
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में संसदीय परामर्श समिति की बैठक में भारत-रूस के बहुआयामी रिश्तों की तस्वीर रखी। बैठक की जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक, रूस इस साल करीब 70 हजार भारतीय कुशल कामगारों को लेने पर सहमत हुआ है। खासकर निर्माण और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में विशेष जोर दिया गया। बैठक में व्यापार, निवेश और ऊर्जा सहयोग के साथ यूक्रेन युद्ध पर भारत का रुख भी चर्चा में रहा।
रूस की संसद ने भारतीयों के रोजगार का रास्ता कानूनी तौर पर साफ करने की ओर कदम बढ़ाया है। रूस की स्टेट ड्यूमा ने 1 अक्टूबर को और फेडरेशन काउंसिल ने अगले दिन इस समझौते को मंजूरी दी। यह समझौता पिछले साल 4 दिसंबर को नई दिल्ली में हुआ था। यह समझौता दोनों देशों के नागरिकों के अस्थायी रोजगार को नियंत्रित करता है। समझौते का मकसद श्रमिकों की संख्या, रोजगार क्षेत्रों और श्रम प्रवाह को बेहतर ढंग से नियंत्रित करना है, ताकि यह रूस की सामाजिक-आर्थिक जरूरतों के अनुरूप रहे।
भारत-रूस समझौते का दायरा सिर्फ कामगारों तक सीमित नहीं है। इसमें रोजगार और सेवा अनुबंधों के साथ वे पूर्णकालिक छात्र भी शामिल हैं जो पढ़ाई के बाहर अस्थायी काम करते हैं। हालांकि, दोनों सरकारों की घरेलू प्रक्रिया पूरी होने और अंतिम लिखित अधिसूचना जारी होने के बाद ही यह औपचारिक रूप से लागू होगा।
आंकड़ों के अनुसार भारतीयों के लिए मंजूर वर्क परमिट 2021 के करीब 5,000 से बढ़कर पिछले साल लगभग 72,000 हो गए, जो रूस के वीजा-आधारित प्रवासी कोटे का करीब एक-तिहाई है। यानी 70 हजार का आंकड़ा रूस के श्रम बाजार में भारतीयों की बढ़ती हिस्सेदारी की पुष्टि करता है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ऑटोमोबाइल, फार्मा, खाद्य उत्पाद, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान, रसायन और टेक्सटाइल, इन सात क्षेत्रों को निर्यात बढ़ाने के लिए चिह्नित किया। मकसद द्विपक्षीय व्यापार को अधिक संतुलित बनाना है, जिसमें अब तक रूस से आयात का पलड़ा भारी रहा है। यह फिलहाल लक्ष्य और इरादा है, किसी तय आंकड़े या समझौते की घोषणा नहीं।
ऊर्जा सहयोग पर जयशंकर ने कहा कि भारत की प्राथमिकता भारतीय उपभोक्ताओं के हित सुरक्षित रखना है। उनके शब्दों में, भारत का तरीका आपूर्ति के कई स्रोत बनाए रखना है। जयशंकर ने कहा कि भारत संवाद और कूटनीति के जरिए युद्ध खत्म कराने के प्रयासों का सक्रिय समर्थन करता है।
बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की 31 अगस्त को बिश्केक में हुई मुलाकात का भी जिक्र आया, जहां मोदी ने कहा था कि "अंतहीन युद्ध" अब खत्म होना चाहिए। रूस और यूक्रेन के विदेश मंत्रियों से जयशंकर की मुलाकातें संयुक्त राष्ट्र महासभा के मौके पर हुई थीं। यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रेई सिबिहा द्वारा भारत के प्रयासों की सराहना का भी बैठक में उल्लेख हुआ।
यह मुद्दा रोजगार की खबर का दूसरा पहलू है। जयशंकर ने बताया कि रूसी सेना से अब तक करीब 140 भारतीय नागरिक मुक्त (डिस्चार्ज) हो चुके हैं, जबकि 55 भारतीयों के ठिकाने के बारे में रूसी अधिकारियों से जानकारी जुटाई जा रही है। सितंबर में विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया था कि 227 भारतीयों की रूसी सेना में भर्ती की जानकारी है, जिनमें 139 मुक्त हुए और 51 की मौत हो चुकी है। यही वजह है कि विदेश में नौकरी की चाहत रखने वालों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि उम्मीदवार केवल आधिकारिक भर्ती माध्यमों पर भरोसा करें और वीजा, अनुबंध और नियोक्ता की जानकारी की पड़ताल करने के बाद ही विदेश में नौकरी स्वीकार करें। समझौते का मकसद रोजगार प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाना है, लेकिन आवेदकों को फर्जी एजेंटों और अनधिकृत ऑफर से बचना होगा। अब सभी की नजरें समझौते के लागू होने की औपचारिक अधिसूचना, भर्ती की प्रक्रिया और चयन के तरीके पर रहेंगी। साथ ही निर्यात बढ़ाने के लक्ष्य पर ठोस कदम और सेना में फंसे भारतीयों की वापसी पर प्रगति भी इस रिश्ते की दिशा तय करेगी।