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टेंशन से बिगड़ सकता है दिमाग का ‘इंटरनल जीपीएस’, जानिए हार्मोन क्या करता है

Cortisol Navigation: जर्मनी के शोधकर्ताओं ने स्टडी के बाद पाया कि तनाव हार्मोन मस्तिष्क की 'ग्रिड कोशिकाओं' को सुस्त कर रास्ता खोजने की क्षमता कम कर देता है। हालांकि, मुख्य प्रणाली प्रभावित होने पर दिमाग का कॉडेट न्यूक्लियस हिस्सा बैकअप के रूप में काम संभाल लेता है।
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Aug 09, 2026
Brain Cortisol Navigation
तनाव और Cortisol से बिगड़ती दिमागी जीपीएस प्रणाली पर विशेष रिपोर्ट। (विजुअल: ChatGPT)

क्या आप कभी किसी परिचित शहर की गलियों में अचानक रास्ता भूल गए हैं? या फिर तनाव और घबराहट के क्षणों में ऐसा महसूस हुआ है कि आपको समझ ही नहीं आ रहा कि किस तरफ जाना चाहिए? अगर हां, तो इसके पीछे सिर्फ आपकी भुलक्कड़ आदत नहीं, बल्कि आपके शरीर के अंदर मौजूद रासायनिक बदलाव जिम्मेदार हो सकते हैं। जर्मनी की मशहूर रूर-यूनिवर्सिटी बोचुम (Ruhr-University Bochum) के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक नए वैज्ञानिक अध्ययन से यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि अत्यधिक मानसिक तनाव मानव मस्तिष्क की दिशा पहचानने और रास्ता खोजने की क्षमता को पूरी तरह से गड़बड़ा सकता है।

तनाव के दौरान हार्मोन 'कोर्टिसोल' परिपथों को गंभीर रूप से बाधित करता है

स्टडी के अनुसार संज्ञानात्मक मनोविज्ञान विभाग (Department of Cognitive Psychology) के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. उस्मान अकान (Dr. Osman Akan), अपने तंत्रिका मनोविज्ञान विभाग के साथियों और 'यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर हैम्बर्ग-एप्पेंडॉर्फ' के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर किए गए इस शोध में पाया कि तनाव के दौरान उत्पन्न होने वाला मुख्य हार्मोन 'कोर्टिसोल' (Cortisol) मस्तिष्क के स्थानिक अभिविन्यास (Spatial Navigation) परिपथों को गंभीर रूप से बाधित करता है। यह अध्ययन प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका 'PLOS Biology' में प्रकाशित हुआ है।

मस्तिष्क का 'आंतरिक जीपीएस' क्या है और यह कैसे काम करता है?

हमारे दिमाग के अंदर एक बेहद सटीक और जटिल नेविगेशन सिस्टम मौजूद होता है, जो ठीक उसी तरह काम करता है जैसे आपके स्मार्टफोन में 'गूगल मैप्स' या जीपीएस। मस्तिष्क के 'एंटोरहिनल कॉर्टेक्स' (Entorhinal Cortex) नामक हिस्से में विशेष तंत्रिका कोशिकाएं होती हैं, जिन्हें वैज्ञानिक भाषा में 'ग्रिड कोशिकाएं' (Grid Cells) कहा जाता है। जब भी हम किसी जगह से गुजरते हैं, तो ये कोशिकाएं एक दोहरावदार त्रिकोणीय या छट्ठेदार (Grid-like) पैटर्न में सक्रिय होती हैं। ये कोशिकाएं हमारे दिमाग में आसपास के वातावरण का एक काल्पनिक आंतरिक नक्शा (Mental Map) तैयार करती हैं, जिससे हमें यह समझने में मदद मिलती है कि हम इस समय कहाँ खड़े हैं और हमें अपनी मंजिल तक पहुँचने के लिए किस दिशा में मुड़ना है।

तनाव हार्मोन कोर्टिसोल आंतरिक जीपीएस प्रणाली को कितना नुकसान पहुंचाता है

वैज्ञानिकों को लंबे समय से यह तो पता था कि तनाव हमारी सोच, स्मृति और निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करता है, लेकिन तनाव हार्मोन कोर्टिसोल हमारी इस आंतरिक जीपीएस प्रणाली को किस हद तक नुकसान पहुंचाता है, इसका सटीक खाका इस अध्ययन में पहली बार सामने आया है।

प्रयोग और एमआरआई (MRI) अध्ययन की प्रक्रिया

इस प्रक्रिया को गहराई से समझने के लिए शोधकर्ताओं की टीम ने 40 स्वस्थ पुरुष स्वयंसेवकों पर एक विशेष प्रयोग किया। सभी प्रतिभागियों को दो अलग-अलग दिनों में प्रयोगशाला में बुलाया गया:

पहले चरण में: प्रतिभागियों को 20 मिलीग्राम 'कोर्टिसोल' (तनाव हार्मोन) की दवा दी गई।

दूसरे चरण में: उन्हें केवल एक 'प्लेसीबो' (बिना किसी असर वाली नकली दवा) दी गई, ताकि दोनों स्थितियों के अंतर का तुलनात्मक अध्ययन किया जा सके।

वर्चुअल रियलिटी' गेम या टास्क से सबकुछ बदला

दवा देने के बाद, प्रतिभागियों को एक कार्यात्मक चुंबकीय अनुनाद इमेजिंग (fMRI)Scanner के अंदर लिटाया गया। स्कैनर के अंदर उन्हें एक 'वर्चुअल रियलिटी' (VR) आधारित गेम या टास्क खेलने को दिया गया, जिसमें उन्हें एक विशाल आभासी घास के मैदान में पेड़ों की ओर बढ़ना था। जैसे ही प्रतिभागी किसी पेड़ के पास पहुँचते, वह पेड़ गायब हो जाता था। इसके बाद, प्रतिभागियों को बिना किसी दिशा-निर्देश के अपनी शुरुआती स्थिति तक वापस लौटने का सबसे सीधा और सटीक रास्ता खोजना होता था।

