमरे में कैद होकर पल भर में सार्वजनिक हो सकती है। ऐसे में केवल एडवाइजरी नहीं, बल्कि पुलिस के व्यवहार में स्थायी मानवीयता और संयम जरूरी है।
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जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान आंदोलनकारियों से पुलिस के मनमाने बर्ताव के वीडियो व मीम वायरल होने के बाद दिल्ली पुलिस को केंद्रीय जांच एजेंसियों की ओर से जारी एडवाइजरी में पुलिस को मददगार की छवि के साथ पेश आने के लिए कहा गया है। पुलिस को हर हाथ के मोबाइल में मौजूद कैमरों से सतर्क रहने की यह नसीहत पुलिस की छवि सुधार का एक प्रयास हो सकती है। यह इसलिए भी कि आज एक छोटा-सा वीडियो क्लिप या मीम पूरी पुलिस संस्था की छवि पर विपरीत असर डालने वाला हो सकता है। इस एडवाइजरी के पीछेे यह डर भी छिपा है कि डिजिटल युग में पुलिस की हर गतिविधि रिकॉर्ड ही नहीं, बल्कि पल भर में सार्वजनिक भी हो सकती है। इसी संभावना को देखते हुए पुलिस से शालीन और संयत बर्ताव की अपेक्षा की गई है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि हमारी पुलिस की छवि आखिर 'ऑफ कैमरा' भी ऐसी क्यों न रहे जैसी उससे 'ऑन कैमराÓ अपेक्षित है। अनावश्यक बल प्रयोग यानी डंडे का जोर, खुद ही फैसला करने की मानसिकता और मनमाने बर्ताव वाली पुलिस की कार्यशैली से जुड़े किस्से जब भी सामने आते हैं तो समूचे पुलिस बेड़े की छवि पर इसका असर पड़ता है। यह सच है कि अपराधों की रोकथाम के लिए उसे अपराधियों के प्रति सख्त रवैया अपनाना ही पड़ता है। लेकिन यह सख्ती जब कू्ररता में तब्दील होती दिखे तो फिर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठना लाजिमी है। कैमरे के सामने शांत रहने वाली पुलिस जब कैमरे के पीछे कठोर व संवेदनहीन बर्ताव करती नजर आएगी तो इस विरोधाभास से तो आमजन में छवि धूमिल ही होगी। जाहिर है, सिर्फ इस तरह की एडवाइजरी से ही पुलिस की छवि में सुधार नहीं होगा, बल्कि पुलिस सुधार के उन उपायों पर भी अमल करना होगा, जो कई कमेटियों की सिफारिशों के रूप में ठंडे बस्ते में चली गई हैं। पुलिस को 'आम जन में विश्वास और अपराधियों में भयÓ के ध्येय वाक्य के साथ काम करना होता है लेकिन आमजन पुलिस से भयभीत होने लगे तो चिंता होना स्वाभाविक है। इसमें दोराय नहीं कि हमारे यहां ईमानदार और खुद की जान पर खेलकर लोगों की रक्षक बनने वाली पुलिस के किस्से भी होते हैं। इसके उलट बेकसूरों पर वर्दी का रौब दिखाने वालों का कू्रर चेहरा भी गाहे-बगाहे सामने आ ही जाता है।

पूछताछ, जांच और गिरफ्तारी जैसे संवेदनशील क्षणों में पुलिस का संयमित और मानवीय व्यवहार ही जनता में भरोसा जगाने वाला होता है। दिल्ली पुलिस के लिए जारी एडवाइजरी समूचे देश के पुलिस तंत्र पर लागू होनी चाहिए। इस जरूरत के साथ कि पुलिस सदैव अपनी छवि के लिए सजग रहे। कानून व्यवस्था और जनता में भरोसा बनाए रखना ही उसकी प्राथमिकता हो।