
कुन्नूर। पति-पत्नी के विवाहेत्तर संबंधों को लेकर आए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने सवाल उठाया है। कांग्रेस नेता ने व्यभिचार कानून पर फैसला सुनाने वाले जज की मानसिक हालत पर भी सवाल उठाए हैं। दरअसल, कांग्रेस नेता के. सुधाकरन ने कहा है कि व्यभिचार को अपराध ठहराने वाले आईपीसी के सेक्शन 497 को हटाने वाले जज के मानसिक स्वास्थ्य की जांच किए जानी चाहिए। कुन्नूर में एक जनसभा को संबोधित कर रहे कांग्रेस नेता ने न्यायपालिका से इस फैसले पर पुर्नविचार करने को भी कहा। उन्होंने कहा कि यह फैसला भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों के लिए घातक है। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में व्यभिचार कानून को समाप्त कर दिया है।
यहां चौंकाने वाली बात यह है कि कांग्रेस नेता ने यह अदालत की अवमानना वाला बयान एक लोगों की भीड़ वाले सम्मेलन में दिया, बावजूद इसके उन पर किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की गई।
केरल राज्य के कांग्रेस के अध्यक्ष सुधाकरन ने यह भी कहा कि भारत विश्वजगत में अपने पारिवारिक और सांस्कृतिक मूल्यों के कारण जाना जाता रहा है। व्यभिचार पर कोर्ट के फैसले का जिक्र करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि इससे साबित होता है कि जज को भारत के पारिवारिक मूल्यों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। सुधाकरण ने जज से अपने फैसले पर एक बार फिर से विचार करने की मांग की। सोचना चाहिए।
कांग्रेस नेता ने जज की मंश पर सवाल उठाते हुए कहा कि हमारे पारिवारिक मूल्य हमारे लिए गर्व की बात है। ऐसे में अगर पति और पत्नी दोनों अलग—अलग रास्ते पर जाते हैं तो पारिवारिक जीवन बचाना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने जज के मानसिक चेकअप की भी बात कही।