आसपास कोई स्थायी इमारत या लाइटहाउस नहीं था

शोधकर्ताओं ने इस प्रयोग को दो अलग-अलग परिस्थितियों में टेस्ट किया:

पहली स्थिति (बिना लैंडमार्क के): जहां आसपास कोई स्थायी इमारत या प्रकाश स्तंभ नहीं था।

दूसरी स्थिति (लैंडमार्क के साथ): जहां दूरी पर एक 'लाइटहाउस' (प्रकाशस्तंभ) मौजूद था, जिसे एक निश्चित संदर्भ बिंदु माना जा सकता था।

शोध के चौंकाने वाले परिणाम

एमआरआई (fMRI) डेटा और प्रतिभागियों के प्रदर्शन के विश्लेषण से निम्नलिखित महत्वपूर्ण बातें सामने आईं:

  1. गलतियों में भारी बढ़ोतरी

प्लेसीबो की तुलना में, जब प्रतिभागियों के शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ा हुआ था, तो उन्हें अपनी शुरुआती मंजिल तक पहुँचने में काफी ज्यादा कठिनाई हुई। उन्होंने सही रास्ता भटकने और गलत दिशा में जाने में काफी अधिक गलतियाँ कीं।

  1. ग्रिड कोशिकाओं का ठप पड़ना

एमआरआई स्कैन में स्पष्ट देखा गया कि कोर्टिसोल के प्रभाव में एंटोरहिनल कॉर्टेक्स की ग्रिड कोशिकाओं का प्राकृतिक 'ग्रिड पैटर्न' गायब होने लगा। जब वातावरण में कोई स्थायी संकेत (लाइटहाउस या लैंडमार्क) मौजूद नहीं था, तब तो यह आंतरिक जीपीएस प्रणाली लगभग पूरी तरह काम करना बंद कर देती थी।

तनाव बढ़ने पर कोर्टिसोल दिमाग की नेविगेशन प्रणाली पर असर डालता है, जिससे रास्ते व यादें भूल जाते हैं। (विजुअल: ChatGPT)

दिमाग अपने ही बनाए गए नेविगेशन नक्शों का उपयोग करने की क्षमता खो देता है

डॉ. उस्मान अकान के अनुसार: "जब कोई व्यक्ति तीव्र तनाव में होता है, तो उसका मस्तिष्क अपने ही बनाए गए आंतरिक नेविगेशन नक्शों का उपयोग करने की क्षमता खो बैठता है।"

दिमाग का बैकअप प्लान: 'कॉडेट न्यूक्लियस' का सक्रिय होना

इस अध्ययन का सबसे दिलचस्प पहलू यह था कि जब तनाव के कारण मुख्य जीपीएस (ग्रिड कोशिकाएं) काम करना बंद कर देती हैं, तब मस्तिष्क हार नहीं मानता। शोधकर्ताओं ने देखा कि कोर्टिसोल देने के बाद मस्तिष्क के एक अन्य हिस्से, जिसे 'कॉडेट न्यूक्लियस' (Caudate Nucleus) कहा जाता है, में गतिविधि अचानक बढ़ गई। यह इस बात का प्रमाण है कि जब मुख्य नेविगेशन नेटवर्क क्रैश हो जाता है, तो दिमाग खुद को बचाने और रास्ता ढूंढने के लिए एक 'वैकल्पिक रणनीति' या बैकअप सिस्टम पर निर्भर होने की कोशिश करता है।

अल्जाइमर और डिमेंशिया के इलाज में नई उम्मीद

यह शोध केवल रास्ता भटकने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी चिकित्सा लाभ भी हैं:

अल्ज़ाइमर रोग का कनेक्शन: अल्जाइमर रोग में मस्तिष्क का 'एंटोरहिनल कॉर्टेक्स' ही वह सबसे पहला क्षेत्र होता है जो धीरे-धीरे नष्ट होने लगता है। यही कारण है कि अल्जाइमर के शुरुआती मरीजों में सबसे पहला लक्षण अक्सर रास्तों को भूल जाना होता है।

दीर्घकालिक तनाव का खतरा: लंबे समय तक रहने वाला मानसिक तनाव डिमेंशिया और अल्जाइमर के सबसे बड़े जोखिम कारकों में से एक माना जाता है।

तनाव हार्मोन कोर्टिसोल संवेदनशील क्षेत्र को अस्थिर करता है

यह अध्ययन स्पष्ट रूप से दिखाता है कि कैसे तनाव हार्मोन कोर्टिसोल इस संवेदनशील क्षेत्र को लगातार अस्थिर करता है। भविष्य में इस ज्ञान का उपयोग तनाव से उत्पन्न होने वाले मानसिक रोगों और मनोभ्रंश (Demantia) के नए उपचार खोजने में किया जा सकेगा।

मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना और तनाव प्रबंधन करना जरूरी

बहरहाल, रूहर-यूनिवर्सिटी बोचुम के वैज्ञानिकों का यह अध्ययन हमें चेतावनी देता है कि मानसिक तनाव न केवल हमारे मूड और हृदय स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि यह हमारे दिमाग के सबसे संवेदनशील और बुनियादी मानचित्रण कार्यों को भी पंगु बना सकता है। इसलिए, मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना और तनाव प्रबंधन करना हमारे दिमाग को हर दिशा में स्वस्थ रखने के लिए बेहद जरूरी है।

Updated on:
09 Aug 2026 12:11 pm
Published on:
09 Aug 2026 12:11 pm